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विदेश

ईरान की सीमा में घुसकर अमेरिका का बड़ा रेस्क्यू ऑपरेशन, मौत के जबड़े से सुरक्षित निकाला अपना जांबाज पायलट

 वॉशिंगटन
अमेरिका को उस समय तब बड़ी सफलता मिली, जब उसने ईरान में फाइटर जेट से जाने बचाने को कूदे अपने एक पायलट को सफलतापूर्वक बचा लिया। यह पायलट अमेरिकी फाइटर जेट से तब नीचे कूद गया था, जब ईरान ने युद्ध के बीच उसके जेट पर हमला कर दिया था। इससे पहले, अमेरिका एक और पायलट को बचा चुका है। अमेरिकी सेना ने कई घंटों के सर्च ऑपरेशन और घातक हथियारों व दर्जनों विमानों के इस्तेमाल के बाद अपने पायलट को सकुशल बचाया। इस दौरान, ईरानी सैनिक और आम लोग भी उस पायलट की खोज में लगे हुए थे। यहां तक कि ईरान ने उसे पकड़ने पर इनाम देने की भी घोषणा की थी। बचाने के समय अमेरिकी सेना पर हमले भी किए गए। अमेरिकी पायलट ईरान में लगभग दो दिनों तक फंसा रहा और उस दौरान उसके पास सुरक्षा के लिए दी जाने वाली एक पिस्टल और अन्य कुछ चीजें ही थीं। अमेरिकी सेना ने उसे उसकी लोकेशन के जरिए खोज निकाला।
पहाड़ी इलाके में ऊंची जगह छिप गया था पायलट
अमेरिकी पायलट लगभग 48 घंटे तक ईरान के ऊबड़-खाबड़ पहाड़ों में छिपा रहा। इस दौरान उसके पास पिस्टल, एक बीकन ही थी। उसके पास सिर्फ एक उम्मीद थी कि शायद अमेरिकी सेना का बचाव दल उसके पास पहुंच जाएगा और उसे बचा लेगा। न्यूयॉर्क टाइम्स ने अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया, ''वह पायलट दुश्मन के इलाके में लगभग दो दिनों तक जीवित रहा, और उन ईरानी सेनाओं से बचता रहा जो सक्रिय रूप से उसकी तलाश कर रही थीं।'' फाइटर जेट से इजेक्ट करने के बाद पायलट एक ऐसी जगह गिरा, जहां पर पहाड़ी इलाका था और वह ऊंची जगह जाकर छिप गया। अमेरिकी सेनाओं के संपर्क में रहने और बचाव अभियान को दिशा देने में मदद करने के लिए उसने एक डिस्ट्रेस बीकन, जीपीएस ट्रैकर आदि का इस्तेमाल किया।

सीआईए ने बताई लोकेशन, 24 घंटे रही नजर
वहीं, बीबीसी के अनुसार, अमेरिका द्वारा किए गए बचाव अभियान के सटीक हालात अभी भी स्पष्ट नहीं हैं, लेकिन इस अभियान से परिचित एक व्यक्ति ने इसे दक्षिणी ईरान में चलाया गया एक विशाल लड़ाकू खोज और बचाव अभियान बताया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बताया कि पायलट की लोकेशन पर अमेरिका के वरिष्ठ अधिकारी दिन-रात 24 घंटे नजर रख रहे थे और लगातार बचाव अभियान की योजना बना रहे थे। एक वरिष्ठ अधिकारी ने मीडिया संस्थान सीबीएस को यह भी बताया कि इस बचाव अभियान में सीआईए ने एक अहम भूमिका निभाई। उसने पहाड़ की एक दरार में छिपे उस पायलट को ट्रैक किया और उसकी सटीक लोकेशन पेंटागन को दी।
ट्रंप ने किया था पायलट को बचाने का ऐलान

