मध्यप्रदेश

प्रदीश में बिना पर्ची के धड़ल्ले से बिक रहीं एंटीबायोटिक्स, करोड़ों का अंधाधुंध कारोबार हर महीने

रीवा 

 जिले में एंटीबायोटिक्स दवाओं का हर माह 7 से 8 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार होता है। इतना ही नहीं प्रतिबंध के बावजूद तमाम दवा विक्रेता एंटीबायोटिक दवाओं की ऑन द काउंटर (ओटीसी) बिक्री भी कर रहे हैं। एंटीबायोटिक्स का बेवजह इस्तेमाल से जहां लोगों का स्वास्थ बिगड़ रहा है वहीं उनकी जेब पर भी असर पहुंच रहा है।

दवा कारोबारियों व डॉक्टरों के गठजोड़ के कारण एंटीबायोटिक्स की खपत पर रोक नहीं लग पा रही है। यह गठजोड़ अवैध कमाई का जरिया बन गया है। एंटीबायोटिक दवाओं का जिला भी एक बड़ा बाजार बन चुका है। रीवा एवं मऊगंज जिले को मिलाकर अरमान व रूरल एरिया में कल 1380 मेडिकल स्टोर रजिस्टर्ड है। इनमें ग्रामीण अंचलों में मकड़जाल की तरह पहले झोलाछाप डॉक्टर शामिल नहीं है, जिसमें अंधाधुंध एंटीबायोटिक्स दवाओं की खुलेआम बिक्री हो रही है।

बड़े स्तर पर चिकित्सकों ने भी अपने मरीजों को दवा लिखकर मेडिकल स्टोर से खरीदने की बजाय खुद ही बेच रहे हैं। इसके अलावा सर्दी, जुकाम, खांसी, फोड़े-फुन्सी, चोट इत्यादि के उपचार के लिए मरीज सीधे मेडिकल स्टोर पर जाकर काउंटर से एंटीबायोटिक्स खरीदकर कार्य चला रहे हैं और दवा विक्रेता भी धड़ल्ले से वायरल इंफेक्शन, मौसमी विकार व चोट घाव की दवा बिना डाक्टरों की पर्ची मांगे बेच भी रहे हैं।  एंटीबायोटिक्स के इस भयावह स्थिति को लेकर पड़ताल करने का प्रयास किया है।

एक हजार से अधिक काउंटर जिले में संचालित: जिले में एंटीबायोटिक्स दवाओं का कारोबार एक बहुत बड़ा और सक्रिय स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र का हिस्सा है। यहां थोक विक्रेताओं का एक बड़ा नेटवर्क है जो निमोनिया, संक्रमण और अन्य बीमारियों के लिए एमोक्सिसिलिन, सेफलेक्सिन और डॉक्सीसाइक्लिन जैसे प्रमुख एंटीबायोटिक्स को अस्पतालों, क्लीनिकों और फार्मेसियों में वितरित करते हैं।

शहर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में दवाओं की भारी मांग के कारण थोक और खुदरा कारोबार काफी बड़ा है। यही कारण है कि जहां शहरी क्षेत्र में 681 से अधिक तो ग्रामीण में लगभग 699 दवा काउंटर हैं जो फुटकर में दवाओं की बिक्री कर रहे हैं। इन्हीं काउंटर से माह भर में 7 से 8 करोड़ रुपये से अधिक की सिर्फ एंटीबायोटिक्स दवाओं की बिक्री हो जाती है।

मेडिकल स्टोरों पर बिना पर्चे के एंटीबायोटिक्स की बिक्री : ख़ुटेही निवासी अशोक पटेल तीन दिन से सर्दी-जुकाम से पीड़ित हैं। बुधवार को बुखार एवं जुकाम के बाद पास के अन्नपूर्णा मेडिकल स्टोर पहुंचे और अपनी समस्या बताकर दवा ले ली। न दुकान संचालक ने डाक्टर की पर्ची मांगी और न ही पीड़ित ने दी।

चिकित्सक कमीशन के खेल में अपनी जेबें भर रहे हैं। एंटीबायोटिक्स के माध्यम से धन कमा बना रहे हैं। जिस दवा कंपनी से इनका कमीशन अधिक मिलता है वे मरीज को वही दवा लिखते हैं। दवा विक्रेता क्या करे, जो मांग आएगी वह उसे ही तो बेचेगा। अब तो डॉक्टर दवाई भी बेचने लगे हैं।

निश्चित रूप से सरकार को नियम सख्त करने की जरूरत है। तरुणेद्र सिंह, अध्यक्ष, दवा विक्रेता संघ रीवा। हमने पहले ही सरकारी चिकित्सकों को गाइड लाइन के पालन की सख्त हिदायत देकर रखी हुई है। वायरल इंफेक्शन में तो मरीज को एंटीबायोटिक्स दवा बिल्कुल नहीं देनी चाहिए। इसी तरह सर्दी, जुकाम में भी विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत है। एक दो दिन में यह अपने आप ठीक हो जाती है।

ऐसे में एंटीबायोटिक्स नुकसानदेह है। खासकर हाईडोज से बचना चाहिए। शिशु रोग के मामले में खासकर ध्यान देने की आवश्यकता है। डॉ प्रतिभा पांडे, सिविल सर्जन, कुशाभाऊ ठाकरे जिला अस्पताल बिछिया रीवा।

RO No. 13169/ 31

RO No. 13098/ 20

PRATYUSHAASHAKINAYIKIRAN.COM
Editor : Maya Puranik
Permanent Address : Yadu kirana store ke pass Parshuram nagar professor colony raipur cg
Email : puranikrajesh2008@gmail.com
Mobile : -91-9893051148
Website : pratyushaashakinayikiran.com

जनसम्पर्क विभाग – आरएसएस फीड