विदेश

अमेरिकी जांच के दायरे में बांग्लादेशी निर्यात, ट्रेड नियमों पर उठे सवाल

नई दिल्ली
अमेरिका ने बताया था कि वह 16 देशों के व्यापार को लेकर जांच शुरू कर रहा है। इन देशों में भारत और चीन के अलावा बांग्लादेश का नाम भी शामिल है। ढाका की 'द मॉर्निंग स्टार' की एक रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका ने बांग्लादेश में एक जांच शुरू कर दी है ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या उनकी पॉलिसी और प्रोडक्शन के तरीके से अमेरिकी मैन्युफैक्चरिंग को नुकसान हो सकता है।

यूनाइटेड स्टेट्स ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव (यूएसटीआर) के ऑफिस ने यह जांच बुधवार को ट्रेड एक्ट 1974 के तहत शुरू की। यह एक पावरफुल ट्रेड एनफोर्समेंट टूल है जिसका इस्तेमाल अमेरिका द्वारा गलत विदेशी तरीकों को चुनौती देने के लिए किया जाता है। रिपोर्ट में यूएसटीआर के हवाले से कहा गया है कि बांग्लादेश में स्ट्रक्चरल एक्स्ट्रा कैपेसिटी और प्रोडक्शन के सबूत मौजूद हैं, जिसका अमेरिका के साथ लगभग 60 लाख 50 हजार डॉलर का गुड्स व्यापार अधिशेष (ट्रेड सरप्लस) है।

दोनों देशों के बीच यह व्यापार अधिशेष मुख्य रूप से टेक्सटाइल सेक्टर के निर्यात से पैदा होता है, जहां सरकार घरेलू वस्त्र और चमड़ा उत्पादों सहित 43 क्षेत्रों में निर्यात को बढ़ावा देने के लिए नकद प्रोत्साहन प्रदान करती है। यूएसटीआर ने कहा कि बांग्लादेश के सीमेंट उद्योग में सालों में सबसे खराब मंदी के बावजूद काफी अतिरिक्त क्षमता है। 2024 में बांग्लादेश की सीमेंट की राष्ट्रीय खपत घटकर 38 मिलियन टन रह गई, जो कुल क्षमता का 40 फीसदी से भी कम है और अगले साल इसमें और गिरावट आई।

बांग्लादेश गारमेंट मैन्युफैक्चरर्स एंड एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष महमूद हसन खान ने कहा, “जांच की सूची में देश का नाम देखना अच्छा नहीं है।” रिपोर्ट के अनुसार, जिन मामलों की जांच की जाएगी, जैसे उत्पादन क्षमता, बौद्धिक संपदा अधिकार और प्रोत्साहन, उनसे बांग्लादेश पर बहुत ज्यादा असर पड़ने की उम्मीद नहीं है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि बांग्लादेश का उत्पादन अंतरराष्ट्रीय खरीदारों से वर्क ऑर्डर मिलने पर आधारित है, इसलिए ज्यादा उत्पादन मुमकिन नहीं है। इसके अलावा, बांग्लादेश ने पिछले वर्ष अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) की सिफारिशों के अनुरूप अपने श्रम कानूनों में संशोधन किया है और तीन महत्वपूर्ण आईएलओ कन्वेंशनों को भी मंजूरी दी है।

रिपोर्ट के अनुसार, सरकार ने इस वर्ष नवंबर में सबसे कम विकसित देशों (एलडीसी) की श्रेणी से बाहर निकलने की तैयारी के तहत निर्यात प्राप्तियों पर दिए जाने वाले प्रोत्साहनों को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करना भी शुरू कर दिया है।

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