मध्यप्रदेश

529 एकड़ जमीन सरकारी कब्जे में वापस, बिना आदेश के पहले की गई थी वापसी

सतना 
बिना वैधानिक प्रक्रिया और आदेश के सतना एयरपोर्ट की फर्जी तरीके से वापस की गई 529.36 एकड़ जमीन को वापस शासकीय करने की प्रक्रिया जल्द ही शुरु हो सकती है। कलेक्टर डॉ सतीश कुमार एस ने इस संबंध में एसडीएम सिटी राहुल सिलाडिया को जमीन वापसी संबंधी अभिलेख तलाशने के निर्देश दिए हैं।अगर संबंधित अभिलेख नहीं मिलते हैं तो इन जमीनों को सरकारी करने खसरा सुधार की धारा 115 की प्रक्रिया प्रारंभ की जाएगी।

कलेक्टर ने अभिलेखों को दिए जांच के आदेश
जानकारी के अनुसार कलेक्टर ने एसडीएम सिटी से एयरपोर्ट (Satna Airport) की कथित तौर पर वापस की गई जमीनों के अभिलेखों का परीक्षण करने कहा है। हालांकि प्राथमिक जांच में जमीन वापसी के न तो भारत सरकार के और न ही मध्यप्रदेश शासन के कोई आदेश सामने आए हैं। फिर भी मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए कलेक्टर ने संबंधित अभिलेखों की बारीकी से तलाश करने कहा है। माना जा रहा कि दो सप्ताह में सभी संभावित स्थलों में अभिलेखों की तलाश की जाएगी। इसके बाद भी अगर जमीन वापसी के अभिलेख नहीं मिलते हैं तो इन जमीनों को सरकारी करने की प्रक्रिया प्रारंभ की जाएगी। इसके लिए एसडीएम सिटी धारा 115 की प्रक्रिया प्रारंभ करेंगे।

ऐसे समझे कैसे वापस होती है जमीन
अधिवक्ता रमेश पाठक ने बताया कि एरोड्रम की जमीन नभ विभाग की आराजी थी, जो भारत सरकार की जमीन मानी जाती है। अगर भारत सरकार को जमीन की आवश्यकता नहीं होती तो वह पहले एक कमेटी का गठन करती, जो सर्वे दल नियुक्त करती। यह सर्वे दल स्थल पर पहुंचकर सर्वे करता है और चिन्हित करता कि कौनसी जमीनों की आवश्यकता नहीं है। इन्हें सूचीबद्ध करता। इसकी रिपोर्ट भारत सरकार के पास जाती। जहां जमीन वापसी का निर्णय लिया जाता। इसके बाद जमीन वापसी का भारत सरकार का गजट नोटिफिकेशन जारी किया जाता।

बड़ा फर्जीवाड़ा आया सामने
एरोड्रम सतना से वापस ली गई जमीनों के इंतजामों की एक सूची में तत्कालीन राजस्व अमले ‌द्वारा जो प्रविष्टियां दर्ज की गई हैं। उसमें भी बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। इसके अनुसार सोनौरा चक उतैली की आराजी नंबर 33 रकबा 1.37 एकड़ के संबंध में रिकार्ड में प्रविष्टि की गई है। उसमें लिखा गया है कि यह अब्दुल्ला की जमीन थी। वह विभाजन के वक्त पाकिस्तान चला गया। इस जमीन को आवतमल सिंधी को दी गई। आवतमल सिंधी ने इसे वेलू बगैरा कुहार को बेच दिया। राजस्व जानकारों का कहना है कि यह सब फर्जी प्रविष्टियां हैं। इस तरह के कोई सरकारी आदेश जारी नहीं हो सकते हैं। 
डॉ सतीश कुमार एस, कलेक्टर ने बताया कि अभी जमीन वापसी संबंधी अभिलेख तलाशे जा रहे हैं। अगर अभिलेख नहीं मिलते हैं तो नियमानुसार खसरा सुधार की प्रक्रिया की जाएगी। 

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