मध्यप्रदेश

सरकार उठाएगी 46 लाख लोगों की संपत्ति रजिस्ट्री का खर्च, योजनाओं का फीडबैक लेने 4865 युवाओं को गांवों में रखेगी

भोपाल 
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में 33,000 करोड़ रुपए से अधिक की विभिन्न विभागों की योजनाओं को निरंतरता दी गई। इस बड़े वित्तीय आवंटन के माध्यम से प्रदेश में जारी विकास कार्यों और जन-कल्याणकारी योजनाओं को निर्बाध रूप से जारी रखने का मार्ग प्रशस्त हुआ है। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री चैतन्य काश्यप ने जानकारी देते हुए बताया कि राज्य सरकार भूमि स्वामित्व योजना के तहत 46 लाख लोगों की संपत्ति रजिस्ट्री का स्टांप शुल्क खुद वहन करेगी, जिससे सरकार पर करीब 3000 करोड़ रुपए का अतिरिक्त खर्च आएगा।

कैबिनेट ने प्रदेश में योजनाओं के जमीनी फीडबैक के लिए सीएम यंग इंटर्न्स फॉर गुड गवर्नेंस प्रोग्राम शुरू करने का फैसला भी किया है। यह कार्यक्रम तीन साल तक चलेगा। इसके लिए हर विकास खंड से 15 युवाओं का चयन किया जाएगा। चयन प्रक्रिया अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण स्कूल के माध्यम से होगी।

कार्यक्रम तीन साल तक चलेगा

    हर विकासखंड से 15 युवाओं का चयन होगा
    कुल 4865 युवाओं की नियुक्ति होगी
    युवाओं को 10 हजार रुपए मासिक मानदेय मिलेगा

एक साल के अनुबंध पर नियुक्ति होगी इन युवाओं की जिम्मेदारी अपने विकासखंड में संचालित योजनाओं का फीडबैक और जमीनी रिपोर्ट तैयार करना होगी। यह रिपोर्ट सीधे सुशासन एवं नीति विश्लेषण स्कूल के माध्यम से मुख्यमंत्री और संबंधित विभागों तक पहुंचेगी। इस कार्यक्रम पर करीब 170 करोड़ रुपए खर्च होंगे।

भूमि स्वामित्व योजना क्या है

    भूमि स्वामित्व योजना की शुरुआत केंद्रीय पंचायती राज मंत्रालय ने 2020 में की थी।
    ड्रोन सर्वे के जरिए गांवों की जमीन का सीमांकन किया जाता है।
    ग्रामीणों को प्रॉपर्टी कार्ड (स्वामित्व कार्ड) दिए जाते हैं।
    इससे भूमि विवाद कम होते हैं।
    बैंक से लोन लेना आसान होता है।

अनुबंध पर रखे जाएंगे युवा
चयनित युवाओं को 10 हजार रुपए मासिक मानदेय दिया जाएगा और एक साल के अनुबंध पर सेवा में रखा जाएगा। कुल 4865 युवाओं का चयन होगा और इस कार्यक्रम पर तीन साल में करीब 170 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। इन युवाओं की जिम्मेदारी अपने विकासखंड में संचालित योजनाओं की जमीनी स्थिति और फीडबैक की रिपोर्ट तैयार करना होगी। यह रिपोर्ट सीधे सुशासन स्कूल के माध्यम से मुख्यमंत्री और संबंधित विभागों तक पहुंचेगी। इसके लिए डैशबोर्ड और पोर्टल भी विकसित किया जाएगा।

रजिस्ट्री का खर्च उठाएगी सरकार
भूमि स्वामित्व योजना में प्रदेश के करीब 46 लाख ग्रामीण नागरिकों को जमीन का स्वामित्व मिलेगा। इस योजना की शुरुआत केंद्रीय पंचायती राज मंत्रालय ने वर्ष 2020 में की थी। ड्रोन तकनीक के माध्यम से ग्रामीण आबादी की जमीन का सीमांकन कर प्रॉपर्टी कार्ड (कानूनी स्वामित्व कार्ड) दिए जाते हैं, जिससे भूमि विवाद कम होते हैं और बैंक से ऋण लेना भी आसान होता है।

सात विभागों की योजनाएं 2031 तक जारी
कैबिनेट ने ऊर्जा, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, योजना-आर्थिक एवं सांख्यिकी, जनजातीय कार्य और महिला-बाल विकास सहित सात विभागों की योजनाओं को 2031 तक जारी रखने के लिए 33,240 करोड़ रुपए की मंजूरी दी है। इसमें महिला आयोग, बाल संरक्षण आयोग, छात्रवृत्ति योजनाएं, आरडीएसएस, दिव्यांगों के लिए प्रोफेशनल टैक्स में छूट और स्टार्टअप के लिए 600 करोड़ रुपए का प्रावधान शामिल है।

स्वास्थ्य केंद्रों में 51 पदों पर भर्ती
मंत्री काश्यप ने बताया कि मैहर, निमरानी और कैमोर में पीएफआईसी के तहत अस्पतालों के लिए स्टाफ भर्ती की जाएगी। श्रम विभाग के माध्यम से डॉक्टर और अन्य कर्मचारियों सहित कुल 51 पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी। इसके अलावा चितरंगी में व्यवहार न्यायाधीश के पद को भी कैबिनेट ने मंजूरी दी है।

एक जिला-एक उत्पाद को मिलेगा बढ़ावा
राज्य सरकार ने एक जिला-एक उत्पाद योजना के तहत स्थानीय उत्पादों की ब्रांडिंग के लिए 37.50 करोड़ रुपए की डीपीआर तैयार की है। इस योजना में एमएसएमई, उद्योग, कुटीर एवं ग्रामोद्योग विभाग संयुक्त कार्ययोजना के तहत काम करेंगे।                          

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