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PM आवास का सुनहरा मौका! सरकार ने शुरू किया नया सर्वे, जल्द जारी होगी लाभार्थियों की नई सूची

नई दिल्ली

पश्चिम बंगाल सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (PMAY-G) के लाभार्थियों की पहचान को अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष और राजनीतिक प्रभाव से मुक्त बनाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। राज्य के पंचायत एवं ग्रामीण विकास (P&RD) विभाग ने पहली बार सेल्फ-सर्वे सिस्टम लागू किया है, जिसके तहत पात्र नागरिक खुद अपने घर से आवेदन कर सकेंगे। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य उन शिकायतों को कम करना है, जिनमें अक्सर आरोप लगाए जाते थे कि आवास योजना के लाभार्थियों के चयन में पक्षपात, राजनीतिक हस्तक्षेप या गलत जानकारी का इस्तेमाल किया जाता है। अब लाभार्थियों को किसी मध्यस्थ या स्थानीय सिफारिश पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा, बल्कि वे सीधे डिजिटल माध्यम से अपनी पात्रता दर्ज करा सकेंगे। सरकार का मानना है कि इससे वास्तविक जरूरतमंद परिवारों तक योजना का लाभ अधिक प्रभावी ढंग से पहुंचेगा।

नई व्यवस्था के तहत इच्छुक आवेदकों को अपने मोबाइल फोन में ‘AwaasPlus 2024’ और ‘AadhaarFace RD’ ऐप डाउनलोड करने होंगे। इसके बाद आधार बेस्ड पहचान सत्यापन पूरा कर डिजिटल आवेदन जमा करना होगा। आवेदन प्राप्त होने के बाद सरकार द्वारा नियुक्त सर्वेक्षक संबंधित परिवार के घर पहुंचकर दी गई जानकारी की जांच करेंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि आवेदक योजना की पात्रता शर्तों को पूरा करता है या नहीं। इस प्रक्रिया के जरिए सरकार फर्जी दावों को रोकने और सही लाभार्थियों की पहचान करने का प्रयास कर रही है। खास बात यह है कि यह मॉडल पहले से कई राज्यों में लागू है और अब पश्चिम बंगाल ने भी इसे अपनाने का फैसला किया है।

सरकार ने यह भी ध्यान रखा है कि तकनीकी जानकारी या स्मार्टफोन की कमी के कारण कोई पात्र व्यक्ति योजना से वंचित न रह जाए। ऐसे लोगों के लिए डोर-टू-डोर सर्वे की व्यवस्था की गई है। सर्वेक्षक गांव-गांव जाकर उन परिवारों की जानकारी एकत्र करेंगे, जो स्वयं ऑनलाइन आवेदन नहीं कर सकते। इससे यह सुनिश्चित होगा कि ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले गरीब और जरूरतमंद परिवार केवल तकनीकी बाधाओं के कारण लाभ से वंचित न हों। सरकार का दावा है कि इस पहल से आवास योजना का दायरा और अधिक व्यापक तथा समावेशी बनेगा।

लाभार्थियों की लिस्ट तैयार करने में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए राज्य सरकार ने तीन-स्तरीय सत्यापन प्रणाली भी लागू की है। जिला प्रशासन को निर्देश दिया गया है कि सर्वे किए गए कम से कम 10% परिवारों का दोबारा सत्यापन ब्लॉक या सब-डिवीजन स्तर के अधिकारियों से कराया जाए। इसके अलावा ब्लॉक स्तर के अधिकारी स्वतंत्र रूप से 5% मामलों की जांच करेंगे, जबकि जिला स्तर के अधिकारी 2% आवेदनों का प्रत्यक्ष सत्यापन करेंगे। इस बहु-स्तरीय जांच व्यवस्था का मकसद किसी भी तरह की गड़बड़ी, त्रुटि या गलत चयन को रोकना है।

पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री दिलीप घोष के अनुसार, प्रत्येक ग्राम पंचायत में सर्वे टीमों का गठन कर दिया गया है और लाभार्थियों की पहचान का काम शुरू हो चुका है। यह सर्वेक्षण 20 जुलाई 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार को उम्मीद है कि नई सेल्फ-सर्वे प्रणाली से सही लाभार्थियों की पहचान आसान होगी, शिकायतें कम होंगी और प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ वास्तव में उन लोगों तक पहुंचेगा, जिन्हें इसकी सबसे ज्यादा जरूरत है। यह कदम ग्रामीण आवास योजनाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

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