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मध्यप्रदेश

चिकित्सा के क्षेत्र में सेवा-भाव, कर्तव्यनिष्ठा और मानवीय मूल्यों का समावेश अत्यंत आवश्यक : आयुष मंत्री परमार

भोपाल

उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री  इन्दर सिंह परमार ने कहा कि होम्योपैथी केवल एक चिकित्सा पद्धति नहीं, बल्कि सेवा, संवेदना और समर्पण का माध्यम है। चिकित्सकों का दायित्व केवल रोगों का उपचार करना नहीं, बल्कि समाज को स्वस्थ, जागरूक एवं निरोग बनाने में सक्रिय भूमिका निभाना भी है। उन्होंने कहा कि चिकित्सा के क्षेत्र में सेवा-भाव, कर्तव्यनिष्ठा और मानवीय मूल्यों का समावेश अत्यंत आवश्यक है।

मंत्री  परमार भोपाल स्थित पं. खुशीलाल शर्मा आयुर्वेद संस्थान के रजत जयंती सभागार में आरोग्य भारती एवं शासकीय होम्योपैथी चिकित्सा महाविद्यालय एवं चिकित्सालय, भोपाल के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित "नेशनल होम्योपैथी कॉन्फ्रेंस -अमृतम" शुभारम्भ कर चिकित्सकों, शिक्षाविदों एवं विशेषज्ञों को संबोधित कर रहे थे।

मंत्री  परमार ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में आयुष चिकित्सा पद्धतियों को राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर नई पहचान मिली है। प्रदेश सरकार भी आयुष एवं होम्योपैथी चिकित्सा के विस्तार, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, अनुसंधान तथा चिकित्सा अधोसंरचना के विकास के लिए निरंतर प्रयासरत है। मंत्री  परमार ने उज्जैन में नवीन शासकीय होम्योपैथी चिकित्सा महाविद्यालय स्थापित किए जाने की बात भी कही।

कार्यक्रम के सारस्वत वक्ता एवं राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग, नई दिल्ली के अध्यक्ष डॉ. तारकेश्वर जैन ने कहा कि होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति मानव कल्याण और स्वस्थ समाज के निर्माण की भावना से विकसित हुई है। उन्होंने चिकित्सकों से चिकित्सा पद्धति के मूल सिद्धांतों के प्रति प्रतिबद्ध रहकर जनसेवा करने का आह्वान किया।

आरोग्य भारती के राष्ट्रीय संगठन सचिव डॉ. अशोक कुमार वार्ष्णेय ने समग्र चिकित्सा पद्धतियों के समन्वित विकास पर बल देते हुए कहा कि सभी चिकित्सा पद्धतियों के विशेषज्ञों को सहयोग, संवाद और सेवा की भावना के साथ कार्य करना चाहिए, जिससे समाज को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सके।

देशभर से आए लगभग 450 होम्योपैथिक चिकित्सकों एवं विशेषज्ञों की सहभागिता वाले इस सम्मेलन एवं कार्यशाला में होम्योपैथी चिकित्सा के नवीन आयामों, अनुसंधान, चिकित्सा शिक्षा, जनस्वास्थ्य तथा समग्र स्वास्थ्य प्रबंधन से जुड़े विषयों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया। प्रतिभागियों ने विशेषज्ञों के मार्गदर्शन से नवीन ज्ञान एवं अनुभव प्राप्त किए।

कार्यशाला में अपर सचिव सह आयुक्त आयुष डॉ संजय मिश्रा, प्रख्यात प्रबंधन विशेषज्ञ  एस.बी. डंगायच, आरोग्य भारती के राष्ट्रीय एवं प्रांतीय पदाधिकारी, प्रदेश के विभिन्न होम्योपैथिक चिकित्सा महाविद्यालयों के प्राचार्य, चिकित्सक, शोधकर्ता एवं अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

 

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