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AI और डेटा सेंटर डिमांड से बढ़ी मेमोरी चिप्स की जरूरत, भारत बनेगा बड़ा सेमीकंडक्टर हब

नई दिल्ली
AI, डेटा सेंटर और हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग की बढ़ती जरूरतों के बीच दुनिया भर में मेमोरी चिप्स की मांग तेजी से बढ़ रही है। इसी को देखते हुए भारत भी सेमीकंडक्टर और मेमोरी चिप निर्माण के क्षेत्र में बड़े निवेश आकर्षित करने की तैयारी कर रहा है। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने संकेत दिए हैं कि आने वाले समय में भारत में मेमोरी चिप निर्माण से जुड़ी नई कंपनियां निवेश कर सकती हैं, जबकि पहले से मौजूद कंपनियां भी अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर काम कर रही हैं। आइए जरा विस्तार से इसकी डिटेल्स जानते हैं।

मंत्री के अनुसार, वैश्विक स्तर पर मेमोरी चिप्स की मांग और आपूर्ति के बीच बड़ा अंतर पैदा हो गया है। खासकर AI डेटा सेंटर, क्लाउड कंप्यूटिंग, सुपरकंप्यूटर और हाई-बैंडविड्थ मेमोरी (HBM) चिप्स की बढ़ती जरूरत ने उद्योग पर दबाव बढ़ा दिया है। यही कारण है कि पिछले कुछ तिमाहियों में मेमोरी चिप्स की कीमतों में भी लगातार बढ़ोतरी देखी गई है। इसका असर स्मार्टफोन, लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की लागत पर भी पड़ा है

अश्विनी वैष्णव ने बताया कि सेमीकंडक्टर उद्योग के इतिहास में पहली बार कुछ विशेष प्रकार की मेमोरी चिप्स की इतनी अधिक कमी महसूस की जा रही है। AI आधारित तकनीकों के विस्तार के कारण डेटा प्रोसेसिंग और स्टोरेज की मांग रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुकी है। ऐसे में दुनिया भर की कंपनियां नई उत्पादन इकाइयां स्थापित करने और मौजूदा प्लांट्स का विस्तार करने में जुटी हुई हैं।

उन्होंने कहा कि भारत में डेटा सेंटर सेक्टर का साइज आने वाले सालों में 200 अरब डॉलर से भी अधिक हो सकता है। इतनी बड़ी डिजिटल अर्थव्यवस्था को सपोर्ट करने के लिए विशाल स्टोरेज और हाई-स्पीड मेमोरी इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत होगी। यही वजह है कि मेमोरी चिप निर्माण भारत के लिए एक रणनीतिक क्षेत्र बनता जा रहा है।

मंत्री ने यह भी बताया कि हाई-बैंडविड्थ मेमोरी (HBM) चिप्स का इस्तेमाल मुख्य रूप से AI सिस्टम, डेटा सेंटर, सुपरकंप्यूटर और एडवांस ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट्स में किया जाता है। वर्तमान में इन चिप्स की वैश्विक मांग इतनी तेज है कि कई कंपनियां नई फैक्ट्रियां शुरू कर रही हैं। कुछ नई उत्पादन यूनिट ने हाल ही में व्यावसायिक उत्पादन भी शुरू कर दिया है, जिससे भविष्य में सप्लाई की स्थिति बेहतर होने की उम्मीद है।

भारत सरकार का ‘इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन’ भी इस दिशा में अहम भूमिका निभा रहा है। मिशन 1.0 के तहत देश में सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम की मजबूत नींव रखी जा रही है, जबकि मिशन 2.0 में चिप डिजाइन और सेमीकंडक्टर निर्माण में उपयोग होने वाली मशीनों के विकास पर विशेष जोर दिया जाएगा। सरकार चाहती है कि वैश्विक उपकरण निर्माता भारत में आकर केवल निर्माण ही नहीं, बल्कि डिजाइन और रिसर्च का काम भी करें।

वैष्णव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने दशकों बाद चिप निर्माण कंपनियों का भरोसा जीतने में सफलता हासिल की है। आज भारत केवल चिप उपभोक्ता नहीं, बल्कि वैश्विक सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन का महत्वपूर्ण हिस्सा बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

एक्सपर्ट का मानना है कि यदि भारत इस मौके का सही लाभ उठाता है, तो आने वाले वर्षों में देश इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर निर्माण के क्षेत्र में दुनिया के प्रमुख केंद्रों में शामिल हो सकता है। इससे न केवल निवेश और रोजगार बढ़ेंगे, बल्कि भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता भी मजबूत होगी।

 

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