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मध्यप्रदेश

मध्यप्रदेश में सशक्त बन रही पंचायती राज संस्थाएं

भोपाल 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के प्रयासों से मध्यप्रदेश की पंचायतों को केन्द्र सरकार का भरपूर सहयोग मिल रहा है। वे निरंतर सशक्त बन रही हैं। केन्द्र सरकार कीयोजनाओं का लाभ उठाते हुए प्रदेश की पंयायतों विकास की गतविधियों को बेहतर क्रियान्वित कर रही हैं। मध्यप्रदेश ने राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान और पंचायतों का प्रोत्साहन देने की योजना में अच्छा प्रदर्शन किया है।

पंचायतों को प्रोत्साहन देने की योजना का उद्देश्य पंचायतों के बीच प्रतिस्पर्धात्मक भावना को प्रोत्साहित करना है। इसके तहत सर्वोत्तम प्रदर्शन करने वाली पंचायतों को उनके अच्छे विकासात्मक कार्यों के लिए वित्तीय प्रोत्साहन सहित पुरस्कार दिए जा रहे हैं। भोपाल, नरसिंहपुर, सागर, छतरपुर, सीधी, पूर्वी निमाड़, हरदा, उज्जैन, जबलपुर, इंदौर, नीमच, गुना, ग्वालियर और झाबुआ पंयायतों ने प्रोत्साहन योजना में अच्छा प्रदर्शन किया है।

ग्राम पंचायत विकास योजना और परियोजना क्रियान्वयन एक सतत प्रक्रिया है। प्रदेश की ग्राम पंचायतों में केंद्रीय वित्त आयोग के अनुदानों का उपयोग करते हुए कुल 16,773 परियोजना कार्य पूरे किए गए हैं। राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान का प्राथमिक उद्देश्य निर्वाचित प्रतिनिधियों और उनके पदाधिकारियों की क्षमता निर्माण कर पंचायती राज संस्थाओं को मजबूत बनाना, ग्राम पंचायत भवन और कम्प्यूटरीकरण जैसी अधोसंरचनात्मक सहायता प्रदान करना है।

ई-पंचायतों पर मिशन मोड परियोजना (एमएमपी-ईपंचायत) में पंचायतों के डिजिटलीकरण की दिशा में ई-गवर्नेंस परियोजनाओं को वित्तपोषित किया जाता है। इससे पीआरआई के कामकाज में कार्यदक्षता, जवाबदेही और पारदर्शिता आई है।

वर्तमान में पंद्रहवें वित्त आयोग (एफएफसी) के तहत, राज्यों के माध्यम से पंचायती राज संस्थाओं को केन्द्रीय वित्त आयोग की हस्तांतरित निधि आवंटित की जाती है। आयोग के अनुदान के दो घटक हैं—टाइड और अनटाइड। अनटाईड अनुदान कुल अनुदान का 40% है। इसका उपयोग वेतन या अन्य स्थापना व्यय को छोड़कर संविधान की ग्यारहवीं अनुसूची में निहित 29 विषयों में स्थान-विशिष्ट की जरूरतों के लिए किया जा सकता है। टाइड अनुदान कुल अनुदान का 60% है। इसका उपयोग बुनियादी सेवाएं प्रदान करने के लिए किया जा सकता है जैसे स्वच्छता और खुले में शौच से मुक्ति, घरेलू कचरे का प्रबंधन और उपचार, मल और गाद प्रबंधन, पेयजल की आपूर्ति, वर्षा जल संचयन जैसे कार्य शामिल है। यदि किसी स्थानीय निकाय ने एक श्रेणी की जरूरतों को पूरी तरह से पूरा कर दिया है, तो वह अन्य श्रेणी की धनराशि का उपयोग कर सकता है।

उच्च स्तरीय प्रशिक्षण

प्रदेश में पीआरआई के निर्वाचित प्रतिनिधियों और उनके पदाधिकारियों को मिलाकर 9 लाख पदाधारियों को भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम), भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), ग्रामीण प्रबंधन संस्थान आनंद जैसे उत्कृष्टता संस्थानों के सहयोग से नेतृत्व/प्रबंधन विकास कार्यक्रम में प्रशिक्षण दिया गया है। मुख्य उद्देश्य संचार, निर्णय लेने, वित्तीय प्रबंधन और टकराव समाधान सहित आवश्यक नेतृत्व कौशल को निखारना है। वर्तमान में पंचायती राज संस्थाओं की क्षमता निर्माण पर विशेष जोर दिया जा रहा है ताकि वे स्वयं के राजस्व स्रोतों को जुटा सकें। अब तक प्रदेश के 3,275 प्रतिभागियों को ओएसआर मॉड्यूल का प्रशिक्षण दिया जा चुका है।

ई-गवर्नेंस

पंचायतों में ई-गवर्नेंस को मजबूत बनाने और बढ़ावा देने के लिए, डिजिटल इंडिया पहल के तहत, स्थानीय ग्रामीण शासन में पारदर्शिता, जवाबदेही और कार्यदक्षता लाने के लिए विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म और ऐप विकसित किए हैं। सिंगल साइन ऑन डिजिटल प्लेटफॉर्म, ईग्रामस्वराज ऐप पंचायत स्तर पर योजना, लेखांकन, निगरानी और ऑनलाइन भुगतान की सुविधा प्रदान करने के लिए बनाया गया है। इस ऐप को सार्वजनिक निधि प्रबंधन प्रणाली, सरकारी ई-मार्केटप्लेस और ऑडिट ऑनलाइन ऐप के साथ एकीकृत किया गया है ताकि भुगतान में कोई परेशानी न हो, खरीद प्रक्रिया पारदर्शी हो और पंचायतों के खातों की लेखापरीक्षा की जा सके। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान मध्यप्रदेश में 23,011 ग्राम पंचायतों में से 22,978 ग्राम पंचायतों (99.85%) ने अपने ग्राम पंचायत विकास योजनाओं (जीपीडीपी) को ईग्रामस्वराज पर अपलोड किया है और 21,950 ग्राम पंचायतों (95.5%) ने ईग्रामस्वराज-पीएफएमएस इंटरफेस के माध्यम से विक्रेताओं को 2156.10 करोड़ रुपये हस्तांतरित किए हैं।

 

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