मध्यप्रदेश

यौन उत्पीड़न के आरोप के बाद महिला जज अदिति कुमार शर्मा का इस्तीफा, MP न्याय व्यवस्था में मचा हड़कंप

शहाडोल
शहडोल जिले में पदस्थ सिविल जज अदिति कुमार शर्मा ने न्यायिक सेवा से इस्तीफा दे दिया है। इस्तीफे के साथ ही उन्होंने कई आरोप लगाए हैं। बताया जा रहा है कि अदिति कुमार शर्मा ने एक न्यायिक अधिकारी को हाईकोर्ट में पदोन्नत किए जाने के विरोध में दिया है। अदिति कुमार शर्मा ने उस अधिकारी पर पहले यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए थे। अब उन्हें हाईकोर्ट जज के रूप में पदोन्नति मिली तो महिला जज ने इस्तीफा दे दिया।

न्याय नहीं मिला

वहीं, अपने इस्तीफे में जज शर्मा ने लिखा है कि यह फैसला संस्थागत विफलता के खिलाफ एक विरोध है। साथ ही उन्होंने कहा कि इस्तीफा इस बात का सबूत है कि मध्य प्रदेश में एक महिला जज थी जो न्याय के लिए समर्पित थी लेकिन संस्था ने उसका साथ नहीं दिया। हालांकि जिनके पदोन्नति के विरोध में जज अदिति कुमार शर्मा ने इस्तीफा दिया, उन्होंने अभी तक शपथ नहीं ली है।

संस्थागत विफलता के विरोध में इस्तीफा

जज अदिति कुमार शर्मा ने अपना अपना इस्तीफा एमपी के चीफ जस्टिस को भेज दिया है। उन्होंने लिखा है कि यह फैसला उनके व्यक्तिगत दर्द की वजह से नहीं है। यह संस्थागत विफलता के विरोध में है। अदिति कुमार शर्मा ने लिखा है कि मैंने न्याय से भरोसा नहीं खोया है बल्कि उस प्रणाली से टूट चुकी हूं जो न्याय की सबसे बड़ी संरक्षक होने का दावा करती है।

संस्था ने साथ नहीं दिया

उन्होंने अपने इस्तीफे में यह भी लिखा कि उनका इस्तीफा हमेशा इस बात की गवाही देगा कि मध्य प्रदेश में एक महिला जज थी। वह न्याय के लिए पूरी तरह से समर्पित थी। लेकिन उसी संस्था ने उसका साथ नहीं दिया।

पहले हो चुकी हैं बर्खास्त

गौरतलब है कि जज अदिति कुमार शर्मा उन छह महिला न्यायिक अधिकारियों में शामिल थीं, जिन्हें जून 2023 में असंतोषजनक प्रदर्शन के लिए नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया था। यह फैसला हाईकोर्ट की प्रशासनिक और पूर्ण पीठ की बैठकों के आधार पर लिया गया था। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने दखल देते हुए सभी को बहाल कर दिया था। जज शर्मा ने मार्च 2024 से शहडोल में दोबारा काम शुरू किया था।

जुलाई में लिखा पत्र

वहीं, जुलाई 2025 में जज अदिति कुमार शर्मा ने भारत के राष्ट्रपति और सुप्रीम कोर्ट को कॉलेजियम पर पत्र लिखा था। उन्होंने उस अधिकारी की पदोन्नति पर दोबारा विचार करने को कहा था। जज शर्मा ने कहा कि जिनके खिलाफ गंभीर आरोप लगे हैं, उन्हें बिना किसी जांच के पदोन्नत करना न्यायपालिका की जवाबदेही और संवेदनशीलता पर सवाल खड़ा करता है। जज शर्मा ने यह भी कहा कि यह सिर्फ उनका व्यक्तिगत मामला नहीं है। बल्कि, यह न्यायिक संस्थान की चुप्पी और उदासीनता का मामला है।

दो अन्य ने की थी शिकायत

जज शर्मा की शिकायत के अलावा, दो अन्य न्यायिक अधिकारियों ने भी उसी अधिकारी के खिलाफ शिकायतें दर्ज कराई थीं। वहीं, पदोन्नति को मंजूरी दिए जाने से पहले, संबंधित अधिकारी ने सभी आरोपों से इनकार किया था। उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा था कि उन्होंने तीन दशकों से अधिक सेवा की है और उनके खिलाफ कोई शिकायत नहीं रही है। उन्होंने यह भी कहा था कि उन्हें किसी शिकायत के बारे में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं मिली है।

कोई सुनवाई नहीं हुई

इसके साथ ही जज अदिति कुमार शर्मा ने अपने इस्तीफे में लिखा है कि उन्होंने पूरी प्रक्रिया के दौरान बार-बार शिकायतें दर्ज कराई। लेकिन कभी कोई सुनवाई नहीं हुई, न ही जांच बैठाई गई। सिस्टम ने कार्रवाई की जगह उस अधिकारी को पदोन्नति दी है।

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