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ज्योतिष

बैसाखी 2026: 14 अप्रैल को मनाया जाएगा फसल और खुशियों का महापर्व

बैसाखी भारत के सबसे रंगीन और उत्साहपूर्ण त्योहारों में से एक है, जिसे मुख्य रूप से पंजाब, हरियाणा और उत्तर भारत में बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। साल 2026 में बैसाखी 14 अप्रैल, मंगलवार को मनाई जाएगी। यह पर्व रबी फसल की कटाई की खुशी का प्रतीक है और सिख समुदाय के लिए गहरा धार्मिक एवं ऐतिहासिक महत्व रखता है। बैसाखी का दिन ना सिर्फ फसल की बरकत का उत्सव है, बल्कि सिख इतिहास की एक महत्वपूर्ण घटना से भी जुड़ा हुआ है।

बैसाखी की तारीख और खगोलीय महत्व
बैसाखी हर साल मेष संक्रांति यानी सूर्य के मेष राशि में प्रवेश करने के दिन मनाई जाती है। साल 2026 में सूर्य 14 अप्रैल को सुबह में मेष राशि में प्रवेश करेंगे। इसी के साथ बैसाखी का पर्व शुरू हो जाएगा। पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश और उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में इस दिन को विशेष उत्साह के साथ मनाया जाता है।

बैसाखी का धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व
बैसाखी का सबसे बड़ा धार्मिक महत्व 1699 से जुड़ा है। इसी दिन गुरु गोबिंद सिंह जी ने आनंदपुर साहिब में खालसा पंथ की स्थापना की थी। उन्होंने पांच प्यारों को अमृत छकाकर खालसा बनाने की शुरुआत की। इस घटना ने सिख समुदाय को एक नई पहचान, साहस और समानता का संदेश दिया। इसलिए बैसाखी को सिखों का नया वर्ष भी माना जाता है।

किसानों के लिए बैसाखी का महत्व
बैसाखी किसानों के लिए फसल कटाई का त्योहार है। इस पर्व के दौरान गेहूं की फसल पककर तैयार हो जाती है। इस दिन किसान अपनी मेहनत का फल देखकर खुशियां मनाते हैं और भगवान का शुक्रिया अदा करते हैं। बैसाखी के दिन खेतों में नाच-गाना, भांगड़ा-गिद्धा और सामूहिक उत्सव का माहौल होता है।

बैसाखी कैसे मनाई जाती है?
बैसाखी के दिन लोग सुबह जल्दी उठकर स्नान करते हैं और गुरुद्वारों में जाते हैं। स्वर्ण मंदिर समेत सभी प्रमुख गुरुद्वारों में विशेष कीर्तन, अरदास और लंगर का आयोजन होता है। लोग नए कपड़े पहनते हैं, मिठाइयां बांटते हैं और पूरे दिन नाच-गाने में मस्त रहते हैं। घरों में भी विशेष व्यंजन बनाए जाते हैं और परिवार के साथ समय बिताया जाता है।

बैसाखी खुशी, एकता, समृद्धि और नई शुरुआत का त्योहार है। यह हमें सिखाता है कि मेहनत का फल आखिरकार मीठा ही होता है। 14 अप्रैल 2026 को बैसाखी के इस पावन अवसर पर आप भी अपने परिवार और समाज के साथ इस त्योहार को उत्साह और भक्ति के साथ मनाएं।

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