विदेश

चीन को मंदी से उबारने पर होगा मंथन, अमेरिकी प्रतिबंधों से निपटने का जिनपिंग का मसौदा तैयार

बीजिंग.

चीन को मंदी से उबारने और अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए राष्ट्रपति शी जिनपिंग सोमवार से अपनी पार्टी कम्युनिस्ट पार्टी के सदस्यों के साथ चार दिवसीय आर्थिक समीक्षा बैठक करेंगे। बैठक में देश की अर्थव्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए पार्टी की ओर से तैयार किए गए नए मसौदे पर चर्चा की जाएगी। बताया जाता है कि गुरुवार तक चलने वाली बैठक में चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीसी) की केंद्रीय समिति के 376 स्थायी और वैकल्पिक सदस्य भाग लेंगे।

कोविड-19 लॉकडाउन के बाद से चीन की अर्थव्यवस्था लगातार मंदी से गुजर रही है। विश्व की दूसरी सबसे बड़ी 18 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर वाली अर्थव्यवस्था के मौजूदा हाल पर दुनियाभर की नजर है। इस स्थिति में सुधार के लिए राष्ट्रपति शी जिनपिंग की अध्यक्षता वाली उनकी सत्तारूढ़ पार्टी सीपीसी के शक्तिशाली पोलित ब्यूरो ने 27 जून को आर्थिक समीक्षा बैठक में चर्चा के लिए नया ड्रॉफ्ट तैयार किया है। इस ड्रॉफ्ट में चीन को आगे बढ़ाने के लिए नई स्थितियों और समस्याओं का विश्लेषण किया गया। साथ ही सुधार लागू करने की योजना बनाई गई है। चीनी मीडिया के मुताबिक पोलित ब्यूरो ने माना है कि देश के उत्पादों की कम होती मांग, देश के बाहर का अनिश्चित वातावरण और चीन के उद्योगों की देश-विदेश में कठिन स्थिति से अर्थव्यवस्था प्रभावित हुई है। हालांकि चीन ने आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों का उत्पादन और क्षमता बढ़ाने का प्रयास किया, लेकिन अमेरिका और यूरोपीय संघ की ओर से चीनी आयात पर लगाए गए भारी टैरिफ शुल्क और प्रतिबंधों से दिक्कतें आ रही हैं। ड्रॉफ्ट में इन प्रतिबंधों से निपटने के उपाय और चुनौतियों को भी शामिल किया है। ड्रॉफ्ट के मुताबिक कम्युनिस्ट पार्टी 2035 तक चीन में उच्च मानक वाली सामाजिक बाजार अर्थव्यवस्था का निर्माण करना चाहती है। मई में चीन की अर्थव्यवस्था की समीक्षा के बाद आईएमएफ ने चीन के अधिकारियों को इस बारे में चेताया भी था कि अगर आर्थिक सुधार नहीं किए गए तो 2029 तक चीन की अर्थव्यवस्था 3.3 फीसदी तक सिकुड़ सकती है और देश को मंदी का सामना करना पड़ सकता है। आईएमएफ की डिप्टी एमडी गीता गोपीनाथ ने बताया कि चीन की आर्थिक वृद्धि 2024 में 5 प्रतिशत पर लचीली रहने और 2025 में धीमी होकर 4.5 प्रतिशत रहने का अनुमान है।

रियल एस्टेट क्षेत्र के सुधार पर जोर
भारतीय-चीन में मंदी का सबसे बड़ा असर रियल एस्टेट कारोबार पर पड़ा है। चीन की अर्थव्यवस्था की नींव रियल एस्टेट क्षेत्र में भारी गिरावट के चलते कई बड़े बिल्डर दिवालिया हो गए हैं। पहले तो चीन ने इस क्षेत्र में आर्थिक सुधार लागू करने में हिचिकचाहट की, लेकिन अब बिना बिके घरों और निष्क्रिय भूमि को दोबारा खरीदने के लिए अरबों डॉलर आवंटित किए हैं। इसके लिए पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना ने 300 बिलियन युआन (लगभग 42.25 बिलियन अमेरिकी डॉलर) की ऋण सुविधा शुरू की है। गीता गोपीनाथ ने इसे जरूरी बताया। चीन में आईएमएफ के वरिष्ठ प्रतिनिधि स्टीव बार्नेट ने कहा कि चीन को आर्थिक सुधार जारी रखने पर ध्यान देना चाहिए।

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