मध्यप्रदेश

राष्ट्रीय वनमाली कथा सम्मान समारोह 2026 का भव्य आयोजन

 वरिष्ठ कथाकार मृदुला गर्ग (दिल्ली), अलका सरावगी (कोलकाता) सहित सात रचनाकार हुए सम्मानित

भोपाल

सुप्रतिष्ठित कथाकार, शिक्षाविद् तथा विचारक  जगन्नाथ प्रसाद चौबे ‘वनमाली जी’ के रचनात्मक योगदान और स्मृति को समर्पित संस्थान 'वनमाली सृजन पीठ' के प्रतिष्ठा आयोजन 'राष्ट्रीय वनमाली कथा सम्मान समारोह–2026 का भव्य शुभारंभ 24 फरवरी को स्कोप ग्लोबल स्किल्स विश्वविद्यालय, भोपाल के मुक्ताकाश मंच पर  सुप्रसिद्ध लोकगायक पद्मश्री प्रहलाद सिंह टिपाणिया के कबीर गायन से किया गया।

वनमाली कथा सम्मान के अंतर्गत आयोजित सांस्कृतिक संध्या में प्रसिद्ध कबीर गायक प्रह्लाद सिंह टिपाणिया एवं उनके साथियों ने निर्गुण भक्ति की सशक्त प्रस्तुति देकर श्रोताओं को आध्यात्मिक भाव से सराबोर कर दिया। कबीर के दोहों और पदों से सजी इस प्रस्तुति ने सभागार में एक आत्मीय और ध्यानमग्न वातावरण निर्मित किया, जहाँ संगीत और दर्शन का अद्भुत संगम देखने को मिला। प्रस्तुति के दौरान प्रह्लाद सिंह टिपाणिया ने अपनी विशिष्ट लोक शैली में “जग में मांगण हारा, गुरु सम दाता कोई नहीं…”, “तन राम का मंदिर, काया राम का मंदिर…”, “गुरुजी के चरणों में रहना भाई संतो…”, तथा “जरा धीरे गाड़ी हांकों मेरे राम गाड़ी वाले…” जैसे लोकप्रिय कबीर दोहों और भजनों का गायन किया। उनके स्वर में सहजता, गहराई और आध्यात्मिक अनुभूति का ऐसा समन्वय था कि श्रोता पूरे समय भाव-विभोर होकर प्रस्तुति से जुड़े रहे। मुख्य गायक प्रह्लाद सिंह टिपाणिया ने तंबूरा और करताल पर स्वयं संगत करते हुए कबीर की वाणी को जीवंत बनाया। उनके साथ संगत में ढोलक पर अजय टिपाणिया, वायलिन पर देव नारायण सरोलिया, हार्मोनियम पर धर्मेंद्र टिपाणिया, मंजीरे पर मयंक टिपाणिया तथा टिमकी पर मंगलेश मांगरोलिया ने सधे हुए तालमेल के साथ प्रस्तुति को और प्रभावी बनाया। वाद्ययंत्रों की मधुर संगत ने कबीर के निर्गुण संदेश को और अधिक आत्मीयता से दर्शकों तक पहुँचाया।

यह सम्मान समारोह ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित वरिष्ठ उड़िया कथाकार प्रतिभा राय के मुख्य आतिथ्य में आयोजित किया गया।

वरिष्ठ और युवा रचनाकार हुए सम्मानित

 सम्मान समारोह में ‘वनमाली कथाशीर्ष सम्मान’ से सुप्रसिद्ध वरिष्ठ रचनाकार मृदुला गर्ग को एवं ‘ राष्ट्रीय वनमाली कथा सम्मान’ से वरिष्ठ कथाकार अलका सरावगी को सम्मानित किया गया।
दोनों ही रचनाकारों को शॉल, श्रीफल, प्रशस्ति पत्र एवं एक-एक लाख रुपये की सम्मान राशि प्रदान कर अलंकृत किया गया।

इस अवसर पर ‘वनमाली कथा आलोचना सम्मान’  महेश दर्पण को, ‘वनमाली कथा मध्यप्रदेश सम्मान’ वरिष्ठ कथाकार उर्मिला शिरीष (भोपाल) को, ‘वनमाली युवा कथा सम्मान’ युवा कथाकार कुणाल सिंह को, वनमाली कथेतर सम्मान’ अयोध्या के यतीन्द्र मिश्र को प्रदान किये गए। साहित्य के क्षेत्र में डिजिटल माध्यम से महत्वपूर्ण योगदान के लिए पहला 'वनमाली डिजिटल साहित्य अवदान सम्मान' अंजूम शर्मा को प्रदान किया गया। इन सभी सम्मानित रचनाकारों को शॉल-श्रीफल प्रशस्ति पत्र एवं इक्यावन-इक्यावन हजार रुपये की सम्मान राशि प्रदान कर अलंकृत किया।

