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मध्यप्रदेश

जिला कोर्ट में फर्जीवाड़ा: बिना आदेश, जारी हुआ पति के खिलाफ वारंट, पूरी रात पुलिस लॉकअप में रखा

 इंदौर

 जिला अदालत में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। घरेलू हिंसा के एक केस में कोर्ट के आदेश के बिना ही पति के खिलाफ वसूली वारंट निकल गया। बिना आदेश के जारी इस फर्जी वारंट को लेकर एसपी से लेकर थाने के टीआई तक पूरी पुलिस टीम तामिली में लग गई और विकलांग शासकीय शिक्षक पति को पकड़कर रातभर लॉकअप में रख दिया। जब पीड़ित को अगले दिन कोर्ट में ले जाया गया तो न्यायालय भी दंग रह गया कि ऐसा वारंट तो कभी जारी हुआ ही नहीं। कोर्ट ने तत्काल पति को रिहा करने का आदेश दिया और वारंट जारी करने वाली प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए संबंधित न्यायालयीन अधिकारी से स्पष्टीकरण मांगा। घटना ने जिला न्यायालय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

फर्जी वसूली का पूरा खेल
जानकारी के मुताबिक पत्नी ने घरेलू हिंसा के मामले में 8,500 रुपये अंतरिम भरण-पोषण का आदेश प्राप्त किया था। पति ने इसे वरिष्ठ न्यायालय में चुनौती दी और वरिष्ठ न्यायालय ने यह आदेश रद्द कर दिया। आदेश रद्द होने के बाद भी पत्नी ने चालाकी से उसी अस्तित्वहीन आदेश पर वसूली का केस एक अन्य कोर्ट में लगा दिया। कोर्ट ने सिर्फ नोटिस जारी किए थे, किसी भी तरह के वारंट का आदेश जारी नहीं किया था। इसके बावजूद पत्नी ने प्रोसेस राइटर को गुमराह करते हुए बिना आदेश के वसूली वारंट निकलवा लिया, जिसमें तामिली के लिए एसपी इंदौर का नाम भी फर्जी रूप से दर्ज करवा दिया गया। वारंट के कागज पर “कोर्ट आदेश” देखकर पुलिस भी भ्रमित हो गई और हातोद थाना टीआई सहित पूरी टीम पति को पकड़ लाने में लग गई।

रातभर लॉकअप, समाज में अपमान
विकलांग शासकीय शिक्षक पति को रातभर लॉकअप में रहना पड़ा। अपमान का दर्द अलग।अगले दिन कोर्ट को जब यह बताया गया कि आदेश पत्रिका में वारंट का कोई आदेश है ही नहीं, तो कोर्ट हतप्रद रह गया और तुरंत पति को रिहा करने के निर्देश दिए।कोर्ट ने इस मामले में लापरवाही पर गंभीर रुख अपनाया और संबंधित अधिकारी से जवाब तलब किया।

पत्नी, कोर्ट स्टाफ और संबंधित लोगों पर कार्रवाई की मांग
पीड़ित पति ने इस पूरे मामले में आरोप लगाते हुए मध्यप्रदेश हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस, प्रशासनिक न्यायमूर्ति इंदौर और जिला जज इंदौर को याचिका देकर स्वतः संज्ञान लेने और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।पीड़ित का आरोप है कि पत्नी ने प्रोसेस राइटर सहित अज्ञात लोगों से मिलीभगत कर फर्जी वारंट निकलवाया, जो धारा 245, 246, 247 BNS के तहत गंभीर अपराध है, जिसकी सजा दो साल तक हो सकती है।

बिना आदेश वारंट दंडनीय अपराध
हाईकोर्ट एडवोकेट कृष्ण कुमार कुन्हारे ने बताया कि यह मामला न्याय व्यवस्था को प्रभावित करने वाला है। पत्नी ने कपटपूर्वक झूठी वसूली का केस लगाया और बिना आदेश वारंट जारी हुआ, जो सीधे-सीधे दंडनीय अपराध है। उन्होंने बताया कि पीड़ित ने हाई कोर्ट में ज्ञापन देकर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई और स्वतः संज्ञान लेने की मांग की है।एडवोकेट डॉ. रूपाली राठौर ने कहा कि यह मामला न्यायिक प्रक्रिया पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाला है और ऐसे मामलों में माननीय न्यायालय स्वयं भी संज्ञान ले सकता है।

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