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विदेश

ढाका में हिंदुओं का विशाल प्रदर्शन, राम मूर्ति निर्माण रुकने पर भड़का विरोध

ढाका
मुस्लिम बहुल बांग्लादेश में अल्पसंख्यक अधिकारों को लेकर एक बार फिर चिंताएं गहरा गई हैं। राजधानी ढाका में शुक्रवार को हजारों हिंदुओं ने भगवान राम की तस्वीर के कथित अपमान और एक भव्य मूर्ति के निर्माण को रोके जाने के विरोध में विशाल मशाल जुलूस निकाला। इस दौरान भारी संख्या में जुटे लोगों ने 'जय श्री राम' के नारे भी लगाए।

ढाका की सड़कों पर उतरे हजारों हिंदू
कट्टरपंथियों द्वारा रंगपुर में भगवान राम की सबसे ऊंची मूर्ति के निर्माण का विरोध करने और कथित तौर पर उनकी तस्वीर का अपमान किए जाने के बाद ढाका में भारी विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। हजारों हिंदुओं ने दोषियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर ढाका में मशाल जुलूस निकाला और 'जय श्री राम' के नारे लगाए। हिंदू महाजोट के आह्वान पर कई हिंदू संगठन और छात्र प्रमुख शाहबाग चौराहे पर इकट्ठा हुए और वहां से नेशनल प्रेस क्लब तक मार्च किया। प्रेस क्लब के सामने एक मानव श्रृंखला भी बनाई गई, जबकि एक अन्य समूह ने ढाका रिपोर्टर्स यूनिटी (DRU) के पास अपना विरोध दर्ज कराया। वहीं, रंगपुर में पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारियों को रोके जाने के बाद हल्की झड़प की भी खबर है।

क्या है पूरा मामला?
प्रदर्शनकारियों का दावा है कि इस महीने की शुरुआत में गाइबांधा में एक प्रदर्शन के दौरान कट्टरपंथी भीड़ ने भगवान राम की एक तस्वीर पर जूता रखकर उसका अपमान किया था। इस मामले में केस तो दर्ज कर लिया गया है, लेकिन अब तक किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई है।

क्यों रोका गया राम मूर्ति का निर्माण?
उत्तरी गाइबांधा जिले के पलाशबाड़ी में एक मंदिर परिसर के तहत भगवान राम की 81 फीट ऊंची मूर्ति बनाई जा रही थी। इसका लगभग 80 प्रतिशत काम पूरा भी हो चुका है। श्री श्री राधा गोविंद मंदिर समिति के अध्यक्ष हरिदास चंद्र दास ने बताया कि कट्टरपंथी समूहों द्वारा प्रोजेक्ट से जुड़े लोगों को धमकियां मिलने के बाद काम रोक दिया गया है। एक कट्टरपंथी मौलवी ने तो बुलडोजर से मूर्ति गिराने तक की धमकी दे डाली थी।

करीब 22 करोड़ बांग्लादेशी टका (लगभग 16 करोड़ रुपये) के इस प्रोजेक्ट में 50 फीट के भगवान कृष्ण और 30 फीट के भगवान शिव की मूर्तियां भी प्रस्तावित हैं। मंदिर समिति के सलाहकार श्यामलाल कुमार महंत के मुताबिक, "सामाजिक सद्भाव बनाए रखने" के लिए फिलहाल काम को रोक दिया गया है। डर के साये में जी रहे आयोजकों ने काम रोकने के साथ ही प्रधानमंत्री तारिक रहमान से हस्तक्षेप की अपील भी की है।

सरकार को 72 घंटे का अल्टीमेटम
तारिक रहमान के नेतृत्व वाली बीएनपी (BNP) सरकार पर निष्क्रियता का आरोप लगाते हुए, प्रदर्शनकारियों ने दोषियों की गिरफ्तारी के लिए 72 घंटे का अल्टीमेटम दिया है। हिंदू समुदाय ने चेतावनी दी है कि अगर मांगें पूरी नहीं हुईं तो आगे और भी रैलियां की जाएंगी। शनिवार को धार्मिक मामलों के मंत्रालय को एक ज्ञापन भी सौंपा जाना है। हिंदू महाजोट ने दो टूक चेतावनी दी है कि अगर राम मूर्ति का निर्माण दोबारा शुरू नहीं करने दिया गया, तो वे बांग्लादेश के सभी 64 जिलों में एक-एक करके राम मंदिर का निर्माण करेंगे। इसके अलावा, राष्ट्रीय पूजा उत्सव समिति ने शनिवार को देशव्यापी आंदोलन की घोषणा की है।

अल्पसंख्यकों की स्थिति पर उठ रहे सवाल
बांग्लादेश में हिंदू सबसे बड़ा धार्मिक अल्पसंख्यक समूह हैं, जो कुल आबादी का लगभग 8 प्रतिशत हैं। पिछली मुहम्मद यूनुस सरकार के दौरान हुए संकट के बाद से वहां हिंदुओं को निशाना बनाने की घटनाओं में तेजी देखी जा रही है। फरवरी में कार्यभार संभालने वाले प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने बार-बार यह दावा किया था कि देश "सभी का है", लेकिन आंकड़ों के मुताबिक इस साल 1 जनवरी से 31 मार्च के बीच ही सांप्रदायिक हिंसा की 133 घटनाएं दर्ज की गई हैं।

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