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विदेश

80 मिनट चली अमेरिका-ईरान वार्ता बेनतीजा, लेबनान संकट पर अटकी बातचीत, बीच में ही वॉकआउट

वाशिंगटन
महीनों से मिडिल ईस्ट में तनाव जारी है. संघर्ष को समाप्त करने के लिए स्विट्जरलैंड में अमेरिका और ईरान के बीच रविवार को पहले दौर की बैठक हुई. हालांकि, ये बैठक तनावपूर्ण रहा. लेबनान को लेकर दोनों देश के बीच मतभेद खुलकर दिखे. साथ ही साथ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान की वजह से बातचीत बिगड़ते हुए नजर आई। 

अमेरिका की ओर से बातचीत करने के लिए अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस मौजूद थे. वहीं ईरान की ओर से संसद अध्यक्ष मोहम्मद बगेर ग़ालिबफ़ और विदेश मंत्री अब्बास अराघची शामिल हुए। 

स्विट्जरलैंड में आयोजित हुई ये बैठक हाल ही में अमेरिका और ईरान के बीच हुए अंतरिम समझौते के बाद आयोजित की गई थी. इस बैठक का उद्देश्य साफ था कि दोनों देश सभी मुद्दों पर चर्चा करें और चार महीने से जारी संघर्ष को समाप्त करने की दिशा में आगे बढ़ें। 

बैठक शुरू होने के पहले ईरान के प्रतिनिधिमंडल ने कतर और पाकिस्तान के मध्यस्थों से अलग-अलग बैठक की. इसके बाद ईरान ने साफ कर दिया है कि अमेरिका से बातचीत की प्रगति इस बात पर निर्भर करता है कि वह समझौते की शर्तों को ज़मीन पर कितना लागू करता है और लेबनान में इजरायली सैन्य कार्रवाई पर कितना विराम लगाता है। 

ईरान ने अमेरिका पर आरोप लगाया है कि उसने अब तक समझौते की पहली शर्त यानि सभी मोर्चों पर सीजफायर लागू करने में सफल नहीं हुआ है. ईरान का कहना है कि इसका प्रमाण लेबनान में देखा जा सकता है. वहां अभी भी इजरायल की ओर से सैन्य कार्रवाई जारी है। 

अमेरिका और ईरान के बीच क़रीब 80 मिनट तक बैठक चली. जिसमें प्रतिबंधों में राहत और ईरान की फ्रीज संपत्तियों को रिलीज कराने जैसे विषयों पर चर्चा हुई। 

वार्ता के दौरान तनाव तब बढ़ गया था जब डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पोस्ट के ज़रिए ईरान को धमकी दी कि वह लेबनान में अपने सहयोगी समूहों को नियंत्रित करे. इससे ईरान भड़क उठा और ईरानी प्रतिनिधिमंडल कुछ देर के लिए बैठक छोड़ दी. हालांकि, बाद में ग़ालिबफ़ ने कहा कि अमेरिका को अपने बयानों में सावधानी बरतने की ज़रूरत है. ईरान की सेना किसी भी स्थिति में जवाब देने के लिए तैयार है। 

वहीं, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कूटनीतिक प्रक्रिया में ऐसी घटनाएं सामान्य है. कठिन वार्ताओं में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं और बातचीत प्रगति करते रहती है। 

उन्होंने ये भी कहा कि डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल को ईरान के साथ रिश्ते सुधारने के लिए नए दृष्टिकोण से आगे बढ़ने के निर्देश दिए हैं। 

इस तनाव का असर साफ देखने को मिला. ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने प्रस्तावित प्रतीकात्मक हैंडशेक और संयुक्त तस्वीर से साफ इनकार कर दिया। 

दूसरी ओर इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने संकेत दिया कि दक्षिणी लेबनान में इजराइली सैन्य मौजूदगी फिलहाल जारी रहेगी. नेतन्याहू का कहना है कि इज़रायल अपनी सुरक्षा के लिए जो क्षेत्र बनाया है उसे जरूरत पड़ने तक बनाए रखेगा. इजरायल एक खुद्दार देश है. हर बात पर सहमति होना जरूरी नहीं है. डोनाल्ड ट्रंप हर कुछ नहीं करते, जो हम चाहते हैं. और न ही मैं हर कुछ करता हूं जो वो चाहते हैं। 

ईरान-अमेरिका वार्ता में गतिरोध से कच्चे तेल के दाम में बढ़ोतरी हुई है. ब्रेंट क्रूड 81 डॉलर के पार पहुंच गई है. $1 से ज्यादा ब्रेंट क्रूड महंगा हुआ है। 

 

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