मध्यप्रदेश

धार भोजशाला विवाद पहुंचा फिर सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट के फैसले को तीसरी चुनौती

धार

धार भोजशाला विवाद में अब सुप्रीम कोर्ट में तीसरी याचिका लगी है। सुप्रीम कोर्ट अब भोजशाला से जुड़ी याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई कर सकता है। तीसरी याचिका जिब्रान अंसारी ने प्रस्तुत की है। तीनों याचिकाओं पर अब तक कोर्ट ने सुनवाई शुरू नहीं की है। उधर, हिंदू पक्ष भी सुप्रीम कोर्ट में लगी याचिकाओं को लेकर तैयारी कर रहा है। पूर्व में ही सुप्रीम कोर्ट में भोजशाला मामले में कैविएट दायर की जा चुकी है, ताकि बिना पक्ष सुने स्टे न मिल सके।

भोजशाला को इंदौर हाईकोर्ट ने हिंदू मंदिर माना है। इस फैसले को मुस्लिम पक्ष ने चुनौती देते हुए विशेष अनुमति याचिका दायर की है। पहले शहर काजी, फिर कमाल मौला वेलफेयर सोसायटी और अब जिब्रान अंसारी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई है। पिछली याचिकाओं पर अभी तक हाईकोर्ट में सुनवाई नहीं हो पाई है। हाईकोर्ट का फैसला आने के छह दिन बाद मुस्लिम पक्ष ने रात साढ़े आठ बजे कोर्ट में याचिका लगाई थी।

आधी रात दाखिल हुई नई याचिका
भोजशाला मामले में सुप्रीम कोर्ट में नई याचिका दाखिल होने की जानकारी सामने आते ही विवाद फिर सुर्खियों में आ गया। सर्वोच्च न्यायालय की वेबसाइट पर उपलब्ध विवरण के अनुसार “Jebran Ansari Vs Union of India” नाम से यह याचिका डायरी नंबर 33643/2026 के तहत दर्ज की गई है। बताया गया कि याचिका 26 मई 2026 की रात करीब 11:30 बजे दाखिल की गई, जिससे यह स्पष्ट माना जा रहा है कि मुस्लिम पक्ष इस मामले में कानूनी तैयारी को तेजी से आगे बढ़ा रहा है।

हाईकोर्ट के फैसले को दी चुनौती
नई याचिका में इंदौर हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी गई है, जिसने भोजशाला विवाद को लेकर अहम फैसला सुनाया था। फिलहाल यह मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित बताया जा रहा है। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार अब सर्वोच्च न्यायालय में होने वाली सुनवाई इस विवाद की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। मामले की एंट्री सुप्रीम कोर्ट में होते ही दोनों पक्षों की सक्रियता बढ़ गई है।

धार्मिक और राजनीतिक हलचल तेज
भोजशाला विवाद लंबे समय से संवेदनशील धार्मिक मामलों में गिना जाता रहा है। ऐसे में नई याचिका के बाद धार्मिक संगठनों और विभिन्न पक्षों में हलचल तेज हो गई है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी भी बढ़ सकती है। विवाद को लेकर सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है, जिससे प्रदेश का माहौल फिर गर्माने के संकेत मिल रहे हैं।

कानूनी लड़ाई अब नए चरण में
सुप्रीम कोर्ट में मामला पहुंचने के बाद अब यह विवाद नए कानूनी चरण में प्रवेश कर चुका है। दोनों पक्ष अपनी-अपनी दलीलों के साथ अदालत में मजबूती से उतरने की तैयारी कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में इस प्रकरण की सुनवाई राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी बहस का विषय बन सकती है। फिलहाल सभी की नजरें सुप्रीम कोर्ट की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।

संवेदनशील मामले पर बढ़ी निगरानी
भोजशाला विवाद को लेकर प्रशासनिक स्तर पर भी सतर्कता बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। संवेदनशील माहौल को देखते हुए स्थानीय स्तर पर गतिविधियों पर नजर रखी जा सकती है। इस पूरे घटनाक्रम ने धार सहित प्रदेश की राजनीति और धार्मिक चर्चाओं को फिर केंद्र में ला दिया है।

कमाल मौला मस्जिद कमेटी के अध्यक्ष अब्दुल समद ने कहा कि हमारे पास सरकारी दस्तावेज और पुख्ता प्रमाण हैं, जिनके आधार पर हम सुप्रीम कोर्ट में साबित करेंगे कि धार का परिसर मंदिर नहीं, मस्जिद है। हाईकोर्ट ने एएसआई की जिस रिपोर्ट में भोजशाला को मंदिर बताया, वही पूर्व की रिपोर्ट में भोजशाला को मस्जिद बताती रही है।

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