विदेश

ट्रंप का सख्त बयान: यूक्रेन न क्रीमिया ले पाएगा, न बन पाएगा NATO सदस्य

वाशिंगटन

व्हाइट हाउस में पिछली दफे अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप और यूक्रेन के प्रेसिडेंट जेलेंस्की की हॉट टॉक भरसक आपको याद हो. एक बार ऐसी ही बहस के लिए व्हाइट हाउस में स्टेज फिर से तैयार है. लेकिन प्रेसिडेंट जेलेंस्की इस बार बातचीत की टेबल पर ट्रंप के सामने अकेले नहीं होंगे. इस बार जेलेंस्की की पैरवी के लिए ब्रिटिश पीएम कीर स्टार्मर, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, इटली की पीएम जॉर्जिया मेलोनी, जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज भी साथ होंगे. अमेरिका पहुंचने वालों में फिनलैंड के  राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब और यूरोपीय आयोग के अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन भी शामिल हैं.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की की मुलाकात 18 अगस्त 2025 को वाशिंगटन डी.सी. में व्हाइट हाउस में होने वाली है. अमेरिकी समय के अनुसार ये मीटिंग एक बजे दोपहर से शुरू होगी. भारतीय समय के अनुसार ये मीटिंग रात 9.30 बजे से शुरू होगी.

‘कुछ चीजें कभी नहीं बदलतीं’

डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर कहा कि ओबामा प्रशासन के तहत 2014 में क्रीमिया के रूसी कब्जे में चला गया था. उन्होंने कहा, ‘यूक्रेन के राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की चाहें तो रूस के साथ युद्ध लगभग तुरंत समाप्त कर सकते हैं, या फिर लड़ाई जारी रख सकते हैं. याद कीजिए कि इसकी शुरुआत कैसे हुई थी. क्रीमिया वापस नहीं मिलेगा और यूक्रेन नाटो में शामिल नहीं होगा. कुछ चीजें कभी नहीं बदलतीं.’

आज है जेलेंस्की-ट्रंप बैठक

दरअसल, डोनाल्ड ट्रंप आज यानी सोमवार को वाशिंगटन में जेलेंस्की और यूरोपीय नेताओं की बैठक की मेजबानी करने वाले हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने पिछले सप्ताह अलास्का में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की थी. बातचीत के बाद यूक्रेन में स्थायी शांति सुनिश्चित करने के लिए जेलेंस्की से समझौता करने का आह्वान किया. ट

ट्रंप ने दिया था पुतिन का प्रस्ताव

इससे पहले शुक्रवार को ट्रंप ने कहा कि यूक्रेन को युद्ध समाप्त करने के लिए समझौता करना चाहिए क्योंकि रूस एक बहुत बड़ी शक्ति है और वे नहीं हैं. उन्होंने जेलेंस्की को पुतिन के प्रस्ताव के बारे में भी बताया कि अगर यूक्रेन ने डोनेट्स्क का सारा हिस्सा छोड़ दिया तो अधिकांश मोर्चों को विराम हो जाएगा. हालांकि, जेलेंस्की ने उस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया.

अमेरिका पहुंचे जेलेंस्की ने कहा कि अमेरिका और हमारे यूरोपीय मित्रों के साथ हमारी साझा शक्ति रूस को वास्तविक शांति के लिए प्रेरित करेगी. पिछले बार के कड़वे अनुभवों के बावजूद जेलेंस्की ने राष्ट्रपति ट्रंप को इस मीटिंग को शुरू करने के लिए धन्यवाद दिया और कहा, "हम सभी इस युद्ध को शीघ्र और सुरक्षित रूप से समाप्त करना चाहते हैं."

गौरतलब है कि व्हाइट हाउस की ये मीटिंग अलास्का शिखर सम्मेलन के बाद हो रही है. 

क्रीमिया को भूल ही जाए यूक्रेन

इस मीटिंग से पहले ट्रंप ने एक ऐसा बयान दिया है, जिसके अहम संदेश हैं. ट्रंप ने कहा है कि यूक्रेन को क्रीमिया पर फिर से दावे की बात तो भूल ही जानी चाहिए. इसके अलावा ट्रंप ने जेलेंस्की को यह भी कहा है कि वो यूक्रेन को नाटो का सदस्य बनाने के लिए लालायित न रहे. रूस यूक्रेन की नाटो सदस्यता को अपने लिए खतरे के रूप में देखता है और इस पर गहरी नाराजगी जताता है.

