मध्यप्रदेश

जन्माष्टमी पर देखें कान्हा की भक्ति के रंग, अलग-अलग मत-पंथों की अनोखी परंपराएं

इंदौर
अहिल्या की नगरी में जगदगुरु भगवान कृष्ण के जन्म का उल्लास विभिन्न पंथ और मत को मानने वाले 15 एवं 16 अगस्त को हर्षोल्लास से मनाएंगे। हर मत-पंथ की अपनी-अपनी अनूठी मान्यता और परंपराए है। कहीं ग्रंथ को राधा-कृष्ण के रूप में पूजा जाता है तो कही मेरे तो गिरधर गोपाल दूसरा न कोई तर्ज पर बांके बिहारी मंदिर में मीरा की तरह आराधना की जाती है। साथ ही कृष्ण जन्म मनाने के लिए कहीं तिथि की महत्ता देखी जाती है तो कहीं सूर्योदय में रोहणी नक्षत्र के होने को महत्व दिया जाता है। इसके चलते कृष्ण जन्म मंदिरों में अलग-अलग दिन मनाए जाते हैं।

102 साल पुराने मंदिर में ग्रंथों को लगता पान का भोग
शहर के पश्चिम क्षेत्र के गोराकुंड में स्थित प्रणामी संप्रदाय के राधाकृष्ण मंदिर कृष्ण भक्तों में विशेष स्थान रखता है। यहां राधा-कृष्ण का स्वरूप भक्तों के बीच खास आकर्षण का केंद्र बनता है। यहां ग्रंथों को राधाकृष्ण का स्वरूप देकर पूजन किया जाता है। इसमें एक ग्रंथ के रूप में गीता और दूसरा ग्रंथ प्रणामी संप्रदाय के संस्थापक गुरु प्राणनाथ द्वारा लिखा गया है। पूजनकर पान का भोग लगाया जाता है। 102 साल पुराने मंदिर में 400 साल पुराने ग्रंथ है। 16 अगस्त को रात 12 बजे जन्माष्टमी पर महाआरती की जाएगी।
 
तीन श्याम वर्णी कसौटी पत्थर की मूर्तियां
राजवाड़ा पर स्थित बांके बिहारी मंदिर महानुभाव पंथ को मानने वाले लोगों के बीच आस्था का केंद्र है। इस मंदिर का निर्माण शहर के ख्यात गोपाल मंदिर जो कि 1832 में बना था, उसके पूर्व इसका निर्माण किया गया था। मंदिर में कृष्ण भगवान की तीन श्याम वर्णी कसौटी पत्थर की मूर्तियां हैं। इसके अलावा पालने में बांके बिहारी और एवं दत्तात्रेय की छोटी मूर्तियां हैं। इस पंथ को मानने मीरा की तरह भक्ति करते हैं जैसे मेरे तो गिरधर गोपाल दूसरा न कोई। तपस्विनी विमलाबाईजी विराट बताती है कि इस पंथ में एक युग में एक भगवान की पूजा करते हैं। 15 अगस्त को भगवान की जन्म आरती होगी।

माता यशोदा की गोद में अठखेलिया करते कन्हैया
वैष्णवमत को मानने वाले 235 साल पुराने राजवाड़ा स्थित यशोदा माता मंदिर में संतान की इच्छुक महिलाओं का जन्माष्टमी पर 16-17 को हर वर्ष की तरह दो दिन गोद भराई होगी। महिलाएं यशोदा माता से प्रार्थना करती हैं कि जैसे संतान की आपको प्राप्ति हुई, वैसे ही हमें भी संतान मिले। इन दो दिनों में जिन महिलाओं को पूजन का अवसर नहीं मिल पाता, वह अगामी दिनों में पूजन के लिए आती है। पुजारी मनोहर दीक्षित बताते हैं कि माता यशोदा की गोद में अठखेलिया करते कन्हैया की मूर्ति है। वैष्णव मत अनुसार 16 अगस्त को रात 12 बजे जन्म आरती होगी।

रोहणी नक्षत्र की प्रधानता इसलिए 15 सितंबर को मनेगी जन्माष्टमी
जहां शहरभर में 15-16 अगस्त को जन्माष्टमी मनेगी, वहीं 140 साल पुराने रामानुजकोट मंदिर यशवंतगंज में जन्म उत्सव 15 सितंबर को मनाई जाएगी। इसका कारण नक्षत्र की प्रधानता का महत्व होना है। मंदिर दक्षिण भारत में बने साढ़े चार फीट उंची पाषण की मूर्ति है। मंदिर के विजयाचार्य महाराज बताते हैं कि जन्माष्टमी पर भगवान कृष्ण का काष्ट से बने शेषनाग वाले झूले पर झूलाया जाता है। इस दिन एकांत अभिषेक और रात 11 बजे स्त्रोत पाठ होगा। 

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