मध्यप्रदेश

नया वेदर सिस्टम 23 जुलाई से होगा सक्रिय, मानसून रफ्तार पकड़ेगा और मध्यम से भारी बारिश का दौर शुरू होगा

भोपाल 

मध्य प्रदेश में मानसून के कमजोर पड़ते ही बारिश का दौर थम गया है हालांकि अगले 48 घंटे बाद फिर नए वेदर सिस्टम के सक्रिय होने से तेज बारिश का दौर देखने को मिलेगा। फिलहाल 21 और 22 जुलाई को कहीं-कहीं हल्की बारिश होने की संभावना जताई गई है।जुलाई अंत में पूर्वी और दक्षिणी हिस्से में तेज बारिश होने का अनुमान है।

आज सोमवार को जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, सिवनी, छिंदवाड़ा, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, नर्मदापुरम, हरदा और बैतूल जिलों में बारिश की संभावना जताई गई है।बता दे कि रविवार को मलाजखंड में सात, खजुराहो में दो, उज्जैन में एक मिलीमीटर बारिश हुई।दिन का सबसे अधिक 35 डिग्री सेल्सियस तापमान खजुराहो में दर्ज किया गया।

नदियों में उफान के बाद क्या है प्रशासन की तैयारी?

भारी बारिश के चलते प्रदेश के कई हिस्सों में नदियों और नालों का जलस्तर बढ़ गया है। बाढ़ की आशंका को देखते हुए राज्य सरकार और आपदा प्रबंधन विभाग ने संवेदनशील गांवों को अलर्ट पर रखा है। राहत दलों को तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं।
भोपाल में कैसा है मौसम का हाल?

भोपाल, इंदौर, उज्जैन जैसे शहरों में दिन में हल्की धूप और उमस बनी रही, लेकिन शाम होते-होते कई जगहों पर बादल छा गए और बौछारें शुरू हो गईं। वहीं, खजुराहो में सबसे ज्यादा 35 डिग्री तापमान दर्ज किया गया।
23 जुलाई को भारी बारिश का अलर्ट

मौसम विभाग की मानें तो 23 जुलाई से एक बार फिर मूसलधार बारिश की शुरुआत होगी। नागरिकों को चाहिए कि वे मौसम विभाग की चेतावनियों पर नजर बनाए रखें और बाढ़ संभावित क्षेत्रों में सतर्कता बरतें।

मध्य प्रदेश मौसम विभाग का ताजा पूर्वानुमान

वर्तमान में मानसून द्रोणिका गहरे कम दबाव के क्षेत्र से होकर चुरू, आयानगर (दिल्ली), शाहजहांपुर, लखनऊ, पटना, बांकुरा, दीघा से होते हुए बंगाल की खाड़ी तक जा रही है। एक गहरा कम दबाव का क्षेत्र पश्चिमी राजस्थान और उससे लगे पाकिस्तान पर बना हुआ है जिसके पश्चिम दिशा में कम दबाव के क्षेत्र में परिवर्तित होने के आसार हैं। एक पश्चिमी विक्षोभ जम्मू के आसपास द्रोणिका के रूप में सक्रिय है। 24 जुलाई को उत्तरी बंगाल की खाड़ी में एक कम दबाव का क्षेत्र बनने से फिर मानसून एक्टिव होगा और झमाझम बारिश का दौर देखने को मिलेगा।

अबतक कहां कितनी हुई है वर्षा

प्रदेश में अब तक औसत 20.5 इंच बारिश हो चुकी है। इस सीजन में एक जून से लेकर 20 जुलाई की सुबह साढ़े आठ बजे तक प्रदेश में कुल 521.9 मिमी. बारिश हो चुकी है, जो सामान्य वर्षा (323.2 मिमी.) की तुलना में 61 प्रतिशत अधिक है। 3 जिले निवाड़ी, टीकमगढ़ और श्योपुर में बारिश का कोटा पूरा हो चुका है। इन जिलों में सामान्य से 15% तक ज्यादा पानी गिर चुका है।इंदौर, उज्जैन, शाजापुर, बुरहानपुर और आगर-मालवा में 10 इंच से भी कम पानी गिरा है।

इन जिलों के रास्ते वापसी करेगा मानसून

मौसम विज्ञानियों के अनुसार, 23 जुलाई से पूर्वी मध्य प्रदेश के जिलों में एक नया मानसूनी द्रोणिका और अवदाब सक्रिय हो सकता है, जिसके कारण भारी बारिश (heavy rainfall) की वापसी संभव है। यह सिस्टम धीरे-धीरे पूरे पूर्वी भागों को प्रभावित कर सकता है। शहडोल, अनूपपुर, उमरिया, डिंडोरी, कटनी, जबलपुर, सिवनी, मंडला, बालाघाट, सतना, रीवा, सीधी, सिंगरौली और मऊगंज जैसे जिलों में भारी बारिश का दौर शुरू हो सकता है। वहीं, पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से राज्य के अन्य हिस्सों में भी अच्छी बारिश की संभावनाएं बनेंगी।

कहां हुई बारिश, कितने मिमी दर्ज

पश्चिमी मध्य प्रदेश के मंदसौर ज़िले के धुंधरका में पिछले 24 घंटों में सबसे ज़्यादा 19 मिमी बारिश दर्ज की गई। परसवाड़ा (बालाघाट) में 16 मिमी, मलाजखंड (बालाघाट) में 14.4 मिमी, कायमपुर (मंदसौर) में 13 मिमी, सीतामऊ (मंदसौर) में 12.4 मिमी और सौसर (छिंदवाड़ा) में 10 मिमी बारिश दर्ज की गई।

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