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नारी सुरक्षा, सम्मान और आत्मनिर्भरता का नया मॉडल बना उत्तर प्रदेश

लखनऊ

उत्तर प्रदेश में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर कार्यक्रम अब केवल रस्म अदायगी नहीं, बल्कि महिलाओं की आजादी, सशक्तीकरण और स्वावलंबन का जीता जागता पर्याय हैं। योगी सरकार में पिछले 9 साल के भीतर महिला सशक्तीकरण की एक नई तस्वीर सामने आई है। सुरक्षा, शिक्षा, रोजगार और आर्थिक स्वावलंबन के क्षेत्र में अनेक योजनाएं लागू की गई हैं। महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए मिशन शक्ति अभियान मील का पत्थर साबित हुआ। दिन हो या रात, बहन-बेटियां भयमुक्त होकर स्कूल या ऑफिस आ-जा रही हैं। प्रदेश में आज मातृशक्ति स्वतंत्र, आत्मनिर्भर, स्वस्थ और स्वावलंबी है। 

मिशन शक्ति- महिला सशक्तीकरण की नई इबारत

प्रदेश सरकार की ये सबसे बड़ी उपलब्धि है कि महिलाएं भयमुक्त होकर जीवन जीने के लिए स्वतंत्र हैं। महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए वर्ष 2020 में मिशन शक्ति अभियान की शुरुआत की गई। इसके तहत प्रदेश में 1694 एंटी रोमियो स्क्वायड सक्रिय हैं, जिन्होंने अब तक 1 करोड़ 18 लाख से अधिक सार्वजनिक स्थलों की चेकिंग की है और 4 करोड़ 52 लाख से अधिक व्यक्तियों की जांच की। इस दौरान 24,871 अभियोग दर्ज हुए और 33,268 आरोपितों को गिरफ्तार किया गया, जबकि 1 करोड़ 64 लाख से अधिक लोगों को चेतावनी दी गई। सेफ सिटी योजना के अंतर्गत 17 नगर निगमों और गौतम बुद्ध नगर में 7,95,699 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए तथा 4,150 हॉटस्पॉट चिन्हित किए गए। इन कदमों से महिलाओं के प्रति अपराधों में उल्लेखनीय कमी दर्ज हुई है। मिशन शक्ति के प्रभाव से रेप, महिलाओं और बच्चों के अपहरण, दहेज हत्या व घरेलू हिंसा के मामलों में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है।

मजबूत सुरक्षा व्यवस्था और संस्थागत तंत्र

प्रदेश में महिलाओं की सुरक्षा के लिए व्यापक संस्थागत ढांचा विकसित किया गया है। अब तक 44,177 महिला पुलिसकर्मियों की भर्ती की जा चुकी है और सभी थानों में महिला हेल्प डेस्क स्थापित किए गए हैं, जहां प्रशिक्षित महिला पुलिसकर्मी शिकायतें सुनती हैं। महिला हेल्पलाइन 1090 और आपातकालीन सेवा 112 के एकीकरण से त्वरित पुलिस सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। राज्य में 9,172 महिला बीट सक्रिय हैं और करीब 19,839 महिला पुलिसकर्मी तैनात हैं। लखनऊ में 100 पिंक बूथ स्थापित किए गए, जहां 25,216 शिकायतें प्राप्त हुईं और इनमें से 24,659 मामलों का समाधान काउंसिलिंग के माध्यम से किया गया। मिशन शक्ति फेज-5 में 50 लाख लोगों को जागरूक किया गया। 

कौशल और शिक्षा से बढ़ते अवसर

महिलाओं को सक्षम बनाने के लिए राज्य सरकार ने शिक्षा व कौशल विकास पर विशेष जोर दिया है। उत्तर प्रदेश स्किल डेवलपमेंट मिशन के माध्यम से युवतियों को आईटी, हेल्थकेयर, फैशन डिजाइनिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स, ब्यूटी एंड वेलनेस और रिटेल सहित लगभग 35 सेक्टरों में 1300 से अधिक जॉब रोल्स में प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण केंद्रों में डिजिटल स्किल, सॉफ्ट स्किल और व्यक्तित्व विकास का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है, ताकि युवतियां आधुनिक अर्थव्यवस्था के अनुरूप खुद को तैयार कर सकें। वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में भी कौशल विकास और व्यावसायिक शिक्षा को सशक्त बनाने के लिए महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं।

आर्थिक भागीदारी में ऐतिहासिक वृद्धि

9 वर्षों में उत्तर प्रदेश में महिला श्रम भागीदारी 13% से बढ़कर 36% पहुंची। उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के अन्तर्गत 9.11 लाख से अधिक समूहों, 63,519 ग्राम संगठनों एवं 3272 संकुल स्तरीय संघों का गठन करते हुए ग्रामीण क्षेत्र की 99 लाख से अधिक महिलाओं को जोड़ा गया। लखपति महिला योजना के अन्तर्गत 33 लाख से अधिक दीदियों का चिन्हांकन किया गया और 18 लाख से अधिक महिलाएं लखपति की श्रेणी में आ चुकी हैं। बी.सी. सखी ने कार्य करते हुए रु. 40 हजार करोड़ से अधिक का वित्तीय लेनदेन किया। बी. सी. सखियों ने रु. 109 करोड़ का लाभांश अर्जित किया।

आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ता महिला सशक्तीकरण

योगी सरकार की नीतियों का ही परिणाम है कि योजना प्रारंभ होने से लेकर अब तक मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना के अंतर्गत 26.78 लाख और निराश्रित महिला पेंशन योजना के अंतर्गत 38.58 लाख से अधिक लाभार्थी हैं। वन स्टाप सेंटर से अब तक 2.39 लाख महिलाएं लाभान्वित हुई हैं। 189 नगरीय निकायों में महिलाओं के लिए 1100 पिंक शौचालयों का निर्माण किया गया। 181-महिला हेल्पलाइन योजना के अंतर्गत 8.42 लाख महिलाओं को सहायता मिली है। हब फॉर इम्पावरमेंट ऑफ वूमेन योजना के अंतर्गत 28.63 लाख महिलाओं तथा बालिकाओं को सरकार की विभिन्न योजनाओं के बारे में जागरूक किया गया। वीबी- जी राम जी में मानव दिवस सृजन में 2025-26 में महिला सहभागिता 42 प्रतिशत है, 23.51 लाख महिला श्रमिकों को रोजगार मिला। 14 वर्ष तक की बालिकाओं के लिए सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम हेतु वैक्सिनेशन कार्यक्रम चलाया जा रहा है। जिस वैक्सीन की कीमत पहले लगभग 2100 रुपये थी, उसे कम करते हुए 300 रुपये तक लाया गया।

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