ट्रंप ने आगे सुझाव दिया कि संघर्ष को समाप्त करने का निर्णय ज़ेलेंस्की के पास है, उन्होंने टिप्पणी की कि वह "रूस के साथ युद्ध को लगभग तुरंत समाप्त कर सकते हैं, यदि वह चाहें, या वह लड़ाई जारी रख सकते हैं."

आश्चर्य की बात यह है कि ट्रंप की यह टिप्पणी उनके विशेष दूत स्टीव विटकॉफ द्वारा सीएनएन को दिए गए बयान के बाद आई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि मास्को, अमेरिका और उसके यूरोपीय सहयोगियों को संभावित शांति समझौते के तहत कीव को नाटो शैली की सुरक्षा गारंटी प्रदान करने की अनुमति देने को तैयार है. उन्होंने इस घटनाक्रम को "खेल बदलने वाला" बताया.

  ट्रंप के मुख्य वार्ताकार स्टीव विटकॉफ जिन्होंने अलास्का मीटिंग से पहले व्लादिमीर पुतिन के साथ गहन विचार विमर्श किया था ने सीएनएन को कहा कि हमें कई रियायतें मिली, जैसे कि संयुक्त राज्य अमेरिका यूक्रेन को अनुच्छेद 5 जैसी सुरक्षा प्रदान कर सकता है, ये एक बड़ी वजह है कि यूक्रेन नाटो में क्यों रहना चाहता है.

इसे एक बड़ी सफलता बताते हुए विटकॉफ ने कहा कि यह पहली बार है जब मास्को इस तरह के प्रस्ताव पर सहमत हुआ है.

क्या है NATO का अनुच्छेद-5 

नाटो का अनुच्छेद-5 नाटो के सामूहिक रक्षा सिद्धांत का आधार है. इसमें कहा गया है कि यूरोप या उत्तरी अमेरिका में गठबंधन के 32 सदस्यों में से किसी पर भी सशस्त्र हमला उन सभी के खिलाफ हमला माना जाएगा. 

इतने सारे राष्ट्राध्यक्षों का इतनी जल्दी अमेरिका पहुंचना मॉर्डन डिप्लोमेसी में अभूतपूर्व प्रतीत होता है, जो इस बात को रेखांकित करता है कि इसमें कितना बड़ा जोखिम है.

राजनयिक सूत्रों का कहना है कि यूरोपीय अधिकारी इस बात को लेकर चिंतित हैं कि ट्रंप ज़ेलेंस्की को अपने शर्तों पर सहमत होने के लिए दबाव डाल सकते हैं, क्योंकि पिछले शुक्रवार को अमेरिकी धरती पर हुई ट्रंप-पुतिन बैठक में यूक्रेनी नेता ज़ेलेंस्की को शामिल नहीं किया गया था. 

जेलेंस्की ने कड़वे अनुभवों को किया याद

वाशिंगटन पहुंचे जेलेंस्की ने कहा कि हम सभी इस युद्ध को शीघ्र और विश्वसनीय रूप से समाप्त करने की प्रबल इच्छा रखते हैं. और शांति स्थायी होनी चाहिए. उन्होंने पिछले समझौतों को शक की निगाह से देखते हुए कहा कि इस बार ऐसा नहीं होना चाहिए  जैसा वर्षों पहले हुआ था. जब यूक्रेन को क्रीमिया और हमारे पूर्वी हिस्से—डोनबास के एक हिस्से—को छोड़ने के लिए मजबूर किया गया था और पुतिन ने इसे एक नए हमले के लिए एक मंच के रूप में इस्तेमाल किया था. 

जेलेंस्की ने कहा कि 1994 में भी यूक्रेन को तथाकथित "सुरक्षा गारंटी" दी गई थी, लेकिन वे कारगर नहीं रहीं. बेशक क्रीमिया को तब नहीं छोड़ा जाना चाहिए था, जैसे यूक्रेनियों ने 2022 के बाद कीव, ओडेसा या खार्किव को नहीं छोड़ा. यूक्रेन के लोग अपनी जमीन, अपनी आजादी के लिए लड़ रहे हैं. 

उन्होंने कहा कि रूस को यह युद्ध समाप्त करना ही होगा जिसकी शुरुआत उसने खुद की थी. और मुझे उम्मीद है कि अमेरिका और हमारे यूरोपीय मित्रों के साथ हमारी संयुक्त शक्ति रूस को वास्तविक शांति की ओर जाने पर मजबूर करेगी. 

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