ज्योतिष

दुश्मन को हराना है तो अपनाएं चाणक्य की ये 7 रणनीतियां, बिना बोले भी जीत सकते हैं हर लड़ाई

जरा सोचिए, आप कुछ नहीं बोलते हैं. आप ना गुस्सा दिखाते हैं, ना सफाई देते हैं, ना जवाब देते हैं. लेकिन, सामने वाला अंदर ही अंदर टूटने लगता है. क्यों? दरअसल, इस विषय में चाणक्य कहते हैं कि सबसे खतरनाक हथियार तलवार नहीं, चुप्पी होती है. आज की दुनिया में जो ज्यादा बोलता है, वो जल्दी पकड़ा जाता है. और जो चुप रहता है, वही खेल पलट देता है. आइए चाणक्य नीति से जानते हैं उन 7 ट्रिक्स के बारे में दुश्मन को हराने में आपकी मदद करेगी. चाणक्य नीति के मुताबिक, इन तरीकों से दुश्मन खुद अपनी हार का कारण बनता है और उसे पता भी नहीं चलता है.

1. चुप्पी- सबसे बड़ा डर
चाणक्य कहते हैं कि अज्ञात सबसे बड़ा भय है. क्योंकि ऐसी स्थिति में व्यक्ति जल्दी रिएक्ट करता है, जल्दी सफाई देने लगता है और खुद को साबित करने लगता है. और यहीं से आप हारने लगते हैं. क्योंकि जब आप हर बात का जवाब देते हैं, तो आप सामने वाले को अपनी कमी बता देते हैं कि आपकी सोच और आपकी प्रतिक्रिया क्या है.

लेकिन जब आप चुप रहते हैं तो सामने वाला कंफ्यूज हो जाता है. ऐसे में वो सोचता है कि ये बोल क्यों नहीं रहा है? क्या इसे कुछ पता है? या ये मुझसे एक कदम आगे है? यहीं से उसके मन में डर शुरू होता है.

2. ऑफिस या लाइफ का असली सीन
कोई आपको नीचा दिखाने की कोशिश करता है. अगर आप तुरंत जवाब देते हैं तो वह जीत जाता है. क्योंकि उसे वही मिला जो वह चाहता था, आपकी प्रतिक्रिया. लेकिन, अगर आप शांत रहते हैं,  आत्मविश्वास के साथ. तो ऐसे में बिना बोले ही खेल पलट जाता है. अब लोग आपको नहीं, उसे देखने लगते हैं.

3. धैर्य
चाणक्य कहते हैं कि, 'जो प्रतीक्षा कर सकता है, वही शासन करता है.' जब आप रिएक्ट नहीं करते हैं तो दुश्मन बेचैन हो जाता है. वो ज्यादा बोलता है और ज्यादा गलतियां करता है. याद रखिए कि जो ज्यादा बोलता है, वो खुद अपना सबूत बन जाता है.

4. बॉडी लैंग्वेज यानी बिना बोले वार
चुप रहना मतलब सिर्फ मौन नहीं होता है बल्कि दुश्मन पर बड़ा वार होता है.

5. दुश्मन खुद टूटता है
चाणक्य नीति के मुताबिक, जब सामने वाला बार-बार कोशिश करता है और आप नहीं टूटते हैं तो वह खुद टूटने लगता है. वो उकसाएगा, गॉसिप फैलाएगा, झूठ बोलेगा, लेकिन आप शांत रहते हैं. धीरे-धीरे लोग समझ जाते हैं कि समस्या आप नहीं, वो है.

6. आखिरी वार: मौन
चाणक्य कहते हैं कि, मौन तभी तोड़ो जब शब्द तीर बन जाए.' आप लंबे समय तक चुप रहते हैं, सब कुछ देखते हैं, समझते हैं और फिर सही समय पर तथ्य के साथ बस एक वाक्य बोलते हैं. ना गुस्सा, ना बहस और वही एक वाक्य पूरा खेल खत्म कर देता है. अब वो रिएक्ट करता है और आप शांत रहते हैं.

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