मध्यप्रदेश

सतत जीवन शैली की ओर अग्रसर महाविद्यालय: ‘वेस्ट टू वेल्थ’ कार्यशाला में नवाचारों की गूंज

भोपाल

आज दिनांक 23 फरवरी 2026 को महाविद्यालय में इको क्लब के तत्वावधान में पर्यावरण शिक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का विषय “सतत जीवन शैली : वेस्ट टू वेल्थ” रहा। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को अपशिष्ट प्रबंधन, संसाधनों के पुनः उपयोग एवं सतत विकास की दिशा में प्रेरित करना था। कार्यक्रम का शुभारंभ सरस्वती वंदना एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ।

महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. उमेश कुमार धुर्वे ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि पर्यावरण संरक्षण आज समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने छात्राओं को शोध, नवाचार एवं सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से सतत विकास लक्ष्यों की दिशा में कार्य करने के लिए प्रेरित किया। साथ ही इको क्लब द्वारा आयोजित इस सार्थक पहल की सराहना करते हुए भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रम निरंतर आयोजित करने की बात कही।

इसके पश्चात इको क्लब प्रभारी डॉ. सतीश बालापुरे ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए बताया कि इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों में पर्यावरणीय उत्तरदायित्व की भावना विकसित करना है। उन्होंने अपशिष्ट प्रबंधन, वृक्षारोपण एवं जैव विविधता संरक्षण से जुड़े आगामी कार्यक्रमों की जानकारी भी साझा की।

मुख्य वक्ता एवं पर्यावरणविद डॉ. आनंद पटेल हेक्सा हिवा इंटरनेशनल (HHI), भोपाल ने अपने उद्बोधन में “वेस्ट टू वेल्थ” की अवधारणा को व्यवहारिक रूप से समझाते हुए अनेक नवाचारों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि संतरे एवं नींबू के छिलकों से बायो-एंज़ाइम तैयार कर घरेलू स्वच्छता एवं जैविक उपयोग में लाया जा सकता है। साथ ही प्लास्टिक कचरे के पुनः उपयोग हेतु इको ब्रिक निर्माण की प्रक्रिया समझाई, जिसमें खाली प्लास्टिक बोतलों में अपशिष्ट प्लास्टिक भरकर उपयोगी निर्माण सामग्री तैयार की जाती है। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण हेतु मल्टी लेयर सीड बॉल की तकनीक समझाई, जिसके माध्यम से बीजों को मिट्टी, खाद एवं सुरक्षात्मक परतों के साथ तैयार कर बड़े स्तर पर हरितावरण बढ़ाया जा सकता है।

डॉ. पटेल ने सर्कुलर इकॉनॉमी के विचार को स्पष्ट करते हुए बताया कि संसाधनों का पुनर्चक्रण एवं पुनः उपयोग ही सतत विकास का आधार है। उन्होंने “मिशन लाइफ” की 7 थीम के आधार पर दैनिक जीवन में अपनाए जा सकने वाले 70 व्यवहारिक उपायों की जानकारी भी दी।

अंत में उन्होंने महाविद्यालय को एक इको-फ्रेंडली सोलर लैंप भेंट स्वरूप प्रदान किया, जो ऊर्जा संरक्षण एवं हरित जीवन शैली का प्रेरणादायी प्रतीक रहा।
द्वितीय वक्ता एवं विषय विशेषज्ञ उषा दुबे नर्मदापुरम ने अपने संबोधन में दैनिक जीवन में छोटे-छोटे सकारात्मक परिवर्तनों के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने छात्राओं को सिंगल यूज़ प्लास्टिक से बचने, रसोई अपशिष्ट से कंपोस्ट तैयार करने तथा कपड़े एवं कागज़ के पुनः उपयोग के उपाय बताए। उन्होंने कहा कि यदि प्रत्येक विद्यार्थी अपने घर और समाज में पर्यावरण के प्रति जागरूकता फैलाए, तो “वेस्ट टू वेल्थ” एक जन आंदोलन का रूप ले सकता है।

अंत में इको क्लब सह-प्रभारी डॉ. रजनीकांत वर्मा ने अपने वक्तव्य में कहा कि “वेस्ट टू वेल्थ” केवल एक विचार नहीं, बल्कि व्यवहार में अपनाई जाने वाली जीवन शैली है। उन्होंने छात्राओं से घर एवं परिसर में कचरे का पृथक्करण, जैविक खाद निर्माण एवं पुनर्चक्रण की आदत विकसित करने की अपील की। उन्होंने कहा कि युवाओं की सक्रिय भागीदारी से ही पर्यावरण संरक्षण की दिशा में ठोस परिवर्तन संभव है।
मंच संचालन डॉ. मनीष दीक्षित ने किया तथा डॉ. रजनीकांत वर्मा ने सभी का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर प्राध्यापकगण रजनीश जाटव, मनोज कुमार प्रजापति, धीरेंद्र दुबे, डॉ. दुर्गा मीना, प्रवीण साहू, मयंक गौर, रजनी हरियाले, नीलम दुबे,  नीलू लोवंशी, राहुल मालवीय एवं इको क्लब इकाई की छात्राएँ तथा महाविद्यालय का समस्त स्टाफ उपस्थित रहा। कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

 

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