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अयोध्या में 41 तीर्थ स्थलों को जोड़कर बनेगा रामायणकालीन धार्मिक पर्यटन सर्किट

अयोध्या

 रामनगरी अयोध्या और आसपास के जिलों में धार्मिक पर्यटन को एक नई दिशा देने की तैयारी तेज हो गई है। रामायणकालीन विरासत को संरक्षित करते हुए सरकार अब ऐसे व्यापक धार्मिक पर्यटन सर्किट पर काम कर रही है, जिसमें 41 पौराणिक तीर्थ स्थलों को एक साथ जोड़ा जाएगा। इस योजना का उद्देश्य न केवल श्रद्धालुओं के लिए यात्रा को अधिक सुविधाजनक और अनुभवात्मक बनाना है, बल्कि लंबे समय से उपेक्षित प्राचीन स्थलों को पुनर्जीवित कर उन्हें पर्यटन मानचित्र पर मजबूत पहचान दिलाना भी है। यह सर्किट अयोध्या के साथ गोंडा, बस्ती और अंबेडकरनगर के ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों को आपस में जोड़ते हुए एक संगठित आध्यात्मिक मार्ग तैयार करेगा।

रामायणकालीन विरासत को मिलेगा नया स्वरूप
84 कोसी परिक्रमा मार्ग पर स्थित इन 41 पौराणिक स्थलों के संरक्षण और सौंदर्यीकरण की दिशा में काम शुरू हो गया है। सरकार की मंशा है कि श्रद्धालु केवल राम मंदिर तक सीमित न रहकर पूरे रामायणकालीन भूगोल का अनुभव करें और उन स्थलों से भी जुड़ें जो धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं, लेकिन अब तक अपेक्षित विकास से वंचित रहे हैं।

41 तीर्थ स्थलों का होगा व्यापक विकास और सौंदर्यीकरण
परियोजना के तहत इन सभी स्थलों पर आधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी। कुंडों और पवित्र स्थलों का सौंदर्यीकरण किया जाएगा, साथ ही श्रद्धालुओं के लिए शेड, पेयजल व्यवस्था, चेंजिंग रूम, बेहतर प्रकाश व्यवस्था और सड़क संपर्क जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इसका उद्देश्य तीर्थ यात्रा को अधिक सुरक्षित, सुविधाजनक और सुव्यवस्थित बनाना है।

रामायण से जुड़े प्रमुख स्थलों को किया गया शामिल
इस धार्मिक पर्यटन सर्किट में वाल्मीकि आश्रम, अंगी ऋषि आश्रम, विभीषण कुंड, सुग्रीव कुंड, राम कुंड, सीता कुंड, भरत कुंड, नंदीग्राम, तमसा नदी, श्रवण क्षेत्र और पाराशर आश्रम जैसे प्रमुख स्थल शामिल किए गए हैं। ये सभी स्थान रामायण काल की कथाओं और परंपराओं से गहराई से जुड़े हुए हैं और इनका ऐतिहासिक महत्व अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा नया आधार
यह परियोजना केवल धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे ग्रामीण क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है। पर्यटन गतिविधियों के बढ़ने से स्थानीय रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, छोटे व्यापारों को प्रोत्साहन मिलेगा और क्षेत्रीय विकास को नई गति मिलेगी। होटल, परिवहन और स्थानीय हस्तशिल्प जैसे क्षेत्रों में भी सकारात्मक प्रभाव देखने को मिलेगा।

श्रद्धालुओं के लिए समग्र आध्यात्मिक अनुभव की तैयारी
सरकार का लक्ष्य है कि श्रद्धालुओं को एक ही यात्रा में संपूर्ण रामायणकालीन विरासत का अनुभव मिल सके। इससे न केवल धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपराओं को वैश्विक स्तर पर भी नई पहचान मिलेगी।

 

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