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मध्यप्रदेश

आउटसोर्स कर्मचारियों को अब सीधे खाते में मिलेगा वेतन, सरकार लागू करेगी नई व्यवस्था

भोपाल 

मध्यप्रदेश में आउटसोर्स एम्प्लॉइमेंट सिस्टम बदलने जा रहा है। जिसका सीधा फायदा लाखों कर्मचारियों को मिलेगा। मध्यप्रदेश के सभी सरकारी विभागों में आउटसोर्स एम्प्लॉइज के अपॉइंटमेंट और उनके कामकाज की व्यवस्था बदलेगी। 1 अप्रैल 2026 से पूरे आउटसोर्सिंग सिस्टम के संचालन की नई गाइडलाइन लागू हो जाएगी। आउटसोर्स की पूरी प्रोसेस डिजिटल की जाएगी। एम्प्लॉइज के अकाउंट में  सीधे सैलरी आएगी।

मध्यप्रदेश में ये कंपनियां होंगी ब्लैकलिस्ट
दरअसल, मध्यप्रदेश सरकार उन सभी कंपनियों को ब्लैकलिस्ट करेगी, जो एम्प्लॉइमेंट के लिए एंट्री फीस या सिक्योरिटी डिपॉजिट वसूलती है। बिचौलिया कंपनियों द्वारा किए जा रहे एम्प्लॉइज के शोषण पर रोक लगेगी। वित्त विभाग ने सभी विभाग के अधिकारियों को आउटसोर्सिंग एजेंसी मैनेजमेंट सिस्टम लागू करने को कहा है।

1 अप्रैल से लागू होंगी नई गाइडलाइन आगामी 1 अप्रैल से प्रदेश के सभी सरकारी विभागों में आउटसोर्स नियुक्तियों और उनके कामकाज को लेकर नई गाइडलाइन प्रभावी हो जाएगी। इस पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए इसे डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ा जा रहा है। सरकार के इस फैसले से न केवल वेतन मिलने में देरी की समस्या खत्म होगी, बल्कि भर्ती प्रक्रिया में होने वाले भ्रष्टाचार पर भी लगाम लगेगी।

4 कैटेगरी में बंटेंगे एम्प्लॉइज, एंट्री फीस पर रोक
मध्यप्रदेश सरकार ने पहली बार एम्प्लॉइज को चार कैटेगरी में बांट दिया है। इससे ये होगा कि कोई भी एम्प्लॉइज ग्रे जोन में नहीं रहेगा। इन चार कैटेगरी में स्थायी, अस्थायी, संविदा और आउटसोर्स शामिल हैं। भर्ती में किसी भी तरह की एंट्री फीस पर रोक रहेगी। अवैध वूसली पर कंपनी को ब्लैकलिस्ट किया जाएगा।

एम्प्लॉइज का EPF, ESIC लेबर कानून से कटेगा
नए सिस्टम के तहत प्राइवेट एजेंसियां के पास सैलरी का अधिकार नहीं रहेगा। एम्प्लॉइज की सैलरी सीधे उनके बैंक अकाउंट में ट्रांसफर की जाएगी। मिनिमम सैलरी से एक रुपया भी कम नहीं दिया जाएगा। एम्प्लॉइज के ईपीएफ, ईएसआईसी और लेबर कानूनों के तहत पूरा प्रोसेस की जाएगी।

बिचौलिया कंपनियों से राहत, नहीं होगा शोषण

    सीधा बैंक खाते में वेतन: नई व्यवस्था में वेतन निजी एजेंसियों के माध्यम से नहीं होगा। वेतन सीधे कर्मचारी के बैंक खातों में ट्रांसफर होगा। बिचौलियों और एजेंसियों द्वारा वेतन में कटौती या कमीशनखोरी नहीं की जा सकेगी।

    न्यूनतम वेतन की गारंटी: न्यूनतम वेतन से एक रुपया भी कम नहीं दिया जाएगा। ईपीएफ, ईएसआई और श्रम कानूनों का पालन अनिवार्य होगा।

    स्पष्ट श्रेणी और पहचान: सरकार ने पहली बार कर्मचारियों को स्पष्ट श्रेणियों (स्थायी, अस्थायी, संविदा, आउटसोर्स आदि) में बांट दिया है। इससे कोई भी कर्मचारी 'ग्रे जोन'में नहीं रहेगा।

    शोषण से मुक्ति: भर्ती के नाम पर किसी भी तरह की एंट्री फीस या अवैध वसूली पर प्रतिबंध लगेगा। उल्लंघन पर कार्रवाई होगी।

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