जलवायु परिवर्तन (Climate Change) के खतरनाक होते असर के बीच हमें अपने जैवविविधता की रक्षा करने की चुनौती से निपटना है. इसमें मधुमक्खियों (Honeybees) की प्रजातियों को बचाना भी शामिल है. दुनिया भर में मधुमक्खियां बड़ी संख्या में मर रही हैं. इसकी वजह एक खतरनाक वायरस (Virus) है जो इन मक्खियों को मार तक सकता है और भोजन की तलाश के वापस लौटने की क्षमता को भी कमजोर कर सकता है. हाल ही में हुए एक अध्ययन में इस वायरस का तोड़ निकाला गया है. इस अध्ययन ने ऐसा रसायन खोजा गया है जो प्राकृतिक रूप से पौधों में पाया जाता है और आसानी से मिल भी सकता है.
इस यौगिक की खास बात यह है कि वह मधुमक्खियों पर उसका ठीक उल्टा असर करता है जैसा वायरस करता है. आईसाइंस जर्नल में हाल ही में प्रकाशित इस ध्ययन में शोधकर्ताओं ने दर्शाया है कि वे मधुमक्खियां जिन्होंने वायरस से संक्रमित होने से पहले इस पदार्थ को खाया था, संक्रमित होने के बाद उनके बचने की संभावना 9 गुना ज्यादा हो गई थी.
छत्ते में वापस आना मुश्किल
मधुमक्खियों के छत्तों का अवलोकन कर शोधकर्ताओं ने यह भी दर्शाया कि जिन मधुमक्खियों ने यह पदार्थ खाया था उनके भोजन तलाश करने के बाद वापस छत्ते में आने की संभावना ज्यादा रही. यह वायरस एक वैरोआ माइट नाम के परजीवी से फैलता है जो मक्खियों के पूरे जीवन चक्र में संक्रमित कर सकता है.
पंख भी हो सकते हैं खराब
गंभीर रूप से प्रभावित मक्खियां कुछ ही दिनों में मर सकती है. या फिर उनके पखं खराब हो सकते हैं जिससे उनके उड़ने की और भोजन जमा करने की क्षमता खराब हो सकती है. इससे पहले के शोध यह भी दिखा चुकी है कि वायर इन मक्खियों की सीखने और याद रखने की क्षमता को भी कमजोर कर सकती है. इसी वजह से उन्हें घर खोजने और भोजन तलाशने में परेशानी होने लगती है.
मधुमक्खियां (Honeybees) पर सोडियम ब्यूटाइरेट जीन्स स्तर पर असर करता है. (फाइल फोटो)
मरने लगती हैं बाकी मधुमक्खियां
गुमी हुई मक्खियों के खो कर मर जाने की संभावना होती है और उनकी कोलोनी भी भोजन की कमी से मरने लगती है. इस अध्ययन के प्रथम लेखक और नेशलन ताइवान यूनिवर्सिटी के चेंग-कांग तांग का कहना है कि रोगाणु मधुमक्खियों के लिए बहुत तनाव ला देते हैं, लेकिन मधुमक्खीपालक खाद्य सुरक्षा को देखते हुए इनके खिलाफ पेस्टीसाइड्स का उपयोग नहीं करना चाहते.”
उपोयगी पदार्थ की खोज
इसीलिए शोधकर्ताओं ने ऐसे पदार्थों की खोज की जो मक्खियों की ताकत को बढ़ा सके. अध्ययन से पता चला कि जो वायरस मक्खियों के उन जीन अभिव्यक्ति को दबाते हैं जो नर्व संकेत के प्रसारण और सीखने और यादन करने वाली जैविक प्रक्रियाओं से संबंधित है. शोधकर्ताओं ने पाया कि सोडियम ब्यूटाइरेट ऐसा रसायन है कई पौधों में मिलता है जो जानवरों में बहुत सारी जीन अभिव्यक्ति को बढ़ाने के लिए भी जानी जा






