मध्यप्रदेश

इंदौर में दूषित पानी से मौतों का आंकड़ा 20 तक, प्रशासन ने 6 की पुष्टि की; 16 ICU में, दो की इलाज के दौरान मौत

 इंदौर

इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी से उपजी त्रासदी थमने का नाम नहीं ले रही है। नलों से बह रहा गंदा पानी अब सीधे लोगों की जान ले रहा है, लेकिन इसके बावजूद शासन-प्रशासन हकीकत स्वीकारने को तैयार नहीं है। दूषित पानी के कारण अब तक 20 लोगों की मौत हो चुकी है। तीन नई मौतों की जानकारी सामने आने के बाद हालात की भयावहता और स्पष्ट हो गई है।

इनके सहित 18 मृतकों के परिवारों को 2-2 लाख रु.देने का दावा किया गया है। ऐसे में दो नए नाम रामकली जगदीश और श्रवण नत्यु को भी जोड़ा जाए तो मृतकों की संख्या 20 हो गई है। अधिकारियों का कहना है कि दूषित पानी से भले ही 6 लोगों की मौत हुई है, लेकिन जहां भी लोगों की मौत की सूचना मिली रही है वहां क्रॉस चेक कर आर्थिक सहायता दी जा रही है।

इतनी मौतों के बाद लोग अब डरे-सहमे हैं। इलाके में बड़ी संख्या में बोरिंग का यूज बंद कर दिया है। रहवासी टैंकरों और आरओ के पानी पर निर्भर हैं। इस बीच अस्पतालों में भर्ती मरीजों की संख्या में कमी आई है। अब तक 429 लोग भर्ती हुए थे। जिनमें से मंगलवार शाम तक की स्थिति में 330 डिस्चार्ज हो चुके हैं। यानी अब सिर्फ 99 मरीज ही एडमिट हैं।

हालांकि, अस्पतालों में मरीजों की संख्या में कमी जरूर आई है, लेकिन आईसीयू में मरीजों की संख्या पहले की तुलना में बढ़ी है। अब आईसीयू में 16 मरीज हैं। इनमें से 3 वेंटिलेटर पर हैं। इससे पहले सोमवार को 15 और रविवार को 7 मरीज आईसीयू में भर्ती थे।

इधर, आज बुधवार को महिला कांग्रेस पूरे प्रदेश में एक साथ प्रदर्शन करेगी। मध्य प्रदेश महिला कांग्रेस की अध्यक्ष रीना बौरासी सेतिया ने बताया कि पूरे प्रदेश में एक साथ कैंडल मार्च निकालेंगे।

अब मुआवजा सूची में दो नए नाम जुड़े इधर, प्रशासन की परिजन को मुआवजा देने के लिए बनाई सूची में दो नए नाम हैं, जो पहले सामने नहीं आए थे। इनमें रामकली जगदीश व श्रवण नत्यु शामिल हैं। इनके सहित मुआवजा सूची में 15 नाम हो गए हैं।

महाराष्ट्र में हुआ बुजुर्ग का अंतिम संस्कार

दूषित पानी की इस त्रासदी में श्रावण नथ्थु खुपराव की मौत भी जुड़ चुकी है। 29 दिसंबर को इलाज के दौरान अस्पताल में उनकी मौत हो गई। बेटे श्रीकृष्ण ने बताया कि 25 दिसंबर को उन्हें अचानक उल्टी-दस्त की शिकायत हुई थी। हालत बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। 26 दिसंबर को कुछ सुधार हुआ, लेकिन इसके बाद अचानक तबीयत फिर बिगड़ी और उनकी जान चली गई।

श्रावण खुपराव का अंतिम संस्कार महाराष्ट्र के बुलढ़ाना जिले के सेलापुर गांव में किया गया, जो उनका पैतृक गांव है। उनका पोता नगर निगम की पानी की टंकी पर कार्यरत है और बेटा सुरक्षाकर्मी के रूप में काम करता है, इसी कारण पूरा परिवार इंदौर में रह रहा था। सवाल यह है कि जिस परिवार का सदस्य खुद पानी की व्यवस्था से जुड़ा है, वही परिवार दूषित पानी का शिकार बन गया।
47 वर्षीय रामकली की भी गई जान

इसी तरह रामकली पत्नी जगदीश (47 वर्ष) की मौत ने भी प्रशासन के दावों को कटघरे में खड़ा कर दिया है। उनके बेटे ने बताया कि 28 दिसंबर को अचानक उल्टी-दस्त की शिकायत हुई। परिजन उन्हें इलाज के लिए निजी अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन इलाज के दौरान ही उनकी मौत हो गई। परिजनों का कहना है कि रामकली को इससे पहले किसी भी तरह की गंभीर बीमारी नहीं थी। अचानक हुई तबीयत खराबी और मौत ने दूषित पानी की भूमिका को और मजबूत कर दिया है।

