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छत्तीसगढ़

दण्डकारण्य में 25 माओवादियों ने किया सरेंडर, CM साय बोले— यह विश्वास की जीत

रायपुर.

छत्तीसगढ़ के इतिहास में अहम मोड़ दर्ज हो गया है. वर्षों से हिंसा, डर और बंदूक के साये में जी रहे दण्डकारण्य क्षेत्र ने अब शांति और भरोसे की ओर कदम बढ़ाया है. नक्सल उन्मूलन की दिशा में बड़ी सफलता तब सामने आई, जब 25 माओवादी कैडरों ने हिंसा का रास्ता छोड़ते हुए मुख्यधारा में वापसी की. मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इसे न केवल आत्मसमर्पण, बल्कि “विश्वास की जीत” बताया है.

25 माओवादी कैडरों की मुख्यधारा में वापसी
दण्डकारण्य क्षेत्र में चल रहे “पूना मारगेम – पुनर्वास से पुनर्जीवन” अभियान के तहत 25 माओवादी कैडरों ने आत्मसमर्पण किया है. इनमें 12 महिलाएं भी शामिल हैं. ये सभी माओवादी लंबे समय से जंगलों में सक्रिय थे और अलग‑अलग हिंसक गतिविधियों में शामिल रहे हैं. आत्मसमर्पण के साथ ही इन कैडरों ने बंदूक छोड़कर संविधान और लोकतांत्रिक व्यवस्था पर भरोसा जताया है.

सीएम विष्णुदेव साय ने बताया ऐतिहासिक दिन
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि आज का दिन दण्डकारण्य और पूरे छत्तीसगढ़ के लिए ऐतिहासिक है. उन्होंने कहा कि वर्षों से चली आ रही हिंसा और डर की विचारधारा का आज अंत होता दिख रहा है. यह लोकतंत्र, जन‑विश्वास और सरकार की नीति की जीत है. मुख्यमंत्री ने इसे प्रदेश के लिए नई शुरुआत बताया.

₹1.47 करोड़ के इनामी नक्सलियों ने किया सरेंडर
मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि आत्मसमर्पण करने वाले 25 माओवादी कैडरों पर कुल 1 करोड़ 47 लाख रुपये का इनाम घोषित था. इनका मुख्यधारा में लौटना इस बात का संकेत है कि अब भटके हुए लोगों का भरोसा सरकार की पुनर्वास नीति और लोकतांत्रिक व्यवस्था पर बढ़ रहा है.

93 हथियार और ₹14 करोड़ से ज्यादा की बरामदगी
सुरक्षा बलों की प्रभावी कार्रवाई और सरकार की समन्वित रणनीति के चलते माओवादी नेटवर्क को बड़ा झटका लगा है. इस कार्रवाई के दौरान 93 घातक हथियारों के साथ कुल ₹14.06 करोड़ की बरामदगी हुई है. यह बरामदगी साफ तौर पर दिखाती है कि नक्सली तंत्र अब कमजोर पड़ चुका है.

""दण्डकारण्य क्षेत्र आज वामपंथी उग्रवाद के अंत के ऐतिहासिक और निर्णायक क्षण का साक्षी बन रहा है।
“पूना मारगेम – पुनर्वास से पुनर्जीवन” पहल के तहत आज 25 माओवादी कैडरों (12 महिला सहित) ने हिंसा का मार्ग छोड़कर मुख्यधारा में वापसी की। इन पर कुल ₹1.47 करोड़ का इनाम घोषित था।
माओवादी…""
– Vishnu Deo Sai (@vishnudsai)

दण्डकारण्य में लौट रहा शांति का भरोसा
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यह घटना केवल आत्मसमर्पण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भरोसे और शांति की वापसी है. दण्डकारण्य क्षेत्र अब धीरे‑धीरे सामान्य जीवन, स्थिरता और विकास की ओर बढ़ रहा है. यहां के लोग हिंसा नहीं, बल्कि सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन की चाह रख रहे हैं.

इतिहास में याद रखा जाएगा 31 मार्च 2026
मुख्यमंत्री ने कहा कि 31 मार्च 2026 का दिन छत्तीसगढ़ के इतिहास में उस तारीख के रूप में याद रखा जाएगा, जब नक्सलवाद के अंत की दिशा में निर्णायक परिणाम सामने आए. यह वह दिन है, जब प्रदेश ने हिंसा के अंधेरे से निकलकर एक नए और शांतिपूर्ण युग की ओर कदम बढ़ाया.

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