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देश

‘उकसाओगे तो जवाब मिलेगा’, ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र कर आर्मी चीफ ने दुश्मनों को दी चेतावनी

नई दिल्ली

आर्मी चीफ जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने शनिवार को कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने यह तय कर दिया है कि उकसावे पर भारत किस तरह जवाब देता है। उन्होंने राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) के पासिंग आउट कैडेटों से अपील की कि वे अपने सैन्य करियर की शुरुआत करते हुए इस उच्च मानक को हमेशा बनाए रखें। पुणे के खडकवासला स्थित त्रि-सेवा अकादमी परिसर में एनडीए के 150वें कोर्स की पासिंग आउट परेड को संबोधित करते हुए जनरल द्विवेदी ने आधुनिक युद्ध के बदलते स्वरूप और एकीकृत सैन्य प्रतिक्रिया के महत्व पर प्रकाश डाला।

सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा, "आज के समय में खतरे हमेशा वर्दी में या किसी घोषित मोर्चे पर नहीं आते। ऑपरेशन सिंदूर ने यह साबित किया और एक बेंचमार्क स्थापित किया कि जब राष्ट्रीय इच्छाशक्ति को सटीकता और संकल्प के साथ व्यक्त किया जाता है तो भारत उकसावे का कैसा जवाब देता है। अब इस मानक को बनाए रखने की जिम्मेदारी आपकी है।"

तीनों सेनाओं के तालमेल पर दिया जोर
सेना प्रमुख ने तीनों सेनाओं थल सेना, नौसेना और वायुसेना के बीच आपसी तालमेल और एकजुटता के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर की सफलता उसी एकीकृत दृष्टिकोण का परिणाम थी, जिसकी नींव एनडीए में रखी जाती है। उन्होंने कैडेट्स से कहा, "ऑपरेशन सिंदूर में आपने जो एकीकृत प्रतिक्रिया देखी, वह ठीक उसी नींव पर बनी थी जो एनडीए तैयार करता है। यहां संयुक्तता केवल पढ़ने का विषय नहीं है, बल्कि पहले दिन से ही तीनों सेनाओं के सैनिकों के साथ मिलकर जीने की एक प्रवृत्ति है।"

42 साल बाद अकादमी लौटे सेना प्रमुख
जनरल द्विवेदी ने खेत्रपाल परेड ग्राउंड में परेड की समीक्षा की, जहां 355 कैडेटों को भारतीय सशस्त्र बलों में शामिल किया गया। इस पासिंग आउट बैच में 12 मित्र विदेशी देशों के 24 कैडेट भी शामिल थे। अपने पुराने दिनों को याद करते हुए सेना प्रमुख भावुक नजर आए। उन्होंने कहा कि यह अवसर उनके लिए बेहद खास है क्योंकि चार दशक से भी पहले वह खुद इसी अकादमी से पास आउट हुए थे। आपको बता दें कि जनरल उपेंद्र द्विवेदी एनडीए के 65वें कोर्स के छात्र और चार्ली स्क्वाड्रन के कैडेट रह चुके हैं।

उन्होंने कहा, "42 साल से अधिक समय पहले मैं इसी क्वार्टर डेक से पास आउट हुआ था। आज समीक्षा अधिकारी के रूप में अपनी मातृ संस्था में लौटना मेरे लिए गर्व की बात है। इसी संस्थान ने मेरे मूल्यों, नेतृत्व और राष्ट्र सेवा के प्रति प्रतिबद्धता को आकार दिया है।"

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