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मध्यप्रदेश

जल गंगा संवर्धन अभियान से जल संरक्षण की दिशा में हुआ अभूतपूर्व कार्य

विभिन्न जिलों से मिल रहे है सकारात्मक परिणाम
जल प्रबंधन से कृषि, पर्यावरण एवं आजीविका में आया उल्लेखनीय सुधार

भोपाल
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश में संचालित जल गंगा संवर्धन अभियान जल संरक्षण, पर्यावरण संवर्धन और ग्रामीण विकास का प्रभावी माध्यम बनकर उभरा है। अभियान के तहत जल स्रोतों के पुनर्जीवन और नई जल संरचनाओं के निर्माण को गति मिली है। जनभागीदारी से जल प्रबंधन सशक्त हुआ है। इसके परिणामस्वरूप प्रदेश के विभिन्न जिलों में जल उपलब्धता में वृद्धि हुई है, कृषि उत्पादन में सुधार हुआ है और जैव विविधता को संरक्षण मिला है। साथ ही ग्रामीण अर्थव्यवस्था भी सुदृढ़ हुई है और लोगों की आजीविका में सकारात्मक परिवर्तन आया है।

छिंदवाड़ा: पालाचौरई में तालाब निर्माण से बढ़ी कृषि उत्पादकता
छिंदवाड़ा जिले के विकासखंड जुन्नारदेव का ग्राम पालाचौरई हरियाली और समृद्धि की मिसाल बनकर उभरा है। अभियान में ग्राम में जल संरचनाओं के निर्माण और पुराने जल स्रोतों के पुनर्जीवन को प्राथमिकता दी गई। मत्स्य पालन तथा पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के समन्वित प्रयासों से आधा एकड़ से लेकर ढाई एकड़ तक के तालाबों का निर्माण किया गया, जिससे वर्षभर जल उपलब्धता सुनिश्चित हुई है।

जल स्तर में वृद्धि का सीधा लाभ कृषि क्षेत्र को मिला है। पूर्व में वर्षा पर निर्भर रहने वाले किसान अब सिंचित खेती कर रहे हैं। वर्तमान में किसान 3 फसलें लेकर उत्पादन और आय दोनों में वृद्धि कर रहे हैं। रबी सीजन में गेहूं, चना, मसूर, सरसों, मटर का उत्पादन बढ़ा है। जायद सीजन में मूंग एवं उड़द की खेती भी संभव हो पाई है। इसके अतिरिक्त किसानों ने मछली पालन, मोती उत्पादन एवं सिंघाड़ा जैसी गतिविधियों से आय के वैकल्पिक स्रोत विकसित किए हैं। ग्राम की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है, पलायन में कमी आई है और युवा कृषि से जुड़कर आत्मनिर्भर बन रहे हैं।

ग्वालियर: पृथ्वी ताल पुनर्जीवन से हुआ पर्यावरण संरक्षण और पर्यटन विकास
ग्वालियर जिले में जल गंगा संवर्धन अभियान में ऐतिहासिक पृथ्वी ताल का कायाकल्प किया गया है। इसे आधुनिक, उपयोगी और आकर्षक जलाशय के रूप में विकसित किया गया है। लगभग 7.27 हैक्टेयर में फैला यह तालाब पहले गाद, जलकुंभी और अतिक्रमण से प्रभावित था। इसकी उपयोगिता लगभग समाप्त हो गई थी। अब यह पुनर्जीवित होकर जल संरक्षण का प्रभावी केंद्र बन गया है। अभियान के तहत व्यापक स्तर पर गाद निकासी, गहरीकरण और सफाई कार्य किए गए, जिससे जल संग्रहण क्षमता बढ़ी। निकाली गई उपजाऊ मिट्टी का उपयोग आसपास के खेतों में किया गया,जिससे कृषि को भी लाभ मिला।

सौंदर्यीकरण कार्यों के बाद यह स्थल अब नागरिकों के लिए प्रमुख पिकनिक स्पॉट और स्वास्थ्यवर्धक गतिविधियों का केंद्र बन गया है। सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि जैव विविधता का पुनरुद्धार है। वर्तमान में 120 से अधिक देशी-विदेशी पक्षियों की प्रजातियां यहां निवास कर रही हैं। कछुए और अन्य जलीय जीव भी यहां पाए जा रहे हैं,जिससे यह क्षेत्र एक जीवंत पारिस्थितिक तंत्र के रूप में विकसित हुआ है।

मंदसौर: थडोद की ऐतिहासिक बावड़ी के पुनरुद्धार से मिला स्थायी जल स्रोत
मंदसौर जिले के ग्राम थडोद में प्राचीन हजरत गालिब की बावड़ी का पुनर्जीवन एक प्रेरणादायक उपलब्धि के रूप में सामने आया है। वर्षों से उपेक्षित यह बावड़ी गंदगी, मलबे और अव्यवस्था के कारण अनुपयोगी हो गई थी। अभियान में प्रशासन और ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी से इस बावड़ी का व्यापक जीर्णोद्धार किया गया। श्रमदान कर मलबा हटाया गया, जल स्रोत की सफाई की गई और आसपास के क्षेत्र को व्यवस्थित किया गया। इससे यह बावड़ी पुनः स्वच्छ, सुरक्षित और उपयोगी जल स्रोत के रूप में स्थापित हुई है। अभियान से न केवल एक ऐतिहासिक धरोहर का संरक्षण हुआ है, बल्कि ग्रामवासियों को एक स्थायी जल स्रोत भी उपलब्ध हुआ है। भू-जल स्तर में सुधार की संभावनाएं बढ़ी हैं और यह प्रयास अन्य ग्रामों के लिए प्रेरणा बनकर उभरा है।

सतत विकास की दिशा में प्रभावी पहल
प्रदेश में जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत किए जा रहे प्रयास जल संसाधनों के संरक्षण और उपयोग में ठोस परिवर्तन ला रहे हैं। छिंदवाड़ा, ग्वालियर और मंदसौर के उदाहरण यह दर्शाते हैं कि योजनाबद्ध क्रियान्वयन और जनसहभागिता से स्थानीय स्तर पर स्थायी परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं। यह पहल वर्तमान आवश्यकताओं की पूर्ति के साथ भविष्य के लिए जल सुरक्षा की मजबूत नींव भी तैयार कर रही है और प्रदेश में संतुलित एवं दीर्घकालिक विकास को गति दे रही है।

 

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