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₹7.5 लाख करोड़ की नई परियोजनाओं के साथ पांचवीं ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी की तैयारी

₹7.5 लाख करोड़ की नई परियोजनाओं के साथ पांचवीं ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी की तैयारी

मुख्यमंत्री योगी की दूरदृष्टि व सुनियोजित कार्ययोजना से यूपी बना निवेशकों की पहली पसंद

रिफॉर्म, परफॉर्म व ट्रांसफॉर्म के मंत्र से बदली प्रदेश की तस्वीर

सिर्फ सुरक्षा ही नहीं, हर मोर्चे पर तैयार की गई निवेश के लिए आदर्श जमीन

लखनऊ
उत्तर प्रदेश ने पिछले 9 वर्षों में जो परिवर्तन देखा है, वह केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक व्यापक आर्थिक और औद्योगिक बदलाव की कहानी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की दूरदृष्टि व सुनियोजित कार्ययोजना के तहत “रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म” के मंत्र ने प्रदेश को निवेश के नक्शे पर नई पहचान दिलाई है। यह योगी सरकार की नियोजित कार्यशैली का नतीजा है कि अब तक चार ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी (जीबीसी) के जरिये लगभग ₹15 लाख करोड़ की परियोजनाएं धरातल पर उतारी जा चुकी हैं, जबकि ₹7.5 लाख करोड़ की नई परियोजनाओं के साथ पांचवीं ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी की तैयारी है।

निवेश व उद्यमिता के मोर्चे पर बुरी तरह पिछड़ रहे उत्तर प्रदेश में वर्ष 2017 में योगी सरकार आने पर स्थिति में सुधार के लिए बिंदुवार योजना तैयार की गई। सबसे पहले योजनाबद्ध तरीके से सिस्टम में सुधार (रिफॉर्म) किया गया, फिर परफॉर्मेंस के जरिए नीतियों को जमीन पर उतारा गया और अंततः ट्रांसफॉर्म के माध्यम से प्रदेश की छवि बदल गई। हर क्षेत्र के लिए स्पष्ट रोडमैप तैयार किया गया, निवेश प्रक्रिया को पारदर्शी और तेज बनाया गया। निवेश व उद्योग के रास्ते में आने वाली बाधाओं को पहचान कर ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ के तहत 13 अधिनियमों में 99% छोटे आपराधिक प्रावधान समाप्त कर कारोबार को आसान किया गया।

प्रदेश में निवेश के अनुकूल माहौल तैयार करना केवल कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं रहा, बल्कि एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट, लॉजिस्टिक्स नेटवर्क जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर का तेजी से विस्तार कर निवेश के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचा तैयार किया गया। उद्योगों के लिए प्लग-एंड-प्ले सुविधाएं और डि-रेगुलेशन सुधार लागू किए गए। इसी का परिणाम है कि योगी सरकार के अस्तित्व में आने के बाद यूपी को ₹50 लाख करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए। 

योगी सरकार की नीति प्रदेश में निवेश को प्रोत्साहन देने के लिए सेक्टरवार विशेष औद्योगिक क्षेत्रों का विकास करना भी रही। इसके तहत राज्य में उद्योग विशेष के लिए क्लस्टर विकसित किए जा रहे हैं। फिल्म सिटी, टॉय पार्क, लॉजिस्टिक हब (यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र), फार्मा पार्क (झांसी-ललितपुर) मेगा टेक्सटाइल पार्क (लखनऊ-हरदोई), परफ्यूम पार्क (कन्नौज), प्लास्टिक, गारमेंट और लेदर क्लस्टर (गोरखपुर, कानपुर, हरदोई) क्षेत्र विशेष के निवेश को आकर्षित करने का सशक्त माध्यम बन रहे हैं। 

निवेश का ड्रीम डेस्टिनेशन बनकर उत्तर प्रदेश 1 ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी बनने के लक्ष्य की ओर तेजी से आगे बढ़ रहा है। राज्य सरकार का स्पष्ट फोकस हाईटेक सेक्टर जैसे एआई, डेटा सेंटर, इलेक्ट्रॉनिक्स और उन्नत विनिर्माण पर है, जहां निवेश के साथ-साथ युवाओं के लिए नए अवसर भी तैयार हो रहे हैं। साथ ही, एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क जैसे मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर के जरिए निवेश को गति दी जा रही है। यही वजह है कि उत्तर प्रदेश की कहानी अब महज सुधार तक सीमित नहीं, बल्कि एक व्यापक परिवर्तन की मिसाल बन चुकी है, जहां “रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म” का मंत्र प्रदेश को सुरक्षित, सक्षम और निवेश के लिए सबसे उपयुक्त गंतव्य में बदल चुका है।

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