व्यापार

बैंक में लावारिस पड़े 78000 करोड़ के मिलने का रास्ता साफ, एक फॉर्म से सारा काम

नई दिल्ली
 बैंकों में पड़े अनक्लेम्ड अमाउंट यानी लावारिस रकम को हासिल करना और आसान हो जाएगा. ईटी की रिपोर्ट के अनुसार, इस संबंध में सरकारी और प्राइवेट बैंक जल्द ही एक आसान जनरल फॉर्मेट पेश करेंगे, जिससे खाताधारकों या उनके नामांकित व्यक्तियों को 78,213 करोड़ रुपये से अधिक की लावारिस जमा राशि वापस मिल सकेगी. इस मामले से वाकिफ लोगों ने इस बात की जानकारी दी है. इस सिस्टम में सामान्य आवेदन और डिक्लरेशन फॉर्म के अलावा लावारिस जमा राशियों को फिर से प्राप्त करने के लिए जरूरी स्टैंडर्ड डॉक्युमेंट्स की सूची भी शामिल होगी.

वर्किंग ग्रुप ने तैयार किया मसौदा

एक सरकारी बैंक के एक्जीक्यूटिव ने बताया कि आवेदन के साथ नाम, मोबाइल नंबर और पता जैसी डिटेल देनी होगी, जिन्हें वेरिफिकेशन के बाद संबंधित बैंक शाखा द्वारा प्रोसेस्ड किया जाएगा. एक अन्य बैंक अधिकारी ने कहा, “अनक्लेम्ड डिपॉजिट के मुद्दे पर विचार करने के लिए गठित वर्किंग ग्रुप की सिफारिशों को स्वीकार कर लिया गया है. ऐसे में वित्त वर्ष 2026 से, ‘ऑनलाइन रिट्रीवल मैकेनिज्म’ पूरी तरह से चालू हो जाएगा.”

दरअसल, पिछले साल भारतीय रिजर्व बैंक (RBI), सरकार और अन्य हितधारकों के साथ चर्चा के बाद, सरकारी बैंकों के वरिष्ठ बैंकरों का एक कार्य समूह बनाया गया था, जिसे बैंकों में लावारिस पड़ी रकम के सेटलमेंट में तेजी लाने के तरीकों की सिफारिश करने को कहा गया था.

78000 करोड़ की लावारिस रकम

बैंक खातों में जमा वह राशि, जो 10 वर्ष या उससे अधिक अवधि से पड़ी है, उसे RBI के जमाकर्ता शिक्षा और जागरूकता (DEA) कोष में ट्रांसफर कर दिया जाता है. मार्च 2024 तक इस फंड में ₹78,213 करोड़ जमा थे, जो पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में 26% की वृद्धि दर्शाता है. इस रकम को खाताधारक या उनकी मृत्यु होने की दशा में संबंधित उत्तराधिकारी एक नियम के तहत प्राप्त कर सकते हैं. बैंकों में अनक्लेम्ड अमाउंट के मामले ज्यादातर नॉमिनी के रजिस्टर्ड नहीं होने से देखने को मिलते हैं.

 

RO No. 13169/ 31

RO No. 13098/ 20

PRATYUSHAASHAKINAYIKIRAN.COM
Editor : Maya Puranik
Permanent Address : Yadu kirana store ke pass Parshuram nagar professor colony raipur cg
Email : puranikrajesh2008@gmail.com
Mobile : -91-9893051148
Website : pratyushaashakinayikiran.com