राजनीती

भाजपा में जाने की अटकलों पर कांग्रेस विधायक Nitendra Singh Rathore का बड़ा बयान, सियासी हलचल तेज

भोपाल 
 हाल ही में मध्य प्रदेश की राजनीति से जुड़ी कुछ तस्वीरें सोशल मीडिया पर हाइलाइट हुई है। इन तस्वीरों ने क्षेत्र में यह माहौल बना दिया है कि अब पृथ्वीपुर से विधायक नितेन्द्र सिंह राठौर कांग्रेस छोडक़र भाजपा में शामिल हो जाएंगे। इतना ही नहीं कई राजनैतिक पंडित तो यह भी कह रहे हैं कि नितेन्द्र सिंह राठौर अगला चुनाव भी भाजपा से लड़ेंगे। हालांकि इस बात की पुष्टि हम नहीं करते, परन्तु इन दिनों नितेन्द्र सिंह राठौर का रहन-सहन यह बता रहा है कि अंदरखाने कुछ तो चल रहा है।

तस्वीरों से बढ़ीं सियासी अटकलें
पिछले कुछ महीनों में विधायक नितेन्द्र सिंह राठौर की प्रदेश के वरिष्ठ भाजपा नेताओं के साथ कई मुलाकातें सामने आई हैं। खासतौर पर मुख्यमंत्री मोहन यादव से उनकी बार-बार की मुलाकातों ने राजनीतिक हलकों में सवाल खड़े किए हैं। इसके अलावा पंचायत मंत्री प्रहलाद पटेल और कैबिनेट मंत्री गोविन्द सिंह राजपूत के साथ बैठकों की तस्वीरें भी चर्चा का विषय बनी हुई हैं। स्थानीय स्तर पर यह भी कहा जा रहा है कि भाजपा नेताओं से उनकी बढ़ती नजदीकियां किसी बड़े राजनीतिक फैसले का संकेत हो सकती हैं। हालांकि अभी तक यह केवल अटकलों के दायरे में है।

विधायक का जवाब: “जनता के काम के लिए मिलना जरूरी”

नितेन्द्र सिंह राठौर ने कहा ये निराधार बातें हैं जिनका कोई औचित्य नहीं हैं। किसी फंक्शन में जाने की तस्वीर को लेकर या मुख्यमंत्री से मिलने का मतलब ये नहीं कि मैं पार्टी बदल रहा हूं। सीएम मोहन यादव प्रदेश के मुखिया हैं उनसे सत्ता पक्ष के विधायक भी मिलते हैं और विपक्ष के विधायक भी मिलते हैं। क्योंकि, जनता ने चुनकर भेजा है तो हम क्षेत्र के काम मांगने या जनता की समस्याओं से अवगत कराने के लिए किसके पास जाएंगे? विपक्ष का विधायक यदि प्रदेश के मुखिया से मिलता है तो इसीलिए मिलता है ताकि जनता के हितों का ध्यान रख सके। क्योंकि, मुझे जनता ने चुनकर भेजा है। पृथ्वीपुर विधायक ने कहा मैं तो कहता हूं कि जनता के लिए मुझे प्रधानमंत्री जी से मिलना पड़े या किसी केन्द्रीय मंत्री से मिलना पड़े तो उनसे भी मिलूंगा। इसमें क्या गलत है? लेकिन, इन मुलाकातों को गलत तरीके से प्रस्तुत करना। ये बहुत दुखद और निराधार है।

मैं इतना ही कहूंगा कि ऐसी खबरों से पत्रकारों को बचना चाहिए। क्योंकि इससे एक जनप्रतिनिधि जी जनता के द्वारा चुनकर आता है उसकी छवि खराब करने का प्रयास है। जनता के काम के लिए और विकास कार्यों के लिए किसी से भी काम के लिए मिलना होगा मैं मिलूंगा।

 माह पहले संभावित बदलाव की चर्चा

सूत्रों के हवाले से यह भी चर्चा है कि यदि कोई राजनीतिक बदलाव होता है तो वह चुनाव से लगभग छह माह पहले हो सकता है। फिलहाल वे पार्टी नहीं छोड़ेंगे, ताकि कानूनी या दल-बदल से जुड़ी जटिलताएं न खड़ी हों। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि समय से पहले कदम उठाने पर सदस्यता और अयोग्यता से जुड़े प्रश्न उठ सकते हैं। हालांकि यह पूरी तरह अटकलों पर आधारित है और विधायक या पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक बयान इस संबंध में सामने नहीं आया है।

बदली हुई राजनीतिक शैली

स्थानीय मीडियाकर्मियों का कहना है कि पहले भाजपा सरकार के खिलाफ मुखर रहने वाले विधायक अब अपेक्षाकृत शांत नजर आते हैं। विपक्षी तेवरों में आई इस कमी को भी लोग संभावित राजनीतिक बदलाव से जोड़कर देख रहे हैं।

फिलहाल स्थिति स्पष्ट नहीं है, लेकिन इतना तय है कि मध्य प्रदेश की राजनीति में पृथ्वीपुर क्षेत्र से जुड़ी यह चर्चा आने वाले समय में और गर्मा सकती है। आने वाले महीनों में ही यह साफ होगा कि यह केवल सियासी कयास हैं या किसी बड़े राजनीतिक घटनाक्रम की भूमिका।

 

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