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विदेश

भारत की चोट से तिलमिलाया पाकिस्तान, अफगान बाजार में बंद हुईं पड़ोसी की दवाएं

अफगानिस्तान
अफगानिस्तान में इन दिनों एक दिलचस्प बदलाव देखने को मिल रहा है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर फजल अफगान नाम के एक अफगान ब्लॉगर की कहानी इस बदलाव की गवाह है। फजल को सिरदर्द के लिए 'पारोल' (तुर्की का ब्रांड) खरीदना था जिसकी कीमत 40 अफगानी थी। लेकिन फार्मासिस्ट ने उन्हें भारत में बनी वही दवा महज 10 अफगानी में दे दी। फजल का कहना है कि भारतीय दवा न केवल चार गुना सस्ती थी, बल्कि उसका असर भी बहुत तेज रहा। यह केवल एक व्यक्ति का अनुभव नहीं है, बल्कि पूरे अफगानिस्तान में भारतीय दवाएं अब पाकिस्तानी दवाओं की जगह ले रही हैं।

क्यों टूटा पाकिस्तान का वर्चस्व?
दशकों से अफगानिस्तान अपनी बुनियादी चिकित्सा जरूरतों के लिए पाकिस्तान पर निर्भर था। वहां की लगभग 70-80% दवाएं पाकिस्तान से आती थीं। लेकिन अक्टूबर-नवंबर 2025 में दोनों देशों के बीच हुई हिंसक सीमा झड़पों के बाद स्थितियां बदल गईं। अफगानिस्तान के उप प्रधानमंत्री अब्दुल गनी बरादर ने घटिया गुणवत्ता का हवाला देते हुए पाकिस्तानी दवाओं पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। अफगान व्यापारियों को भारत, ईरान और मध्य एशिया से विकल्प तलाशने को कहा गया। तोरखम और चमन जैसे प्रमुख सीमा व्यापारिक रास्तों के बंद होने से पाकिस्तान से होने वाली सप्लाई पूरी तरह ठप हो गई।

संकट के समय का सच्चा साथी भारत
जब अफगानिस्तान दवाओं की कमी से जूझ रहा था, तब भारत ने मानवीय आधार पर मदद का हाथ बढ़ाया। नवंबर 2025 में भारत ने 73 टन जीवन रक्षक दवाओं की खेप काबुल भेजी। वित्त वर्ष 2024-25 में भारत ने 108 मिलियन डॉलर की दवाएं भेजी थीं, जबकि 2025 के अंतिम महीनों में ही यह आंकड़ा 100 मिलियन को पार कर गया। भारत केवल दवाएं ही नहीं भेज रहा, बल्कि वहां अस्पतालों का निर्माण भी कर रहा है। काबुल में इंदिरा गांधी चिल्ड्रेन्स हॉस्पिटल (400 बेड) इसका सबसे बड़ा उदाहरण है।

जाइडस लाइफसाइंसेज का मेगा डील
भारतीय फार्मा दिग्गज जाइडस लाइफसाइंसेज ने नवंबर 2025 में अफगानिस्तान के 'रोफी इंटरनेशनल ग्रुप' के साथ 100 मिलियन डॉलर का समझौता (MoU) किया है। इस समझौते के तहत भारत न केवल दवाएं निर्यात करेगा, बल्कि भविष्य में अफगानिस्तान में ही मैन्युफैक्चरिंग प्लांट लगाने के लिए तकनीक हस्तांतरण भी करेगा। इससे अफगानिस्तान की आयात पर निर्भरता कम होगी और वहां के लोगों को सस्ती और उच्च गुणवत्ता वाली दवाएं मिल सकेंगी।

 

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