विदेश

क्या चीन की सेना ने खोया जिनपिंग का भरोसा? सबसे बड़ी चिंता और शक की वजहें

बीजिंग
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग अपने देश की सेना को लेकर काफी परेशान हैं। बाहरी तौर पर देखा जाए तो चीन की सेना कभी इतनी मजबूत नहीं रही। नेवी से लेकर हथियार बनाने तक में सेना काफी आगे है। लेकिन अंदरूनी तौर पर कई चीजें हैं जो हाथ से छूटती नजर आ रही हैं। इनमें से एक है चीनी सेना में लगातार बढ़ता भ्रष्टाचार। इस पर लगाम के लिए जिनपिंग लगातार ऐक्शन में हैं, लेकिन अभी भी चीजें कंट्रोल में आती नजर नहीं आ रही हैं।

लगातार कम होते टॉप अधिकारी
चीन की सबसे बड़ी चिंता शीर्ष स्तर पर लगातार अधिकारियों का कम होते जाना है। सेंट्रल मिलिट्री कमीशन में कुल सात सीटें हैं, जिनमें से तीन फिलहाल खाली हैं। इन पदों पर जो अधिकारी थे वह या तो गायब हो गए हैं या फिर गिरफ्तार कर लिए गए हैं। विडंबना यह है कि यह सब तब हो रहा है जब खुद राष्ट्रपति शी जिनपिंग सेना में भ्रष्ट्राचार पर लगाम कसने में लगे हुए हैं। जिनपिंग ने सेना के अत्याधुनिकरण के लिए 2027 का लक्ष्य तय किया है। कुछ अमेरिकी अधिकारी तो यहां तक भी कहते हैं कि चीन खुद को ताइवान पर कब्जा करने में सक्षम बनाना चाहता है। गौरतलब है कि चीन लगातार ताइवान को अपना क्षेत्र बताता है।

क्यों गंभीर है समस्या
चीन के लिए यह समस्या इसलिए भी गंभीर हो जाती है क्योंकि जो सैन्य अधिकारी भ्रष्टाचार में पकड़े गए हैं, वह जिनपिंग के करीबी रहे हैं। ऐसे में जब यही सैन्य अधिकारी गलतियां करते हुए पकड़े जा रहे हैं तो जिनपिंग का गुस्सा बढ़ना भी लाजिमी है। जो अधिकारी गायब हुए हैं उनमें जनरल वीडांग का नाम प्रमुख है। वह चीन के सेंट्रल मिलिट्री कमीशन के दूसरे सबसे वरिष्ठ अधिकारी थे। वीडांग काफी अरसे से गायब हैं, जो दिखाता है कि वह जांच के दायरे में हैं। इसी तरह एक अन्य शीर्ष कमांडर एडमिरल मिआवो हुआ भी अनुशासन का उल्लंघन करने के लिए जांच के दायरे में हैं।

वफादारी की चाहत
शी जिनपिंग साल 2027 में चौथी बार कम्यूनिस्ट पार्टी के लीडर बनेंगे। वह चाहते हैं कि उनके पास फौज में ऐसे अधिकारी हों, जो उनके प्रति पूरी तरह से वफादार रहें। लेकिन चीनी सेना के अधिकारी एक के बाद एक जिस तरह से भ्रष्टाचार के मामलों में पकड़े जा रहे हैं, उसने जिनपिंग की परेशानी बढ़ा दी है। इन सबके बीच अगले महीने शी जिनपिंग बीजिंग में एक मिलिट्री परेड करवाने वाले हैं। इस दौरान वह यह दिखाएंगे कि चीन की सेना पर किस कदर उनका एकाधिकार है।

 

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