ज्योतिष

बुद्ध पूर्णिमा 2026: अंगुलिमाल डाकू की कहानी से मिलता है जीवन बदलने का संदेश

इस बार बुद्ध पूर्णिमा 1 मई, शुक्रवार को मनाई जाएगी. हिंदू पंचांग के अनुसार, यह वैशाख मास की पूर्णिमा तिथि को आती है. भगवान गौतम बुद्ध के जीवन से जुड़ी कई कहानियां आज भी लोगों को सही राह दिखाती हैं. ऐसी ही एक प्रसिद्ध कथा अंगुलिमाल नाम के डाकू से जुड़ी है, जो जीवन बदलने की सीख देती है.

कौन था अंगुलिमाल डाकू?
कहा जाता है कि मगध राज्य में अंगुलिमाल नाम का एक खतरनाक डाकू रहता था. लोग उससे बहुत ज्यादा डरते थे क्योंकि वह राह चलते लोगों को मार देता था और उनकी उंगलियों की माला पहनता था. इसी वजह से उसका नाम अंगुलिमाल पड़ गया था. गांव के लोग उसके खौफ से डर और परेशानी के माहौल में जी रहे थे. एक दिन गौतम बुद्ध उसी क्षेत्र में पहुंचे. लोगों ने उनका स्वागत बड़े ही सत्कार के साथ तो किया, लेकिन उनके चेहरे पर डर साफ दिखाई दे रहा था. जब गौतम बुद्ध ने वजह पूछी, तो सभी ने अंगुलिमाल के आतंक की कहानी सुना दी. यह सुनकर गौतम बुद्ध बिना डरे अगले दिन जंगल की ओर चल पड़े. गांव वालों ने उन्हें रोकने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने किसी की बात नहीं मानी.

जब अंगुलिमाल डाकू की हुई गौतम बुद्ध के मुलाकात
जंगल में अंगुलिमाल ने गौतम बुद्ध को देखा और उन्हें रोकने के लिए दौड़ा, लेकिन वह जितना तेज भागता, बुद्ध उतनी ही शांति से आगे बढ़ते रहते और उसके हाथ नहीं आए. आखिर थककर उसने जोर से कहा, 'रुक जाओ!' तब गौतम बुद्ध रुके और शांत स्वर में बोले, 'मैं तो रुक गया हूं, लेकिन तुम कब रुकोगे?'

यह बात सुनकर अंगुलिमाल डाकू चौंक गया. उसने गौतम बुद्ध को डराने की कोशिश की और खुद को सबसे शक्तिशाली बताया. तब बुद्ध ने उसे एक छोटा सा काम करने को कहा-पेड़ से कुछ पत्ते तोड़कर लाने को. अंगुलिमाल डाकू ने बुद्ध को तुरंत पत्ते तोड़कर ला दिए. फिर बुद्ध ने कहा, 'अब इन्हें वापस उसी तरह जोड़ दो.' अंगुलिमाल डाकू हैरान रह गया और बोला कि यह तो संभव नहीं है.

गौतम बुद्ध ने डाकू को दी यह सीख
तब गौतम बुद्ध ने समझाया, 'जब तुम किसी चीज को जोड़ नहीं सकते, तो उसे तोड़ने का अधिकार भी तुम्हें नहीं है. किसी का जीवन लेना आसान है, लेकिन जीवन देना सबसे बड़ी शक्ति है.' यह बात अंगुलिमाल डाकू के दिल को छू गई. उसे अपनी गलती का एहसास हुआ और उसने उसी समय हिंसा का रास्ता छोड़ दिया. वह गौतम बुद्ध का शिष्य बन गया और आगे चलकर लोगों की सेवा करने लगा. कहा जाता है कि बाद में वही अंगुलिमाल एक शांत और ज्ञानी संन्यासी बन गया. इस कहानी से यह सीख मिलती है कि इंसान चाहे कितना भी भटक जाए, अगर वह सही रास्ता चुन ले, तो उसका जीवन बदल सकता है.

RO No. 13169/ 31

RO No. 13098/ 20

PRATYUSHAASHAKINAYIKIRAN.COM
Editor : Maya Puranik
Permanent Address : Yadu kirana store ke pass Parshuram nagar professor colony raipur cg
Email : puranikrajesh2008@gmail.com
Mobile : -91-9893051148
Website : pratyushaashakinayikiran.com

जनसम्पर्क विभाग – आरएसएस फीड