वनमाली सृजन पीठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष वरिष्ठ कवि कथाकार श्री संतोष चौबे ने सम्मान समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि ‘विश्व रंग’ के अंतर्गत वनमाली सृजन पीठ द्वारा प्रदान किए गये ‘वनमाली कथा सम्मान’ समकालीन कथा परिदृश्य में लोकतान्त्रिक एवं मानवीय मूल्यों की तलाश में जुटे कथा साहित्य की पुनःप्रतिष्ठा करने एवं उसे समुचित सम्मान प्रदान करने के उद्देश्य से स्थापित द्विवार्षिक पुरस्कार है। इस सम्मान समारोह के पूर्व अब तक वनमाली कथा सम्मान से भारत के सुप्रतिष्ठित रचनाकारों में शुमार ममता कालिया, चित्र मुद्गल, शशांक, स्वयं प्रकाश, अखिलेश, असगर वजाहत, उदय प्रकाश, मैत्रेयी पुष्पा, प्रभु जोशी, प्रियंवद, गीतांजलि श्री, मनोज रूपड़ा आदि रचनाकारों को अलंकृत किया जा चुका है।

इस अवसर पर वरिष्ठ लेखिका एवं इलेक्ट्रॉनिकी आपके लिए की कार्यकारी संपादक डॉ. विनीता चौबे, वरिष्ठ कथाकार एवं वनमाली सृजन पीठ, भोपाल के अध्यक्ष मुकेश वर्मा, एस.जी.एस.यू. के कुलगुरु डॉ. विजय सिंह ने भी विचार व्यक्त किए।

'वनमाली कथा’ पत्रिका एवं 'वनमाली वार्ता' हुई लोकार्पित

नई सदी की नई रचनाशीलता को सम्यक एवं समुचित स्थान देने के उद्देश्य से प्रारम्भ की गई लोकतान्त्रिक मूल्यों की समावेशी पत्रिका ‘वनमाली कथा’ ने अपने प्रवेशांक से ही साहित्य जगत में रचनात्मक उपस्थिति दर्ज कराई है। पत्रिका का फरवरी अंक और वनमाली सृजन पीठ के मुखपत्र 'वनमाली वार्ता' का लोकार्पण भी इस अवसर पर अतिथियों द्वारा किया गया।

इस अवसर पर वनमाली जी के कृतित्व और व्यक्तित्व पर केंद्रित और वनमाली सम्मान समारोह पर केंद्रित लघु फिल्म तथा 'विश्व रंग' के सात वैश्विक आयोजनों पर केंद्रित फिल्म का प्रदर्शन भी किया गया।

समारोह का संचालन टैगोर विश्व कला एवं संस्कृति केंद्र के निदेशक विनय उपाध्याय द्वारा किया गया। सम्मानित रचनाकारों की प्रशस्ति का वाचन डॉ. संगीता पाठक द्वारा किया गया। आभार डॉ. सिद्धार्थ चतुर्वेदी, कुलाधिपति, स्कोप ग्लोबल स्किल्स विश्वविद्यालय, भोपाल दे व्यक्त किया। अतिथियों का स्वागत डॉ. नितिन वत्स, डॉ. संगीता जौहरी, डॉ. सितेश सिन्हा, संजय सिंह राठौर द्वारा किया गया।

सम्मान समारोह का संयोजन वनमाली सृजन पीठ की राष्ट्रीय संयोजक ज्योति रघुवंशी द्वारा किया गया।

इस अवसर पर बरकतउल्ला विश्वविद्यालय किया कुलगुरु डॉ. जैन, आर.एन.टी.यू. के कुलगुरु डॉ. आथ.पी. दुबे, वरिष्ठ रचनाकार शशांक,  लीलाधर मंडलोई, बलराम गुमास्ता, राजेन्द्र प्रसाद मिश्र, रामकुमार तिवारी, सविता भार्गव, डॉ. रेखा कस्तवार, डॉ. जवाहर कर्नावट, संजय शेफर्ड, अरुणेश शुक्ल, मोहन सगोरिया, कैलाश मांडलेकर,  नीलेश रघुवंशी, निरंजन श्रोत्रिय, घनश्याम मैथिल, सुरेश पटवा, देवीलाल पाटीदार, करुणा राजुरकर, वामनराव, सुदर्शन सोनी आदि सहित सैकड़ों की संख्या में युवा साहित्यप्रेमियों, विश्वविद्यालय के प्राध्यापकों, विद्यार्थियों ने अपनी रचनात्मक उपस्थिति दर्ज कराई।

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