विदेश

पहलगाम आतंकी हमले को लेकर प्रोफेसर इश्तियाक अहमद ने अपनी सेना के प्रमुख आसिम मुनीर को ठहराया जिम्मेदार

नई दिल्ली
पहलगाम आतंकी हमले को लेकर पाकिस्तानी मूल के प्रोफेसर इश्तियाक अहमद ने अपनी सेना के प्रमुख आसिम मुनीर को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने कहा कि जिस तरह से जनरल आसिम मुनीर ने हिंदू और मुस्लिम को अलग बताया और फिर एक सप्ताह के अंदर ही आतंकियों ने ऐसा हमला कर दिया। हिंदू और मुसलमानों के अलग होने वाले बयान के मद्देनजर यह ध्यान देना जरूरी है कि आतंकियों ने लोगों को मारने से पहले चेक किया कि वे हिंदू या मुसलमान हैं। ऐसे में यह सवाल तो उठता ही है कि आखिर आसिम मुनीर के बयान के बाद ही ऐसा क्यों हुआ। उन्होंने कहा कि आसिम मुनीर को इस तरह का बयान नहीं देना था। इस बीच उन्होंने भारत की ओर से सिंधु जल समझौता रोके जाने पर भी बात की।

इश्तियाक अहमद ने कहा कि मेरे एक दोस्त लियाकत अली ने सिंधु जल समझौते को लेकर एक लेख लिखा था। उन्होंने बताया था कि 1960 में समझौते से पहले नदियों के पानी को लेकर खूब विवाद हुआ था। प्रोफेसर ने कहा कि जब विभाजन हुआ तो बड़े पैमाने पर तैयार नहरें और नदियां भारत के हिस्से में चली गईं। इससे पाकिस्तान की स्थिति खराब थी। भारत के पक्ष में कई ताकतें थीं और उसका पॉइंट भी सही माना गया, फिर भी भारत ने सिंधु जल समझौते को मंजूरी दी थी। उन्होंने इसे भारत का बड़प्पन करार दिया। प्रोफेसर अहमद ने कहा कि तीन से 4 जंगों के बाद भी इस समझौते को किसी ने नहीं छेड़ा था। नरेंद्र मोदी ने चुनाव में जीतने के बाद पाकिस्तान का दौरा किया था, लेकिन फिर पठानकोट हमला हुआ। ऐसे में भारत सरकार ने तय कर लिया कि हम पाकिस्तान को बख्शेंगे नहीं।

उन्होंने कहा कि समझौते के अनुसार 5 पंजाब की नदियां और एक मुख्य सिंधु नदी है। चिनाब, रावी और झेलम नदियां कश्मीर से होते हुए आते हैं। फिर भी भारत ने किसी भी तरह इन नदियों के प्रवाह को नहीं रोका। इस संधि को वर्ल्ड बैंक ने कराया था। अमेरिका, जापान, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया जैसे देश इसमें शामिल हैं। इनके कई प्रोजेक्ट्स हैं। भारत में जब हमले हुए हैं तो सवाल उठे हैं कि आखिर हम क्यों इस समझौते को बनाए रखे हैं। फिर भी उन्होंने इसे पूरी तरह खारिज नहीं किया है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तानी सेना प्रमुख ने जिस तरह का बयान दिया है, उसके चलते ही ऐसी स्थिति पैदा हुई। उन्होंने कहा कि अब हम फंस गए हैं। यदि सिंधु जल समझौते पर भारत ने ऐक्शन लिया तो नुकसान हमारा ही होगा।

टू नेशन थ्योरी पर भी उठाया सवाल, बोले- 1947 से पहले तो नहीं बंटा देश
उन्होंने कहा कि मैं तो कहूंगा कि पाकिस्तान पहले खुद अपने अंदर के हालात सुधारे। सिंध में आंदोलन चल रहा है और उनका कहना है कि पंजाब में सिंधु नदी का जल रोका जा रहा है। नहरें बनाई जा रही हैं और हमारा पानी चोरी हो रहा है। उन्होंने कहा कि सेना प्रमुख ने कश्मीर को लेकर बयान दिया, लेकिन सोचना चाहिए कि 4 जंगों में वे कुछ नहीं कर पाए। उलटे अपना मुल्क और तुड़वा बैठे। इसलिए अच्छी बात यही है कि ऐसे बयान न दिए जाएं। उन्होंने पाक सेना चीफ आसिम मुनीर के द्विराष्ट्र सिद्धांत की भी तीखी आलोचना की। प्रोफेसर ने कहा कि 1947 में भारत का विभाजन होना ही गलत था। आज भारत में उतने ही मुसलमान हैं, जितनी पाकिस्तान की आबादी है। आखिर इससे किसका फायदा हुआ? उन्होंने कहा कि 1947 से पहले किसी का भी शासन हुआ, लेकिन सांप्रदायिक आधार पर कोई विभाजन नहीं हुआ था।

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