मध्यप्रदेश

मंत्रि-परिषद की बैठक में 3 हजार 867 करोड़ रूपये की योजना और निर्माण कार्यों की स्वीकृति

भोपाल
लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर के 300 वें जयंती वर्ष पर उनके आदर्शो और मूल्यों को समर्पित मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद की बैठक इंदौर में राजवाड़ा के दरबार हॉल में हुई। मंत्रि-परिषद ने 3 हजार 867 करोड़ रूपये की योजना और निर्माण कार्यों की स्वीकृति दी। मंत्रि-परिषद ने प्रदेश के युवाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर प्रशिक्षण कार्यकम योजना की सैद्धांतिक स्वीकृति दी। इसमें युवाओं के लिए कौशल विकास कार्यक्रम संचालित किए जायेगे। योजना में जरूरतमंद व्यक्ति बैंक ब्याज में एक हजार रुपए प्रतिवर्ष छूट के साथ पूरे जीवनकाल के लिए अधिकतम 10 हजार रूपये प्रति व्यक्ति ऋण के ब्याज पर छूट प्राप्त कर सकेगा। प्रतिवर्ष योजना पर लगभग 100 करोड़ रूपए का व्यय किया जायेगा।

मध्यप्रदेश महानगर क्षेत्र नियोजन एवं विकास अधिनियम- 2025 की स्वीकृति
मंत्रि-परिषद ने "मध्यप्रदेश महानगर क्षेत्र नियोजन एवं विकास अधिनियम-2025" को स्वीकृत करने का निर्णय लिया हैं। अधिनियम-2025 लागू होने के बाद "महानगर योजना समिति" एवं "महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण" का गठन किया जा सकेगा। साथ ही प्रदेश में "इंदौर-उज्जैन-देवास-धार" एवं "भोपाल-सीहोर-रायसेन-विदिशा-ब्यावरा (राजगढ़)" के लिए महानगर योजना समिति एवं महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण का गठन राज्य सरकार द्वारा किया जा सकेगा।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा भारतीय संविधान में विहित प्रावधानों के अनुसार राज्य सरकार द्वारा प्रदेश के 10 लाख से अधिक जनसंख्या वाले नगरों का क्षेत्रीय स्तर पर समग्र विकास को दृष्टिगत रखते हुए "महानगर योजना समिति" एवं "महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण" गठित करने के लिए घोषणा की गई थी। महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण द्वारा "महानगर क्षेत्र" के लिए विकास योजना प्रारूप तैयार कर महानगर योजना समिति से विकास योजना अनुमोदन हेतु राज्य सरकार को प्रेषित की जाएगी। राज्य सरकार द्वारा महानगर क्षेत्र की विकास योजना को अनुमोदन प्रदान करने के बाद विकास योजना का क्रियान्वयन महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण द्वारा किया जाएगा। महानगर क्षेत्र की विकास योजना में ऐसे क्षेत्र की भौगोलिक आवश्यकता अनुसार शैक्षणिक, औ‌द्योगिक, स्वास्थ्य आदि क्षेत्रों में विकास हो सकेगा, जिससे कि रोजगार एवं आर्थिक विकास संभव हो सकेगा।

मुख्यमंत्री शहरी स्वच्छता मिशन कार्यक्रम की वित्तीय वर्ष-2028-29 तक निरंतरता की स्वीकृति
मंत्रि-परिषद ने मुख्यमंत्री शहरी स्वच्छता मिशन कार्यक्रम की वित्तीय वर्ष-2028-29 तक निरंतरता की स्वीकृति दी। इसमें आगामी 4 वित्तीय वर्षों 2025-26, 2026-27, 2027-28 और 2028-29 के लिए राज्यांश राशि 167 करोड़ 74 लाख रूपये और निकाय अंशदान राशि 59 करोड़ 31 लाख रूपये, कुल राशि 227 करोड़ 5 लाख रूपये का व्यय अनुमानित है। योजना में राशि का प्रयोग प्रदेश के नगरीय निकायों में सेप्टिक टैंक से निकलने वाले स्लज के परिवहन के लिए डी-स्लजिंग वाहन, सीवर लाईन की सफाई के लिए सफाई उपकरणों, ठोस अपशिष्ट के संग्रहण एवं परिवहन के लिए वाहन तथा नगरीय निकायों में कार्यरत सफाई मित्रों के लिए व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण एवं पीपीई किट के लिए अनुदान प्रदान कर तकनीकी रूप से सक्षम बनाया जायेगा। राज्य स्तर पर संचालित नगरीय स्वच्छता की समस्त गतिविधियों को समेकित कर मुख्यमंत्री शहरी स्वच्छता कार्यक्रम का आरम्भ 28 अगस्त 2012 को किया गया था।

प्रदेश के 04 औद्योगिक क्षेत्र में 249 करोड़ 66 लाख रूपये की लागत से वर्किंग वीमेन हॉस्टल के निर्माण की स्वीकृति
मंत्रि-परिषद ने प्रदेश में महिला श्रम शक्ति भागीदारी दर को बढ़ाने , बेहतर वातावरण प्रदान करने और महिलाओं के कामकाजी जीवन को आसान बनाने के लिए प्रदेश के 04 औद्योगिक क्षेत्र में 249 करोड़ 66 लाख रूपये की लागत से वर्किंग वीमेन हॉस्टल के निर्माण की स्वीकृति दी है। विक्रम उद्योगपुरी जिला उज्जैन, पीथमपुर सेक्टर-1 एवं 2 जिला धार, मालनपुर घिरौंगी (भिंड) एवं मंडीदीप (रायसेन) में कामकाजी महिला छात्रावासों अन्तर्गत कुल 26 हॉस्टलों और भवनों का निर्माण किया जायेगा। प्रत्येक में 222 बेड की क्षमता होगी। इस प्रकार कुल 5 हजार 572 बेड क्षमता के हॉस्टलों का निर्माण भारत सरकार के सहयोग से औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग अन्तर्गत एमपीआईडीसी लि. द्वारा किया जायेगा। भारत सरकार द्वारा "स्पेशल असिस्टेंस टू स्टेटस फॉर कैपिटल इंवेस्टमेंट 2024-25" स्कीम में वर्किंग वीमेन हॉस्टल के निर्माण किया जाना है।

वर्किंग वीमेन हॉस्टल्स में आधुनिक सुविधाएं, पर्याप्त पार्किंग, फूड कोर्ट और मनोरंजन तथा सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए स्थान उपलब्ध होगा। कामकाजी महिला छात्रावासों में महिलाओं की सुरक्षा, संरक्षा और नौकरी के अवसरों की उपलब्धता को प्राथमिकता दी जायेगी। रियायती दरों पर भोजन एवं न्यूनतम किराये पर बेड उपलब्ध कराया जायेगा। बुनियादी अधोसंरचनाओं जैसे-पार्किंग, रिक्रिएशनल रूम, पेन्ट्री, डायनिंग एरिया, कॉमन टॉयलेटस, कॉमर्शियल दुकानें इत्यादि सुविधाओं का निर्माण किया जायेगा। कार्यरत महिलाओं के बच्चों की उचित देखभाल के लिए झूला घर का भी प्रावधान किया गया है।

 

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