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बंगाल की खाड़ी में NOTAM जारी, संभावित अग्नि-4 मिसाइल परीक्षण की तैयारी

 नई दिल्ली

भारत सरकार ने बंगाल की खाड़ी में लंबी दूरी की मिसाइल परीक्षण के लिए NOTAM (Notice to Airmen) जारी किया है. यह चेतावनी 25 अप्रैल से 6 मई 2026 तक लागू रहेगी. NOTAM में करीब 3550 किलोमीटर लंबा खतरे का इलाका घोषित किया गया है। 

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस दौरान अग्नि-4 मिसाइल का परीक्षण किया जा सकता है. यह परीक्षण ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ के आसपास होने जा रहा है, जिससे यह परीक्षण सिर्फ तकनीकी नहीं बल्कि रणनीतिक संदेश भी देने वाला माना जा रहा है.

अग्नि-4 मिसाइल की विशेषताएं 

अग्नि-4 भारत की महत्वपूर्ण मिसाइलों में से एक है. यह एक Intermediate Range Ballistic Missile (IRBM) है। 

    रेंज: 3500 से 4000 किलोमीटर  
    वजन: लगभग 17 टन  
    लंबाई: करीब 20 मीटर  
    ईंधन: सॉलिड फ्यूल (ठोस ईंधन)  
    चरण: दो चरण वाली मिसाइल   
    वॉरहेड: 1000 किलोग्राम तक का परमाणु या पारंपरिक हथियार ले जा सकती है.  
    विशेषता: बेहद सटीक निशाना लगाने की क्षमता और मोबाइल लॉन्चर पर चलने वाली मिसाइल। 

अग्नि-4 भारत की न्यूक्लियर ट्रायड का महत्वपूर्ण हिस्सा है. यह रेल और सड़क दोनों जगहों से लॉन्च की जा सकती है, जिससे दुश्मन को इसे पहले से नष्ट करना बहुत मुश्किल होता है। 

क्यों जारी किया गया NOTAM?
NOTAM जारी करके भारत ने पायलटों और जहाजों को चेतावनी दी है कि वे तय क्षेत्र में न जाएं. यह क्षेत्र बंगाल की खाड़ी में है, जो अग्नि-4 जैसी मिसाइल के परीक्षण के लिए उपयुक्त है. रक्षा सूत्रों के अनुसार, फ्लाइट पाथ और खतरे वाले क्षेत्र की दूरी अग्नि-4 की क्षमता से बिल्कुल मेल खाती है। 

ऑपरेशन सिंदूर की वर्षगांठ पर परीक्षण का मतलब
ऑपरेशन सिंदूर मई 2025 में भारत द्वारा पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों पर किया गया था. अब ठीक एक साल बाद यह मिसाइल परीक्षण हो रहा है. हालांकि रक्षा मंत्रालय ने इसे आधिकारिक रूप से वर्षगांठ से जोड़ा नहीं है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि यह परीक्षण भारत की सैन्य तैयारियों और मजबूती का संदेश देगा। 

भारत की मिसाइल क्षमता बढ़ रही है
हाल के महीनों में भारत ने अपनी मिसाइलों के परीक्षण तेज कर दिए हैं. अग्नि सीरीज के अलावा K-4 (सबमरीन से लॉन्च होने वाली), हाइपरसोनिक मिसाइल LRAShM और ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल के 800 किलोमीटर रेंज वाले वर्जन का परीक्षण चल रहा है। 

ब्रह्मोस का नया वर्जन 2027 तक भारतीय सेना में शामिल होने वाला है. इन सभी परीक्षणों से साफ है कि भारत अपनी रक्षा क्षमता को लगातार आधुनिक और मजबूत बना रहा है। 

क्यों जरूरी है अग्नि-4 जैसी मिसाइल?
अग्नि-4 चीन और पाकिस्तान जैसे पड़ोसी देशों के किसी भी हिस्से को निशाना बना सकती है. यह मिसाइल भारत को क्रेडिबल मिनिमम डिटरेंस नीति को मजबूत करती है. ठोस ईंधन होने के कारण इसे जल्दी लॉन्च किया जा सकता है. दुश्मन के रडार से बचना भी आसान होता है। 

बंगाल की खाड़ी में जारी NOTAM और अग्नि-4 का संभावित परीक्षण भारत की सैन्य ताकत और तैयारियों को दर्शाता है. ऑपरेशन सिंदूर की वर्षगांठ पर यह परीक्षण रणनीतिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण माना जा रहा है. भारत लगातार अपनी मिसाइल तकनीक को बेहतर बना रहा है ताकि देश की सुरक्षा अटूट बनी रहे। 

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