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शेख हसीना के तख्तापलट के बाद बांग्लादेश में पहली सियासी जंग, चुनावी बिगुल बजा

ढाका 

बांग्लादेश में 2024 के जन आंदोलन और लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहीं शेख हसीना को सत्ता से हटाए जाने के बाद पहले राष्ट्रीय चुनाव के लिए गुरुवार से प्रचार शुरू हो गया है. बड़े राजनीतिक दलों ने 12 फरवरी को होने वाले चुनाव से पहले ढाका और दूसरे शहरों में रैलियां की हैं. इस चुनाव को बांग्लादेश के इतिहास में बहुत अहम माना जा रहा है, क्योंकि यह शेख हसीना के हटने के बाद अंतरिम सरकार के तहत हो रहा है और इसमें लोग प्रस्तावित राजनीतिक सुधारों पर भी फैसला करेंगे. नोबेल शांति पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस की अगुवाई वाली अंतरिम सरकार ने निष्पक्ष चुनाव कराने का वादा किया है, लेकिन उनकी सरकार ने हसीना की पार्टी अवामी लीग पर बैन लगाया है, जिससे सवाल उठे हैं.

अवामी लीग और बीएनपी लंबे समय से देश की राजनीति में अहम भूमिका निभाते रहे हैं. देश में कानून-व्यवस्था को लेकर भी चिंता है, लेकिन सरकार का कहना है कि वोटिंग शांतिपूर्ण तरीके से होगी. सैकड़ों प्रदर्शनकारियों और लोगों की मौत के बाद हुए हिंसक कार्रवाई के बीच हसीना के 5 अगस्त 2024 को देश छोड़कर भारत जाने के तीन दिन बाद यूनुस ने पद संभाला था.

जमात-ए-इस्लामी ने बनाया गठबंधन

अवामी लीग के चुनाव से बाहर होने के बाद जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाला 10 दलों का गठबंधन अपना असर बढ़ाने की कोशिश कर रहा है. जमात-ए-इस्लामी को धर्मनिरपेक्ष समूहों की आलोचना झेलनी पड़ती है, जो कहते हैं कि उसकी नीतियां बांग्लादेश की धर्मनिरपेक्षता को चुनौती देती हैं. जन आंदोलन के दौरान छात्र नेताओं द्वारा बनाई गई ‘नेशनल सिटिजन पार्टी’ (एनसीपी) भी इस गठबंधन में शामिल है. बीएनपी अध्यक्ष और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान को प्रधानमंत्री पद का बड़ा दावेदार माना जा रहा है. उनकी पार्टी को उनकी मां की राजनीतिक विरासत की वजह से मजबूत समर्थन मिला है. खालिदा जिया का पिछले महीने निधन हो गया था. रहमान 17 साल के निर्वासन के बाद पिछले महीने ब्रिटेन से बांग्लादेश लौटे हैं.

तारिक रहमान करेंगे अभियान की शुरुआत

रहमान गुरुवार को सिलहट शहर में एक रैली से अपने चुनाव अभियान की शुरुआत कर रहे हैं और आने वाले दिनों में कई जिलों का दौरा करेंगे. जमात-ए-इस्लामी और एनसीपी भी ढाका में अपने प्रचार की शुरुआत करने वाले हैं. इस चुनाव में एक राष्ट्रीय चार्टर पर जनमत संग्रह भी शामिल है, जिसके समर्थन में अंतरिम सरकार वोटरों से अपील कर रही है. सरकार का कहना है कि यह चार्टर सुधारों पर आधारित नई राजनीतिक दिशा दिखाता है. इस चार्टर पर पिछले साल देश के 52 पंजीकृत दलों में से 25 ने हस्ताक्षर किए थे. अवामी लीग ने इसका विरोध किया था, जबकि कई दलों ने दस्तावेज पर साइन करने से मना कर दिया था. ‘जुलाई राष्ट्रीय चार्टर’ का नाम जुलाई 2024 में शुरू हुए उस जन आंदोलन के नाम पर रखा गया है, जिसने हसीना सरकार के गिरने का रास्ता बनाया.

अभी यह चार्टर बाध्यकारी नहीं है, लेकिन समर्थकों का कहना है कि इसे कानूनी रूप से लागू और संविधान का हिस्सा बनाने के लिए जनमत संग्रह जरूरी है. बांग्लादेश में संविधान में बदलाव सिर्फ संसद ही कर सकती है. अंतरिम सरकार का कहना है कि यह चार्टर सत्तावादी शासन से बचने के लिए ज्यादा नियंत्रण और संतुलन लाएगा, जिसमें राष्ट्रपति को ज्यादा अधिकार देकर अब तक ताकतवर रहे प्रधानमंत्री पद का संतुलन किया जाएगा. इसमें सांसदों के कार्यकाल की सीमा तय करने और हितों के टकराव, धनशोधन और भ्रष्टाचार रोकने के उपाय भी शामिल हैं.

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