भागीरथपुरा और आसपास के इलाकों में हालात ऐसे हैं कि हर घर में बीमार लोग मिल रहे हैं। अस्पतालों में बेड भर चुके हैं, स्वास्थ्य केंद्रों पर मरीजों की भीड़ लगी है, लेकिन प्रशासन अब भी मौतों को “स्वाभाविक” या “अन्य कारणों” से जोड़कर अपनी जिम्मेदारी से बचने में लगा है। भागीरथपुरा में बहता दूषित पानी अब सिर्फ बीमारी नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही और संवेदनहीनता का सबसे बड़ा सबूत बन चुका है।

कलेक्टर और निगम कमिश्नर रोज कर रहे निरीक्षण कलेक्टर शिवम वर्मा और नगर निगम कमिश्नर क्षितिज सिंघल ने बुधवार को भी भागीरथपुरा क्षेत्र की बस्तियों और कॉलोनी का निरीक्षण किया। इस दौरान सीवरेज और नर्मदा पाइपलाइन के लीकेज सुधार के कामों का जायजा लिया और दिशा निर्देश दिए। स्थानीय रह वासियों से भी वाटर सप्लाई को लेकर जानकारी ली गई।

निगम कमिश्नर क्षितिज सिंघल ने बताया कि क्षेत्र में घर-घर और गली-गली जाकर रहवासियों को जानकारी दी जा रही है कि आज 12.30 बजे नर्मदा पानी की सप्लाई टेस्टिंग के लिए की जाएगी।

अनाउंसमेंट किया जा रहा है कि पानी के सप्लाई दौरान घर की नर्मदा लाइन की टोटी को बंद ही रखें, पानी का इस्तेमाल ना करें। इलाके में पर्याप्त मात्रा में टैंकर से पानी सप्लाई किया जा रहा है। टैंकर का पानी उबालकर और छानकर ही पीएं। भागीरथपुरा पानी की टंकी से क्लोरीनेशन वाटर सप्लाई की टेस्टिंग आज फिर की जाएगी।

दो दिन में 5013 घरों तक पहुंचीं हेल्थ टीमें सीएमएचओ डॉ. माधव प्रसाद हासानी के मुताबिक 61 टीमें बनाई गई थीं। इन टीमों में नर्सिंग ऑफिसर, सीएचओ, आशा और एएनएम शामिल हैं। जिन्होंने घरों में रियल टाइम सर्वे किया है। दो दिनों में ये टीमें 5013 घरों तक पहुंची हैं। 24786 लोगों से संपर्क कर उन्हें उचित परामर्श दिया है। वहीं, प्रत्येक घर में दवाइयां और एक क्लिनवेट ड्रॉप भी बांटे हैं।

जानिए क्या है कोबो टूल दरअसल, कोबो टूल एक ऑनलाइन मोबाइल एप है। इससे भागीरथपुरा के हर घर का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया। किस घर में बीमारी की गंभीरता ज्यादा थी, कितने सदस्य बीमार थे, पानी को साफ रखने को लेकर उनकी जानकारी सहित कई प्रश्न किए गए।

भागीरथपुरा में दूषित पानी से फैली बीमारी के बाद इंडियन काउंसिल फॉर मेडिकल रिसर्च (ICMR) के सर्वे में 17 गलियां संक्रमित मिली हैं। 61 टीमों 5013 घरों का सर्वे किया और करीब 25 हजार लोगों तक पहुंचे। इसमें से 40 से 50% क्षेत्र प्रभावित मिला है।

भागीरथपुरा टंकी के पास सामने वाली गली में मरीज नहीं मिले। इन्हीं डेटा के आधार पर हीट-गैप बनाया है। 460 घर प्रभावित मिले, इनमें से 600 सिंप्टोमैटिक मरीज मिले।

कोर्ट ने कहा- शहर पूरे देश में चर्चा का विषय बना ​​मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में मंगलवार को दूषित पेयजल से जुड़े मामले में 5 याचिकाओं की एक साथ सुनवाई हुई। इस दौरान कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा- इस घटना ने इंदौर शहर की छवि को गंभीर नुकसान पहुंचाया है। देश का सबसे स्वच्छ शहर कहलाने वाला इंदौर अब दूषित पानी की वजह से पूरे भारत में चर्चा का विषय बन गया है।

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि सिर्फ इंदौर ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश में स्वच्छ पानी जनता का मौलिक अधिकार है और इससे किसी भी हाल में समझौता नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि यदि भविष्य में आवश्यकता पड़ी तो दोषी अधिकारियों पर सिविल और क्रिमिनल लायबिलिटी भी तय की जाएगी। साथ ही संकेत दिए कि अगर पीड़ितों को मुआवजा कम मिला है तो उस पर भी अदालत उचित निर्देश जारी करेगी।

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