मध्यप्रदेश

न्यायालय मे विचाराधीन व्यवसायिक भूमि कृषि भूमि मे परिवर्तित , आवेदक ने अनुविभागीय अधिकारी राजस्व कि भूमिका पर उठाया सवाल

डिंडोरी
कभी अतिक्रमण विरोधी मुहिम को लेकर तो कभी नालों पर पट्टे वितरित करने को लेकर डिंडोरी का राजस्व विभाग हमेशा से ही सुर्खियों मे रहा है, लेकिन हद तो तब हो जाती है जब कार्यालय कलेक्टर से महज 200 मीटर कि दूरी पर स्थित व्यवसायिक प्रयोजन कि लगभग 1600 वर्गफ़ीट भूमि को कृषि भूमि मे परिवर्तित कर दिया जाये। हालाकि उक्त भूमि पोर्टल पर अब भी व्यवसायिक उपयोग कि दिखाई जा रही है। लेकिन मामला संगीन है कि क्यों और कैसे.? व्यवसायिक उपयोग कि भूमि को कृषि भूमि मे परिवर्तित कर दिया गया। वह भी तब जब मामला सिविल न्यायालय मे विचाराधीन हो। यहॉँ तक कि उक्त भूमि का मामला तत्कालीन अनुविभागीय अधिकारी ने भी खारिज कर दिया था।

कलेक्टर के पास पहुंचा मामला — सोमवार के दिन डिंडोरी निवासी आवेदक शैलेष मिश्रा ने कार्यालय कलेक्टर डिंडोरी मे एक शिकायत पत्र सौंप कलेक्टर डिंडोरी से यह प्रार्थना कि है कि न्यायालय से निर्णय होने तक उक्त भूमि के पंजीयन कार्य मे रोक लगाते हुये सम्पूर्ण मामले कि जांच कर कार्यवाही किये जाने कि मांग कि है।

प्रचलन मे है न्यायालयीन प्रकरण — आवेदक शैलेष मिश्रा ने पत्र मे स्पष्ट तौर पर उल्लेखित किया है कि खसरा क्रमांक 136/13/6 रकबा लगभग 4 डिसमिल जो कि नरेश मिश्रा पिता स्व. जगत नारायाण मिश्रा के नाम पर राजस्व अभिलेख मे दर्ज है। और उक्त भूमि को राजस्व अभिलेख मे ही व्यवसायिक प्रयोजन का दर्शाया गया है एवं भूमि मुख्य मार्ग पर स्थित है जिसके  चारों ओर व्यवसाय संचालित हैँ।जिसका त्रुटिपूर्ण बटवारा होने के चलते जिला सत्र न्यायालय डिंडोरी मे विचाराधीन है। क्यों कि उक्त भूमि के बटवारे मे बहन सीमा एवं रजनी को उनका अधिकार नहीं दिया गया है।

तत्कालीन अधिकारी ने किया था ख़ारिज — आवेदक शैलेष मिश्रा ने पत्र मे इस बात का उल्लेख भी किया है कि नरेश मिश्रा मौक़े का  फायदा उठाकर भूमि का विक्रय करना चाहता है, तथा नरेश मिश्रा के द्वारा विक्रय अनुमति हेतु तत्कालीन अनुविभागीय अधिकारी राजस्व के समक्ष आवेदन प्रस्तुत किया गया था, जिसमे सभी तथ्यों पर अवलोकन उपरान्त तत्कालीन अनुविभागीय अधिकारी ने विक्रय अनुमति मे रोक लगा दी थी।

राजस्व अधिकारी कि भूमिका पर सवाल –– कलेक्टर डिंडोरी को सौपे गये पत्र मे शैलेष ने अनुविभागीय अधिकारी राजस्व कि भूमिका पर सवाल उठाते हुये पारित आदेश को भी संदेहास्पद बताया है शैलेष के मुताबिक उक्त भूमि मे दूकान निर्मित होने व उसके चारों ओर व्यवसाय संचालित होने जिसका रकबा महज 4 डिसमिल है को कृषि मद मे परिवर्तित किया जाना उचित नहीं है।

पंजीयन कार्यालय मे अटकी फ़ाइल — पत्र के माध्यम से शैलेष ने यह भी अवगत कराया है कि अनुविभागीय अधिकारी राजस्व के आदेश का फायदा उठाते हुये नरेश मिश्रा दलालो और सर्विस प्रोवाइडरो से सांठ – गाँठ कर उक्त भूमि को दिनांक 29/03/25 को उप पंजीयक कार्यालय मे प्रस्तुत कर दिया गया है, जहाँ खसरे मे व्यवसायिक प्रयोजन दर्ज होने के कारण उप पंजीयक द्वारा पंजीयन कार्य को रोककर रखा गया है।

बहरहाल जब हमने इस सम्बन्ध मे अनुविभागीय अधिकारी राजस्व डिंडोरी से उनके फोन पर संपर्क किया तो उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।

इनका कहना है —
निरिक्षण का प्रावधान डी आर करते हैँ,हमारा काम दास्तावेजों के आधार पर फोटो के आधार पर काम करना है। अभी उनकी रजिस्ट्री नहीं हुई है डिसीजन नहीं हुआ है और ना ही भूमि खसरे मे दर्ज हुई है। इसलिए रजिस्ट्री नहीं हो सकती।

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