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ज्योतिष

चाणक्य ज्ञान,अकेलापन कभी दुख नहीं, असली शांति की पहचान

आज के समय में आपको दो तरह के लोग सबसे ज्यादा देखने को मिलेंगे, पहले वे जो भीड़ में रहकर भी हर समय दुखी महसूस करते हैं और दूसरे वो जो अकेले रहते हुए भी काफी ज्यादा शांत और खुश नजर आते हैं. आचार्य चाणक्य के अनुसार उनकी ये खुशी बाहरी नहीं होती हैं, बल्कि उनकी सोच और कॉन्फिडेंस में छिपी हुई होती है. उनके अनुसार जो भी लोग खुद को अच्छे से समझ लेते हैं, उन्हें हर समय किसी के साथ की जरूरत नहीं पड़ती है. चाणक्य कहते हैं कि अकेले रहना कभी भी दुख की निशानी नहीं होती है, कई बार ये एक इंसान को खुद को और भी बेहतर तरीके से समझने का मौका देती है. आज इस आर्टिकल में हम आपको विस्तार से बताने वाले हैं कि आखिर क्यों कुछ लोग पूरी तरह से अकेले रहने के बावजूद भी दूसरों से ज्यादा खुश रहते हैं. चलिए जानते हैं इसके पीछे छिपे हुए कारण.

खुद से प्यार करना जानते हैं ये लोग
आचार्य चाणक्य के अनुसार जो व्यक्ति खुद की कद्र करना सीख जाता है, उसे कभी भी अकेलेपन से परेशानी नहीं होती है. इस तरह के लोग अपनी कमियों और खूबियों को पूरी तरह से स्वीकार कर चुके होते हैं. इस तरह के लोगों को कभी भी दूसरों की तारीफ या फिर अटेंशन की जरूरत नहीं पड़ती है. इसके अलावा ये लोग अपने समय का भी इस्तेमाल सही तरीके से करना जानते हैं. इन्हें आकर आप किताबें पढ़ते हुए, नयी चीजें सीखते हुए या फिर अपने सपनों को पूरा करने के लिए काम करते हुए ही देख पाएंगे. उनकी यही आदत उन्हें अंदर से खुश और सेटिस्फाइड बनाती है.

हर रिश्ते से उम्मीद नहीं रखते ये लोग
कई बार आपको जीवन में दुख इसलिए भी मिलता है क्योंकि आप दूसरों से ज्यादा ही उम्मीदें रखने लगते हैं. आचार्य चाणक्य के अनुसार एक समझदार व्यक्ति कभी भी हर किसी से उम्मीदें नहीं रखता है. उसे इस बात का अंदाजा होता है कि हर इंसान जीवनभर कभी भी साथ नहीं रहता है. चाणक्य के अनुसार जो भी लोग अकेले खुश रहते हैं, वे रिश्तों की कीमत समझते हैं लेकिन अपनी खुशियों के लिए दूसरों पर निर्भर नहीं रहते हैं. अगर कोई उनका साथ दे रहा है तो भी अच्छी बात है और अगर न दे तो भी वे मायूस होकर टूटते नहीं है. उनकी यही सोच उन्हें अकेलेपन में भी खुश रहने में मदद करती है.

मन को शांत रखना जानते हैं
आचार्य चाणक्य के अनुसार एक शांत मन वाला व्यक्ति हर हालात में खुद को संभालकर रख पाता है. अकेले रहने वाले लोग जीवन में होने वाले बेकार के बहस, तुलना और दिखावे से पूरी तरह से दूर रहते हैं. चाणक्य कहते हैं कि ये लोग अपनी जिंदगी को दूसरों की नजरों से नहीं, बल्कि अपनी समझदारी से जीते हैं. इस तरह के लोग कभी दूसरों के दबाव में आकर खुद को कमजोर नहीं समझते हैं. उन्हें इस बात का अंदाजा काफी अच्छे से होता है कि असली खुशी अंदर से आती है, भीड़ या फिर दिखावे से बिलकुल भी नहीं.

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