मध्यप्रदेश

ग्वालियर-चंबल संभाग में जन-जन का अभियान बना “जल गंगा संवर्धन अभियान”

भोपाल 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की पहल पर संचालित “जल गंगा संवर्धन अभियान” ग्वालियर–चंबल संभाग में जन-आंदोलन का रूप लेता जा रहा है। इस अभियान के तहत जहां एक ओर वर्षों पुरानी जल संरचनाओं को पुनर्जीवित किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर नई जल संरचनाओं का निर्माण कर जल संरक्षण की दिशा में ठोस कार्य किए जा रहे हैं। जनभागीदारी, श्रमदान और जागरूकता के माध्यम से यह अभियान जल संरक्षण के साथ-साथ पर्यटन संवर्धन का भी माध्यम बन रहा है।

ग्वालियर में ऐतिहासिक बावड़ियां बनीं जल संरक्षण का केंद्र

ग्वालियर शहर में स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत तीन ऐतिहासिक बावड़ियों का पुनर्जीवन किया गया है। इन बावड़ियों में प्रतिवर्ष लगभग 50 लाख लीटर पानी सहेजने की क्षमता विकसित की गई है। सुरक्षा के लिए लोहे के जाल लगाए गए हैं तथा आरओ प्लांट की व्यवस्था भी की गई है, जिससे नागरिकों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध हो सकेगा। ग्वालियर दुर्ग स्थित प्राचीन सूरज कुण्ड को स्वच्छ एवं आकर्षक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जा रहा है। साथ ही जलालपुर कुण्ड और केआरजी कॉलेज की बावड़ी की साफ-सफाई भी कराई जा रही है।

ग्रामीण क्षेत्रों में भी अभियान ने गति पकड़ी है। जिले में कुल 2300 जल संरचनाओं के निर्माण का लक्ष्य है, जिनसे लगभग 31.50 लाख घन मीटर जल संरक्षित होगा। अब तक 71 खेत तालाब और 249 कुओं के रिचार्ज कार्य पूर्ण हो चुके हैं।

शिवपुरी में 587 ग्राम पंचायतों में जनसहभागिता से कार्य

शिवपुरी जिले की सभी ग्राम पंचायतों में तालाबों की सफाई, गहरीकरण, गाद निकासी और पेयजल व्यवस्था जैसे कार्य जनसहयोग से किए जा रहे हैं। विभिन्न ग्राम पंचायतों में अभियान की शुरुआत के साथ ही ग्रामीण स्तर पर जल संरक्षण के प्रति जागरूकता तेजी से बढ़ी है।

गुना में खेत तालाब और रिचार्ज कार्यों में उल्लेखनीय प्रगति

गुना जिले में 1547 खेत तालाबों के निर्माण का लक्ष्य रखा गया है, जिनमें से 547 पूर्ण हो चुके हैं। डगवेल रिचार्ज के 2206 कार्यों में से 1889 कार्य पूरे किए जा चुके हैं। इसके अलावा 1007 नई जल संरचनाएं बनाई जा रही हैं, जिनमें से 193 पूर्ण हो चुकी हैं। जिले में 57 सार्वजनिक प्याऊ भी शुरू की गई हैं।

अशोकनगर में श्रमदान से दिया जल संरक्षण का संदेश

अशोकनगर जिले में प्राचीन बावड़ियों, तालाबों और धार्मिक स्थलों पर श्रमदान कर जल संरक्षण का संदेश दिया जा रहा है। तुलसी सरोवर सहित कई जल स्रोतों का सौंदर्यीकरण किया जा रहा है। गांव-गांव में कलश यात्रा, पूजन और श्रमदान के माध्यम से जनजागरण किया जा रहा है।

दतिया में सीवरेज प्रबंधन से तालाब संरक्षण

दतिया जिले में सीतासागर तालाब में गंदे पानी के प्रवाह को रोकने के लिए नालों को सीवर पंपिंग स्टेशन से जोड़ा गया है। अब यह पानी एसटीपी प्लांट में शोधन के बाद पुनः उपयोग में लाया जा रहा है। आंगनबाड़ियों में रूफटॉप रेन वाटर हार्वेस्टिंग मॉडल भी विकसित किए गए हैं।

मुरैना और भिण्ड में लक्ष्य आधारित कार्यों की तेज प्रगति

मुरैना जिले में 1000 खेत तालाब निर्माण का लक्ष्य है, जिनमें से 200 पूर्ण हो चुके हैं। साथ ही 2382 अन्य जल संरचनाओं में से 250 कार्य पूरे किए जा चुके हैं।

भिण्ड जिले में गौरी सरोवर सहित कई ऐतिहासिक जल स्रोतों की सफाई, गाद हटाने और संरक्षण का कार्य जनभागीदारी से किया जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में तालाब गहरीकरण और जल संरक्षण के प्रयास तेज हुए हैं।

श्योपुर में भी गांव-गांव जल संरचनाओं का निर्माण

श्योपुर जिले में भी जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत जल संरचनाओं का तेजी से निर्माण हो रहा है, जिसमें जनप्रतिनिधियों और स्थानीय नागरिकों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिल रही है।

जल चौपाल और प्याऊ से बढ़ी जनभागीदारी

अभियान के तहत जल चौपाल आयोजित कर लोगों को जल संरक्षण के प्रति जागरूक किया जा रहा है। साथ ही गर्मी के मौसम में राहगीरों को पेयजल उपलब्ध कराने के लिए जगह-जगह सार्वजनिक प्याऊ स्थापित किये गये हैं।

जल संरक्षण से जुड़ रहा जन-जन, बन रहा सतत विकास का आधार

“जल गंगा संवर्धन अभियान” केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक जिम्मेदारी का प्रतीक बन चुका है। जल स्रोतों के संरक्षण, पुनर्जीवन और विकास के इन प्रयासों से न केवल जल संकट का समाधान संभव होगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए सतत जल उपलब्धता सुनिश्चित की जा सकेगी। 

RO No. 13169/ 31

RO No. 13098/ 20

PRATYUSHAASHAKINAYIKIRAN.COM
Editor : Maya Puranik
Permanent Address : Yadu kirana store ke pass Parshuram nagar professor colony raipur cg
Email : puranikrajesh2008@gmail.com
Mobile : -91-9893051148
Website : pratyushaashakinayikiran.com

जनसम्पर्क विभाग – आरएसएस फीड