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स्वास्थ्य

वजन घटाना होगा अब सस्ता! 70% सस्ते हो रहे वेट लॉस इंजेक्शन, जानें वजह

नई दिल्ली

भारत में वेगोवी, मौनजारो और ओजेम्पिक जैसी दवाएं वेट लॉस के लिए इस्तेमाल की जा रही थीं. डायबिटीज मैनेज करने वाली इन दवाओं की मासिक कीमत आम आदमी की पहुंच से काफी दूर होती थी लेकिन अब 21 मार्च से ये दवाएं सस्ती हो रही हैं. दरअसल, दुनिया की मशहूर वेट लॉस ड्रग 'सेमाग्लूटाइड' (Semaglutide) का पेटेंट 20 मार्च को खत्म हो रहा है. इसका सीधा मतलब यह है कि अब तक जिस दवा पर चुनिंदा विदेशी कंपनियों का कब्जा था, पेटेंट खत्म होने के बाद अब अब भारत की दिग्गज फार्मा कंपनियां उनके जेनेरिक वर्जन बाजार में उतार सकेंगी. शुरुआती रिपोर्ट के मुताबिक कीमतें करीब 70 फीसदी तक गिर सकती हैं। 

 5 हजार से कम होंगी कीमतें
भारत में अभी इन वेट लॉस इंजेक्शंस का मासिक खर्च 9,000 रुपये से लेकर 28,000 रुपये तक होता है. लेकिन 21 मार्च से शुरू हो रहे 'पेटेंट क्लिफ' (पेटेंट खत्म होना) के बाद ये कीमतें 30 या 50 नहीं, बल्कि सीधे 70 फीसदी तक कम हो सकती हैं। 

एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाले कुछ समय में यह खर्च घटकर महज 3,000 से 4,000 रुपये प्रति महीना रह जाएगा. जेनेरिक दवाएं इसलिए सस्ती होती हैं क्योंकि कंपनियों को रिसर्च पर अरबों डॉलर खर्च नहीं करने पड़ते, वे सीधे उसी फार्मूले पर दवा तैयार करती हैं जिसकी प्रभावशीलता पहले ही साबित हो चुकी है। 

54 से ज्यादा कंपनियां बाजार में उतारेंगी दवा
सेमाग्लूटाइड वही साल्ट है जो दुनिया भर में 'ओजेंपिक' और 'वेगोवी' जैसे ब्रांड्स के नाम से मशहूर है. अब तक इसके पेटेंट की वजह से मोनोपॉली बनी हुई थी लेकिन अब भारत की करीब 54 कंपनियां अपनी जेनेरिक वर्जन लाने के लिए तैयार हैं। 

रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत की बड़ी दवा कंपनियां जैसे Sun Pharma, Dr Reddy’s, Lupin, Ajanta, Zydus Lifesciences, Natco आदि जेनेरिक सेमाग्लूटाइड इंजेक्शन के लिए रेगुलेटरी तैयारियां काफी आगे बढ़ा चुकी हैं। 

इंडस्ट्री अनुमान कहता है कि इतने अधिक ब्रांड मार्केट में आने से न केवल कीमतों पर दबाव बढ़ेगा, बल्कि डोज, पेन डिवाइस और सर्विस मॉडल के स्तर पर भी कंपनियों के बीच कॉम्पिटिशन दिख सकता है। 

शॉर्टकट ना समझें 
इंडियन एंडोक्राइनोलॉजिस्ट और ओबेसिटी एक्सपर्ट ये इंजेक्शन लॉन्च होने के बाद से ही चेतावनी दे रहे हैं कि GLP-1 ड्रग्स को सोशल मीडिया ट्रेंड या जल्दी वजन घटाने का शॉर्टकट मानना खतरनाक हो सकता है. दिल्ली और मुंबई के ओबेसिटी एक्सपर्ट और डॉक्टर्स ने इंटरव्यू में साफ कहा है कि ये इंजेक्शन सिर्फ उन मरीजों के लिए हैं जो क्लिनिकली मोटापे से ग्रस्त हैं यानी BMI, कॉमॉर्बिडिटीज और मेडिकल हिस्ट्री के हिसाब से डॉक्यूमेंटेड मोटापे से जूझ रहे हैं न कि उन लोगों के लिए जिनका उद्देश्य सिर्फ कुछ किलो वजन घटाना है। 

भले ही ये इंजेक्शन सस्ते और आसानी से उपलब्ध होने जा रहे हैं लेकिन डॉक्टर्स ने कड़ी चेतावनी भी दी है. यह कोई शॉर्टकट नहीं है जिसे कोई भी अपनी मर्जी से लगा ले. सेमाग्लूटाइड एक पावरफुल मेटाबॉलिक दवा है जो शरीर के हार्मोन्स, ब्लड शुगर और पाचन तंत्र पर सीधा असर डालती है. इसे केवल क्रॉनिक ओबेसिटी (अत्यधिक मोटापा) या गंभीर डायबिटीज के मरीजों को ही इस्तेमाल करना चाहिए। 

डॉक्टर्स ने दी ये चेतावनी
डायबिटीज के क्षेत्र में जाने-माने नाम डॉ. वी. मोहन ने 'पेटेंट क्लिफ' के बारे में इंटरव्यू के दौरान कहा, 'अब तक इसकी कीमत एक बड़ी बाधा थी, लेकिन मार्च 2026 के बाद जब 40 से ज्यादा कंपनियां बाजार में उतरेंगी, तो यह आम आदमी की पहुंच में होगा. लेकिन इनसे 'स्टोमक पैरालिसिस' जैसे दुर्लभ साइड-इफेक्ट्स भी हो सकते हैं जिससे सावधान रहने की जरूरत है। 

पद्म भूषण से सम्मानित डॉ. अंबरीश मिथल ने आजतक हेल्थ समिट में कहा था, 'सेमाग्लूटाइड' जैसे GLP-1 ड्रग्स केवल शुगर कंट्रोल नहीं करते, बल्कि शरीर का 15 से 18% वजन कम करने में मदद कर सकते हैं लेकिन यह कोई 'मैजिक पिल' नहीं है. इसे बिना डॉक्टर की सलाह के लेना खतरनाक हो सकता है. साथ ही, इसके साथ प्रोटीन डाइट और एक्सरसाइज भी जरूरी है। 

एंडोक्रिनोलॉजिस्ट और महाराष्ट्र टास्क फोर्स के मेंबर डॉ. शशांक जोशी ने इन दवाओं के बारे में कहा था, 'ये दवाएं केवल वजन नहीं घटातीं बल्कि लिवर और पैंक्रियाज में जमा चर्बी को भी कम करती हैं, जिससे डायबिटीज को 'रिमिसन' (खत्म होने की स्थिति) में ले जाना संभव हो सकता है लेकिन बिना एक्सपर्ट की सलाह के बिना इनका इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। 

बिना डॉक्टरी सलाह के न लें दवा
हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इन दवाओं को शुरू करने से पहले शरीर के कई टेस्ट जरूरी हैं. इसे केवल एंडोक्रिनोलॉजिस्ट या इंटरनल मेडिसिन स्पेशलिस्ट की देखरेख में ही लिया जाना चाहिए. साथ ही, यह ध्यान रखना जरूरी है कि केवल सेमाग्लूटाइड का पेटेंट खत्म हुआ है. अन्य एडवांस ड्रग्स जैसे 'टिर्जेपेटाइड' (मौनजारो) के दाम फिलहाल कम नहीं होंगे क्योंकि उनका पेटेंट अभी प्रभावी है। 

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