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जापान बना भारत का अहम LNG सप्लायर पार्टनर, अमेरिका से रीसेल बढ़ा

नई दिल्ली
 भारत का एशिया में एक बेहद शानदार दोस्त है-जापान। यह दोस्त भारत को कभी भी तकलीफ में नहीं डालता है और मुश्किल वक्त में भारत के साथ खड़ा नजर आया। यहां तक कि जब रूस-यूक्रेन युद्ध हो या हालिया अमेरिका-ईरान युद्ध के चलते तेल और गैस की सप्लाई पर संकट आया तो भी जापान आगे बढ़कर भारत की मदद के लिए आया। खास तौर पर लिक्विफा इड नेचुरल गैस (LNG) की सप्लाई भारत को कम नहीं होने दी। बीते 28 फरवरी से होर्मुज स्ट्रेट के जरिये खाड़ी देशों से होने वाली तेल और गैस की सप्लाई तकरीबन ठप सी हो गई है। ऐसे में जापान जैसे सच्चे दोस्तों ने उम्मीद बढ़ा दी है।

अमेरिका से LNG लाकर भर-भरकर भारत को बेचा

  • जापान ने अमेरिका से बड़ी मात्रा में एलएनजी लाकर भारत और चीन जैसे देशों को आपूर्ति कराई। एक नए एनालिसिस 'जीरो कार्बन एनालिटिक्स' के अनुसार, 2020 और 2025 के बीच जापान ने एशियाई देशों को अमेरिका की लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) दोबारा बेची।
  • जापान, जो अब दुनिया के सबसे बड़े LNG ट्रेडर्स में से एक है, अमेरिका और एशियाई बाजारों के बीच एक मध्यस्थ के तौर पर काम कर रहा है। वह भारत, चीन, दक्षिण कोरिया, ताइवान, थाईलैंड, सिंगापुर, बांग्लादेश, पाकिस्तान और मलेशिया जैसे देशों को LNG कार्गो दोबारा बेचता है।
  • 2020 और 2025 के बीच, जापान द्वारा खरीदी गई और दूसरे देशों को दोबारा बेची गई अमेरिकी LNG का लगभग 31 प्रतिशत हिस्सा एशिया भेजा गया।

जापान ने खुद से ज्यादा दूसरों के लिए खरीदी एलएनजी
    एनालिसिस से पता चलता है कि 2021 से जापान ने घरेलू इस्तेमाल के लिए आयात की गई मात्रा की तुलना में विदेशी बाजारों में ज्यादा अमेरिकी LNG बेची।
    'डेटा डेस्क' के अनुसार, 2021 और 2025 के बीच, जापान की अमेरिकी LNG की विदेशी बिक्री उसके घरेलू LNG आयात से 77 प्रतिशत ज्यादा थी।

LNG बाजार के विस्तार में जापान की अहम भूमिका
    जापान में LNG ट्रेडिंग में बढ़ोतरी और US LNG निर्यात का विस्तार एक साथ हुआ। 2023 में US दुनिया का सबसे बड़ा LNG निर्यातक बन गया और 2025 तक इस स्थिति को बनाए रखा।
    2025 में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नए LNG निर्यात प्रोजेक्ट्स की मंजूरी पर लगी पिछली रोक हटा दी और जापान व दक्षिण कोरिया जैसे बाजारों में आपूर्ति के उद्देश्य से 44 बिलियन डॉलर के अलास्का LNG प्रोजेक्ट को बढ़ावा दिया।

जापान तेजी से खरीद रहा है एलएनजी
    मई 2026 तक, US सरकार ने लुइसियाना और टेक्सास में पांच नए LNG टर्मिनलों और एक मौजूदा टर्मिनल से निर्यात को मंजूरी या दोबारा मंजूरी दे दी थी।
    साथ ही, जापान ने लंबे समय के लिए LNG की खरीद भी बढ़ाई है। जून 2025 में, घरेलू मांग में गिरावट के बावजूद 'एनर्जी फॉर ए न्यू एरा' (Energy for a New Era) ने US LNG आपूर्तिकर्ताओं के साथ कई 20-वर्षीय समझौते किए। मार्च 2026 में कई वर्षों के अतिरिक्त आपूर्ति अनुबंधों पर हस्ताक्षर किए गए।

जापान से सबसे ज्यादा खरीद रहे द. कोरिया, चीन और भारत

  • दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों ने भी LNG आयात बढ़ाया है। घरेलू गैस भंडार में कमी के कारण 2020 और 2024 के बीच थाईलैंड का LNG आयात 100 प्रतिशत से अधिक बढ़ गया।
  • अप्रैल 2025 में, थाईलैंड ने 15 वर्षों में 15 मिलियन मीट्रिक टन US LNG आयात करने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए। दक्षिण कोरिया, चीन और भारत। ये तीन एशियाई देश, जापान से दोबारा बेचे जाने वाले US LNG कार्गो के लिए जापान के दस सबसे बड़े गंतव्यों में शामिल थे।

63.5 बिलियन किलो CO2 का उत्सर्जन

  • 'जीरो कार्बन एनालिटिक्स' के एनालिसिस के अनुसार, 5 साल में दोबारा बेची गई इस एलएनजी से अनुमानित 63.5 बिलियन किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) का उत्सर्जन हुआ, जो लगभग कोयले से चलने वाले 17 पावर प्लांट के सालाना उत्सर्जन के बराबर है।
  • 'जीरो कार्बन एनालिटिक्स' का यह एनालिसिस 'सेंटर फार रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर' और स्वतंत्र जांच समूह 'डेटा डेस्क' के LNG शिपमेंट डेटा पर आधारित है। इसमें प्रोडक्शन, लिक्विफैक्शन, शिपिंग, रीगैसिफिकेशन और कंबशन (जलाने) के चरणों में उत्सर्जन का अनुमान लगाया गया है।

किस चीज से कितना उत्सर्जन हुआ

  • रिपोर्ट का अनुमान है कि जापान के रीसेल कॉन्ट्रैक्ट के तहत अमेरिका में उत्पादित और एशियाई देशों को भेजी गई 16.5 बिलियन किलोग्राम LNG से पूरी सप्लाई चेन में 63.5 बिलियन किलोग्राम CO2 का उत्सर्जन हुआ।
  • कुल उत्सर्जन में दहन (combustion) का हिस्सा सबसे ज्यादा, यानी 78 प्रतिशत था। उत्पादन और लिक्विफैक्शन (liquefaction) का योगदान लगभग 16 प्रतिशत था, जबकि शिपिंग का हिस्सा 4.8 प्रतिशत और रीगैसिफिकेशन (regasification) व वितरण का हिस्सा लगभग 0.5 प्रतिशत था।

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