मध्यप्रदेश

मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल की परीक्षाओं में एंट्री के लिए आइरिस और फिंगरप्रिंट जांच अनिवार्य, AI से होगी प्रश्नपत्र तैयारियों में मदद

भोपाल
मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल (ईएसबी) की इस साल होने वाली परीक्षाओं में सुरक्षा के काफी प्रबंध रहेंगे। सभी परीक्षाओं में अभ्यर्थियों की पहचान का सत्यापन आधार आधारित फेस (चेहरे), आइरिस (आंखों की पुतली) स्कैन और फिंगर (अंगुलियों की छाप) प्रणाली से किया जाएगा।

इससे ऐसे लोगों की पहचान की जाएगी, जो दूसरे के नाम पर परीक्षा देने बैठते हैं। इसके लिए ईएसबी परीक्षा केंद्रों पर आइरिस स्कैन और फेस रिकोग्निशन मशीनें लगाएगा। परीक्षा केंद्रों पर अधिक संख्या में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। नकल रोकने के लिए जैमर भी लगाए जाएंगे। इस संबंध में ईएसबी ने दिशा-निर्देश भी जारी कर दिए हैं।

इस बार ईएसबी प्रश्नपत्र तैयार करने और परीक्षा केंद्रों के चयन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की भी सहायता लेगा। इस वर्ष विभिन्न सरकारी विभागों में करीब 15 हजार पदों के लिए 16 भर्ती परीक्षाएं आयोजित की जाएंगी। ये भर्तियां पुलिस, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य अहम विभागों में रिक्त पड़े पदों को भरने के लिए की जाएंगी।

बता दें, कि ये कदम वर्ष 2023 की आरक्षक भर्ती परीक्षा में हुई अनियमितताओं के बाद उठाया गया है, जब अभ्यर्थियों ने आधार के बायोमेट्रिक पहचान में धोखाधड़ी कर परीक्षा पास कर ली थी। शारीरिक दक्षता परीक्षा के दौरान ऐसे कुछ अभ्यर्थी पकड़े गए थे।

फर्जी अभ्यर्थी की पहचान हो सकेगी

अधिकारियों ने बताया कि आइरिस स्कैन को अंगुलियों के निशान से कहीं अधिक सुरक्षित माना जाता है। यह एक ऐसी बायोमेट्रिक तकनीक है जो सटीक होती है। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि हर व्यक्ति की आंख की पुतली का पैटर्न बेहद अनोखा और जटिल होता है, जिसे बदला नहीं जा सकता है। इसी तरह फेस रिकोग्निशन भी सुरक्षित माना जा रहा है।

तीन एजेंसियां करेंगी काम

एआई के माध्यम से पुलिस भर्ती परीक्षा को संपन्न कराया जाएगा। इसमें केंद्र के निर्धारण से लेकर प्रश्नपत्र तैयार करने, परीक्षा केंद्रों पर निगरानी और परीक्षार्थियों की जांच सब कुछ एआई के माध्यम से होगा। एआई चार प्रकार से डाटा विश्लेषण कर ईएसबी को भेजेगा। इसमें परीक्षार्थियों द्वारा हल किए गए सवालों पर साफ्टवेयर के माध्यम से नजर रखी जाएगी कि एक विद्यार्थी एक प्रश्न कितने देर में हल कर रहा है।

परीक्षार्थी किस प्रश्न पर कितनी देर रुका, प्रश्नों को हल करने में कितना समय लगा, कितनी देर वह खाली बैठा रहा। इसके आधार पर संदिग्ध की पहचान हो सकेगी। अगर अभ्यर्थी सिर्फ 15 से 20 मिनट में जवाब दे देता है तो एआइ मंडल को रेड अलर्ट भेजेगा। तीन एजेंसियां मिलकर परीक्षा संपन्न कराएंगी।

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