इस सर्च ऑपरेशन की अहमियत इसी बात से समझी जा सकती है कि अमेरिका ने इसे उस देश में अंजाम दिया, जिससे वह अभी युद्ध में है। इसी वजह से खुद ट्रंप की इस अभियान पर नजर थी। जब पायलट को बचा लिया गया तो उन्होंने ही इसका ऐलान भी किया। ट्रंप ने अपने ट्रुथ सोशल पर लिखा, ''हमने उसे बचा लिया! मेरे प्यारे अमेरिकी साथियों, पिछले कुछ घंटों में, अमेरिकी सेना ने अमेरिकी इतिहास के सबसे साहसी खोज और बचाव अभियानों में से एक को सफलतापूर्वक अंजाम दिया है। यह अभियान हमारे एक बेहतरीन क्रू सदस्य अधिकारी के लिए था, जो एक बहुत सम्मानित कर्नल भी हैं, और मुझे आपको यह बताते हुए बेहद खुशी हो रही है कि अब वह पूरी तरह से सुरक्षित और स्वस्थ हैं। यह बहादुर योद्धा ईरान के खतरनाक पहाड़ों में दुश्मन की सीमा के पीछे फंसा हुआ था, और हमारे दुश्मन उसका लगातार पीछा कर रहे थे, जो हर घंटे उसके और करीब आते जा रहे थे। लेकिन वह कभी भी सचमुच अकेला नहीं था, क्योंकि उसके कमांडर-इन-चीफ, युद्ध सचिव, जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन और उसके साथी योद्धा दिन-रात 24 घंटे उसकी लोकेशन पर नजर रख रहे थे, और उसे बचाने के लिए पूरी लगन से योजना बना रहे थे।''

पायलट को बचाने के लिए भेजे गए दर्जनों विमान
अमेरिकी सेना ने पायलट को वापस लाने के लिए दर्जनों विमान भेजे, जो दुनिया के सबसे घातक हथियारों से लैस थे। ट्रंप ने कहा कि उसे कुछ चोटें आई हैं, लेकिन वह जल्द ही पूरी तरह ठीक हो जाएगा। यह चमत्कारिक खोज और बचाव अभियान कल एक और बहादुर पायलट के सफल बचाव के अतिरिक्त है, जिसकी हमने कल पुष्टि नहीं की थी, क्योंकि हम अपने दूसरे बचाव अभियान को खतरे में नहीं डालना चाहते थे। सैन्य इतिहास में यह पहली बार हुआ है कि दो अमेरिकी पायलटों को दुश्मन के इलाके के काफी अंदर से, अलग-अलग अभियानों में बचाया गया है। हम कभी भी किसी अमेरिकी योद्धा को पीछे नहीं छोड़ेंगे। यह तथ्य कि हम इन दोनों अभियानों को बिना किसी एक भी अमेरिकी सैनिक के मारे जाने या घायल हुए बिना सफलतापूर्वक पूरा कर पाए, यह एक बार फिर साबित करता है कि हमने ईरान के आसमान पर ज़बरदस्त हवाई वर्चस्व और श्रेष्ठता हासिल कर ली है। यह एक ऐसा क्षण है जिस पर सभी अमेरिकियों, चाहे वे रिपब्लिकन हों, डेमोक्रेट हों या कोई और, को गर्व होना चाहिए और उन्हें एकजुट होकर इसका समर्थन करना चाहिए। हमारे पास सचमुच दुनिया के इतिहास की सबसे बेहतरीन, सबसे पेशेवर और सबसे घातक सेना है।''

ईरान ने कैसे मार गिराया फाइटर जेट
दो सदस्यों को ले जा रहा एफ-15E जेट दक्षिणी ईरान के ऊपर से उड़ रहा था, तभी शुक्रवार सुबह (स्थानीय समय के अनुसार) उसे मार गिराया गया। तेहरान के अनुसार, इस विमान को ईरान के नए और आधुनिक हवाई रक्षा तंत्र द्वारा मार गिराया गया। ईरान ने कहा कि अमेरिका के इस दावे के बावजूद कि यह तंत्र नष्ट हो चुका है, यह अब भी पूरी तरह से प्रभावी है। इस युद्ध के दौरान, और 2003 में इराक पर हुए आक्रमण के बाद से, यह पहला मौका था जब अमेरिका का कोई विमान मार गिराया गया हो। वॉशिंगटन ने तुरंत एक बचाव अभियान शुरू किया। हालांकि, अमेरिकी सेना ने विमान दुर्घटना के कुछ घंटों बाद ही चालक दल के एक सदस्य को बचा लिया था, लेकिन दूसरे पायलट, जिसके कर्नल रैंक का वेपन सिस्टम ऑफिसर होने का अनुमान है, का लंबे समय तक पता नहीं चल सका।
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