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मध्यप्रदेश

अस्तित्व से अस्मिता की ओर: मध्य प्रदेश में महिला विकास के नए प्रतिमान

भोपाल

मध्यप्रदेश की धरा पर 'नारी तू नारायणी' का मंत्र केवल उपदेशों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह नीतिगत निर्णयों और जमीनी क्रियान्वयन की आधारशिला बन चुका है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के विजन में आज की महिला केवल शासन की योजनाओं की 'हितग्राही' नहीं है, बल्कि वह नए मध्य प्रदेश की 'भाग्य विधाता' और 'नेतृत्वकर्ता' बनकर उभर रही है। प्रदेश की नीतिगत प्राथमिकताओं में आए इस बुनियादी बदलाव ने आज मध्य प्रदेश को महिला केंद्रित विकास (Women-led Development) के मामले में देश के अग्रणी राज्यों की पंक्ति में खड़ा कर दिया है।

मध्य प्रदेश में महिला सशक्तिकरण की यात्रा केवल नारों तक सीमित न रहकर आर्थिक स्वावलंबन के ठोस धरातल पर टिकी है। मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना इस बदलाव का सबसे मुखर प्रतीक बनकर उभरी है, जहाँ प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) के माध्यम से जून 2023 से अब तक लगभग 55,926 करोड़ रुपये की विशाल राशि 1.26 करोड़ बहनों के बैंक खातों में पहुँचाई जा चुकी है। प्रति माह दी जाने वाली 1500 रुपये की यह सम्मान राशि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में महिलाओं के आत्मविश्वास का संबल बनी है। आर्थिक सशक्तिकरण का यह सिलसिला यहीं नहीं रुकता, बल्कि स्व-सहायता समूहों के माध्यम से 62 लाख ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और 'लखपति दीदी' अभियान के तहत 12 लाख से अधिक महिलाओं की आय को एक लाख रुपये के पार ले जाना यह सिद्ध करता है कि प्रदेश की नारी अब परिवार की आर्थिक रीढ़ बन चुकी है।

सुरक्षा और तकनीक के संगम ने मध्य प्रदेश की महिलाओं को एक नया आकाश दिया है। केंद्र सरकार की 'सेफ सिटी' परियोजना के तहत धार जिले का चयन होना और वहाँ 10 करोड़ रुपये की लागत से अत्याधुनिक सुरक्षा ढांचा विकसित करना, राज्य सरकार की उस प्रतिबद्धता को दर्शाता है जहाँ भयमुक्त वातावरण को विकास की पहली शर्त माना गया है। पिंक टॉयलेट्स, चप्पे-चप्पे पर सीसीटीवी की निगरानी और अस्पतालों में विशेष सुविधाओं के साथ-साथ 'नमो ड्रोन दीदी' जैसी योजनाएं यह प्रमाणित करती हैं कि मध्य प्रदेश की बेटियाँ अब पारंपरिक सीमाओं को तोड़कर तकनीक के उच्चतम शिखरों को छू रही हैं। कृषि क्षेत्र में ड्रोन पायलट के रूप में प्रशिक्षित हो रही महिलाएं आधुनिक भारत की नई पहचान बन रही हैं।

डॉ. मोहन यादव की सरकार ने न केवल वर्तमान को संवारा है, बल्कि भविष्य की पीढ़ी के लिए भी सुरक्षा कवच तैयार किया है। वर्ष 2007 से संचालित लाड़ली लक्ष्मी योजना आज अपने उस मुकाम पर है जहाँ 53 लाख से अधिक बेटियों का भविष्य सुरक्षित है और वे उच्च शिक्षा के लिए 25,000 रुपये जैसी प्रोत्साहन राशियों के माध्यम से अपने सपनों को हकीकत में बदल रही हैं। सामाजिक न्याय की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम उठाते हुए राज्य सरकार ने शासकीय सेवाओं में महिलाओं के लिए आरक्षण को बढ़ाकर 35 प्रतिशत कर दिया है। यह निर्णय आने वाले समय में प्रशासन के हर स्तर पर स्त्री-शक्ति की निर्णायक भूमिका सुनिश्चित करेगा। इसके साथ ही, नगरीय निकायों में महिला प्रतिनिधियों के मानदेय में की गई वृद्धि उनके राजनैतिक सशक्तिकरण को नई ऊर्जा प्रदान कर रही है।

औद्योगिक परिदृश्य में भी मध्य प्रदेश की नारी अब 'जॉब सीकर' के बजाय 'जॉब क्रिएटर' की भूमिका में है। एमएसएमई नीति-2025 के तहत महिला उद्यमियों को 48 प्रतिशत तक का भारी अनुदान और स्टार्टअप्स के लिए विशेष वित्तीय सहायता ने प्रदेश के आर्थिक परिदृश्य को बदल दिया है। वर्तमान में प्रदेश के 47 प्रतिशत एमएसएमई उद्योगों का संचालन महिलाओं द्वारा किया जाना इस बात का प्रमाण है कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में व्यापार और नवाचार के द्वार महिलाओं के लिए पूरी तरह खुल चुके हैं। स्वास्थ्य के मोर्चे पर 'मातृशिशु संजीवन अभियान' और 'प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना' में प्राप्त 91 प्रतिशत का लक्ष्य यह सुनिश्चित कर रहा है कि राज्य का आने वाला कल स्वस्थ और सुरक्षित हो।

नेतृत्व में हिस्सेदारी: 35 प्रतिशत आरक्षण का ऐतिहासिक निर्णय

डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्य प्रदेश सरकार ने शासकीय सेवाओं में महिलाओं के लिए आरक्षण को बढ़ाकर 35 प्रतिशत कर एक ऐतिहासिक मानक स्थापित किया है। यह निर्णय केवल रोजगार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह नीति निर्माण की प्रक्रियाओं में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने वाला कदम है। नगरीय निकायों में निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों के मानदेय में 20 प्रतिशत की वृद्धि उनके राजनीतिक सशक्तिकरण को और अधिक मजबूती प्रदान करती है।

मध्य प्रदेश की एमएसएमई नीति-2025, जहाँ महिला उद्यमियों को 48 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है, यह स्पष्ट करती है कि आने वाला समय मध्य प्रदेश की महिला उद्यमियों का है। प्रदेश में 47 प्रतिशत एमएसएमई का महिलाओं द्वारा संचालित होना यह सिद्ध करता है कि वे अब रोजगार माँगने वाली नहीं, बल्कि रोजगार देने वाली बन गई हैं।

मध्य प्रदेश की नारी अपनी सफलता के अमिट हस्ताक्षर कर रही है। डॉ. मोहन यादव के सक्षम नेतृत्व में राज्य आज देश को यह संदेश दे रहा है कि जब नीतियों में संवेदनशीलता और निर्णयों में दृढ़ता हो, तो नारी शक्ति केवल वंदनीय ही नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की सबसे प्रबल शक्ति बन जाती है।

 

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